मौसम बदलते ही वायरल और सांस के संक्रमण ने बढ़ाई अस्पतालों की भीड़, मेडिकल कॉलेज और विक्टोरिया अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ी, निजी क्लीनिकों में भी बढ़े मामले; बच्चों पर ज्यादा असर

जबलपुर, यश भारत। बारिश के बीच तापमान में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव का असर अब लोगों के स्वास्थ्य पर दिखाई देने लगा है। बुखार, खांसी-जुकाम, गले में खराश, नाक बहना, बदन दर्द और सांस से जुड़ी शिकायतों के मरीजों की संख्या बढ़ने से मेडिकल कॉलेज अस्पताल और जिला अस्पताल विक्टोरिया की ओपीडी में भीड़ बढ़ रही है। निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में भी इन लक्षणों के साथ बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों में देखने को मिल रहा है।
इन्फ्लुएंजा के साथ एडिनोवायरस, राइनोवायरस का जोर
चिकित्सकों के अनुसार इस मौसम में वायरल रेस्पिरेटरी इंफेक्शन के मामले बढ़ते हैं। इन्फ्लुएंजा वायरस के साथ एडिनोवायरस, राइनोवायरस और अन्य सामान्य श्वसन वायरस भी सर्दी-जुकाम एवं सांस संबंधी संक्रमण का कारण बन सकते हैं। इस बार भी मरीजों में इन संक्रमणों से मिलते-जुलते लक्षण दिखाई दे रहे हैं। हालांकि इसे किसी नए या अज्ञात वायरस का प्रकोप मानने की बजाय चिकित्सकीय जांच के बाद ही संक्रमण की पुष्टि की जा सकती है।
एक बीमार तो पूरा परिवार चपेट में
कई परिवारों में एक सदस्य के बीमार पड़ने के दो-तीन दिन बाद दूसरे सदस्यों में भी बुखार, खांसी-जुकाम और गले में खराश जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। बच्चों में इसके साथ उल्टी, दस्त, पेट दर्द और कमजोरी की शिकायत भी देखी जा रही है। कुछ मामलों में सांस लेने में परेशानी और सीने में जकड़न भी हो सकती है।
बचाव के लिए सावधानी जरूरी
चिकित्सकों ने भीड़भाड़ वाली जगहों पर अनावश्यक जाने से बचने, खांसते-छींकते समय मुंह-नाक ढंकने, हाथों को बार-बार साबुन से धोने और पर्याप्त पानी व पौष्टिक भोजन लेने की सलाह दी है। बीमार व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत सामान साझा नहीं करना चाहिए। बच्चों को लक्षण होने पर स्कूल या भीड़भाड़ वाली जगहों पर भेजने से बचें। तेज या लगातार बुखार, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक कमजोरी अथवा बच्चे की हालत बिगड़ने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेना जरूरी है।
रैपिड एक्शन टीम गठित
बरसात के मौसम में दूषित पानी और गंदगी से होने वाली संक्रामक बीमारियों तथा मलेरिया-डेंगू की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी ने स्वास्थ्य अधिकारियों की बैठक लेकर जिले में मौसमी बीमारियों की स्थिति और रोकथाम के लिए तैयार सूक्ष्म कार्ययोजना की समीक्षा की। उन्होंने जिला स्तर पर रैपिड एक्शन टीम का गठन किया है, जिसका नेतृत्व स्वयं सीएमएचओ करेंगे।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बारिश में उल्टी-दस्त, पेचिश, हैजा, पीलिया और टाइफाइड जैसी जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। नागरिकों को घरों की छत, कूलर या अन्य स्थानों पर पानी जमा नहीं होने देने की सलाह दी गई है, ताकि मच्छरों का लार्वा न पनपे।
उन्होंने कहा कि उल्टी-दस्त, लगातार बुखार, पीलिया या अन्य लक्षण दिखाई देने पर देरी न करें और तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय परामर्श लें।







