मंडलाlअखिल भारतीय बाघ आकलन (AITE) 2026 की तैयारियों को गति देने के उद्देश्य से कान्हा टाइगर रिजर्व में आयोजित तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम बुधवार को संपन्न हो गया। मध्य प्रदेश वन विभाग द्वारा खटिया इको सेंटर में 3 से 5 नवंबर तक यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया था। इस दौरान अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एल. कृष्णमूर्ति भी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण में कान्हा लैंडस्केप के विभिन्न वनमंडलों, परियोजना मंडलों और प्रादेशिक इकाइयों से चयनित लगभग 42 मास्टर ट्रेनर्स और समन्वय अधिकारियों ने भाग लिया। इसका संचालन डब्ल्यूआईआई (वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया), कान्हा के फील्ड बायोलॉजिस्ट और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य फील्ड स्टाफ को बाघ आकलन की प्रक्रिया, डेटा संकलन तकनीक, जीआईएस मैपिंग और कैमरा ट्रैपिंग की बारीकियों से अवगत कराना था। इसमें फेज-1 और फेज-3 के कार्यों पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
प्रतिभागियों को कॉर्निवोर फाइंड सर्वे, ट्रांजिट लाइन वॉकिंग और कैमरा ट्रैपिंग एक्सरसाइज जैसी प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। कान्हा टाइगर रिजर्व की डिप्टी डायरेक्टर (बफर) अमिता केबी ने बताया कि कान्हा लैंडस्केप के सभी वनमंडलों के लिए कान्हा टाइगर रिजर्व नोडल केंद्र है। इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण में तैयार किए गए मास्टर ट्रेनर्स अब अपने-अपने वनमंडलों में फील्ड कर्मचारियों को प्रशिक्षित करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले वर्षों में बाघ आकलन के दौरान सामने आई तकनीकी और मैदानी समस्याओं पर चर्चा कर उनके समाधान भी सुझाए गए। प्रशिक्षण के दौरान सुबह 6 से 9 बजे तक तीन फील्ड सत्र आयोजित किए गए, जबकि 10 से अधिक सत्र क्लासरूम में हुए। बाघ आकलन 2026 के तहत कैमरा ट्रैपिंग का कार्य 15 नवंबर से शुरू होगा। इसके बाद फील्ड सर्वे 1 दिसंबर से प्रारंभ किया जाएगा।
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