दो माह में 15 लोगों की सर्पदंश से मौत, अंधविश्वास में गंवाई जान, समाजसेवियों ने संभाला जागरूकता का मोर्चा

कटनी, यशभारत। जिले के ग्रामीण अंचलों में सर्पदंश सांप के काटने की घटनाएं और उनसे होने वाली मौतों का सिलसिला लगातार जारी है। पिछले दो महीनों के भीतर ही जिले में 15 से अधिक लोग सर्पदंश का शिकार होकर अपनी जान गंवा चुके हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और स्थानीय आंकड़ों के अनुसारए अधिकांश मौतों का मुख्य कारण समय पर चिकित्सीय इलाज न मिलना और ग्रामीणों का अंधविश्वास के चलते झाड़ फंूक के चक्कर में कीमती समय बर्बाद करना है। अंधविश्वास के इस ताने बाने को तोडऩे और कीमती जानें बचाने के लिए समाजसेवियों ने ग्रामीण इलाकों में मोर्चा संभाल लिया है। इसी क्रम में रविवार को समाज सेवा विकास संस्था कटनी की टीम ने बड़वारा क्षेत्र के अत्यंत संवेदनशील और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया।
दर्जनों गांवों मे घर.घर पहुंचकर लोगों को किया जागरूक
संस्था के कार्यकर्ताओं ने बड़वारा जनपद के लखाखेरा, बाजरवारा, सलैया, ठूठीया, भदावर, नेगवा और गुड़ा सहित कई गांवों का दौरा किया। इस दौरान टीम ने मनरेगा के तहत मजदूरी कर रहे महिला एवं पुरुष मजदूरों को और खेतों में काम करने वाले किसान एवं आम ग्रामीणों को एक एकत्र कर सर्पदंश से बचाव और प्राथमिक उपचार के सही तरीकों की जानकारी दी। समाजसेवियों ने ग्रामीणों को समझाया कि सांप के काटने पर झाड़ फंूक या तांत्रिकों के पास जाना जानलेवा साबित हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो बिना एक मिनट भी गंवाए उसे तत्काल नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल ले जाएं, जहां एंटी वेनम एंटी.स्नेक वेनम का इंजेक्शन उपलब्ध रहता है। सही समय पर मिला चिकित्सीय इलाज ही मरीज की जान बचा सकता है। अभियान की अगुवाई कर रहीं समाजसेवी सावित्री केवट ने बताया कि उनकी टीम लगातार बड़वारा क्षेत्र के दर्जनों गांवों में सर्पदंश को लेकर लोगों को सतर्क कर रही है। उन्होंने कहाए हम हर साल मानसून की शुरुआत से पहले ही यह अभियान शुरू कर देते हैं, क्योंकि बारिश के मौसम में सांपों का बिलों से बाहर निकलना बढ़ जाता है। हमारा एकमात्र उद्देश्य यह है कि सही जानकारी के अभाव या अंधविश्वास में किसी भी गरीब और ग्रामीण की जान न जाए।
अस्पताल पहुंचने में देरी ही सबसे बड़ा खतरा
स्वास्थ्य विभाग भी इस बात की पुष्टि करता है कि जहरीले सांप के काटने के बाद शरीर में जहर फैलने के लिए कुछ घंटे ही बेहद संवेदनशील होते हैं। जब ग्रामीण अस्पताल जाने के बजाय गांव के झाड़.फूंक करने वालों के चक्कर काटते हैं, तो शरीर में जहर पूरी तरह फैल जाता है और मरीज को बचाना मुश्किल हो जाता है। समाजसेवियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी भ्रम में न आएं और केवल आधुनिक डॉक्टरी इलाज पर भरोसा करें।






