छींद वाले दादा जी के नाम 24 वें सुंदर कांड का आयोजन यशभारत के संस्थापक आशीष शुक्ला हुए सम्मानित

भोपाल। प्रत्येक माह के द्वितीय शनिवार को आयोजित होने वाली एक शाम छींद वाले दादाजी के नाम श्रृंखला संगीतमय सुंदरकांड 24 वा पाठ भोपाल के हाल में विशाल भव्यता दिव्यता के साथ हुआ। इस दौरान यशभारत समाचार पत्र के संस्थापक आशीष शुक्ला को रामनामी दुपट्टा ओढा़कर और स्मृति चिन्ह् देकर सम्मानित भी किया गया। यशभारत के स्थानीय संपादक सूर्यकांत चतुर्वेदी एवं मैनेजर प्रमोद नगाइच का भी सम्मान किया। इस वक्त जबलपुर से पधारे सतीश सोनी भी मौजूद थे। उनके अलावा उन सकल समाज के 40 सनातन धर्म प्रेमियों का स्वागत सम्मान किया गया जिनके संपूर्ण जून माह में जन्मदिन एवं वैवाहिक वर्षगांठ की तिथियां थी। विगत 24 पाठों में 881 महानुभावों को श्री सुंदरकांड पारिवारिक मंडल स्वागत सम्मान कर चुका है। अगला 25 वा सुंदरकांड पाठ 12 जुलाई 2025 को आयोजित किया जाएगा। पाठ की रजत जयंती है। इस दौरान तीन ऋदालुओं का लकी ड्रा से चयन कर उन्हें रामायण की प्रतियां भी आयोजकों की ओर से नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी द्बारा भेंट की गई। अभी तक 1119 श्री रामचरितमानस अर्थ सहित भेंट की जा चुकी है। इसके पहले संगीत के साथ सुंदर कांड का आयोजन किया गया। इस दौरान 51 दीपकों के साथ भव्य आरती भी की गई। इस दौरान भाजपा नेता गिरीश शर्मा, पार्षद प्रियंका मिश्रा, बच्चन आचार्य, गुफा मंदिर के प्रमोद भारगव अमित चौरसिया आरजीवीपी के सब रजिस्ट्रार उदय चौरसिया, निवेदिता व्यास आदि लोग मौजूद थे।

गौरतलब है कि इसका आयोजन सुदंर कांड पारिवारिक मंडल द्वारा प्रत्येक माह के द्वितीय शनिवार को श्री परशुराम मंदिर, शिवाजी नगर में आयोजित किया जाता है। – एक शाम छींद वाले दादा जी के नाम”* केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और आध्यात्मिक उन्नति का एक विराट मंच है। यह आयोजन समाज के हर वर्ग—बच्चों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक, गरीबों से लेकर संपन्न तक, शिक्षित से लेकर सामान्य जन तक—को एक सूत्र में बाँधने का अनुपम कार्य कर रहा है। यह केवल भजन, कीर्तन या पूजा-पाठ का माध्यम नहीं है, बल्कि यह तो एक ऐसे आंदोलन की तरह उभरकर सामने आया है, जो सनातन मूल्यों की पुनस्र्थापना, पारिवारिक मूल्यों की रक्षा और आत्मा की चेतना को जाग्रत करने में संलग्न है।
हनुमान जन्मोत्सव पर
विशेष आयोजन
14 जून को आयोजित 24वें पाठ में श्री हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर विशेष आयोजन किए जाएंगे, जिसमें रामायण वितरण योजना (लकी ड्रा)” का शुभारंभ भी शामिल* होगा। यह केवल एक योजना नहीं, बल्कि धर्म को जीवन में आत्मसात कराने की क्रांतिकारी पहल है, जो युवाओं को संस्कारित करने और समाज को नैतिक मूल्यों से युक्त करने का मार्ग प्रशस्त करेगी। मध्य प्रदेश की पहली वैष्णव किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर साध्वी संजना जी के करकमलों से 05 सनातन प्रेमी महानुभावों को श्री रामचरितमानस अर्थ सहित प्रतियां भेंट की गई। यह योजना निरंतर व्यापक रूप में चलती रहेगी।
यह है बिशेषता
इस आयोजन की विशेषता यह है कि यहाँ एक वर्ष के बालक से लेकर 96 वर्ष के वृद्धजनों तक, जिनका जन्मदिन या वैवाहिक वर्षगाँठ अप्रैल माह में होता है, उन्हें सार्वजनिक रूप से आमंत्रित कर सम्मानित किया जाता है। यह आयोजन एक संदेश देता है कि जीवन के हर पड़ाव में व्यक्ति को आदर और अपनापन मिलना चाहिए। यह आयोजन पारिवारिक एकता को बढ़ावा देता है जहाँ समस्त पीढिय़ाँ एकत्र होकर अपने संस्कारों से जुड़ती हैं। सामाजिक समरसता की मिसाल प्रस्तुत करते हुए यह कार्यक्रम समाज के हर वर्ग को एक मंच पर लाकर सच्चे अर्थों में लोकतांत्रिक, धार्मिक और सामाजिक एकता का आदर्श प्रस्तुत करता है।
हो चुके 10 भंडारे
सुदंर कांड पारिवारिक मंडल द्वारा अब तक 10 से अधिक भंडारों का आयोजन कर अन्नदान की परंपरा को जीवंत रखा गया है। संगीतमय सुंदरकांड पाठ जैसे कार्यक्रमों से लोगों को मानसिक शांति, आध्यात्मिक बल और जीवन में दिशा मिलती है। यह आयोजन सेवा की उस परंपरा को भी आगे बढ़ाता है, जिसमें ठंड में कंबल वितरण और गर्मियों में प्याऊ की व्यवस्था कर उपेक्षितों की सेवा की जाती है। इस मंच ने वैवाहिक मिलन की दिशा में भी एक नवीन पहल की है, जिसमें संस्कारित और सादगीपूर्ण विवाहों को बढ़ावा दिया जाता है। अब तक 9 से अधिक जोड़े इस कार्यक्रम के माध्यम से जीवनसाथी प्राप्त कर चुके हैं। डॉ. अनिल भार्गव वायु के मुताबिक यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि मानसिक और आत्मिक उन्नति के लिए भी कार्य कर रहा है। “जीवन जीने की कला” जैसे विषयों पर सेमिनार आयोजित किए जाते हैं, जहाँ लोग जीवन के संघर्षों से लडऩे, सकारात्मक सोच को अपनाने और आत्म-निर्भर बनने की दिशा में मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं। युवाओं के लिए करियर काउंसलिंग की व्यवस्था इस मंच को आधुनिक समाज की आवश्यकताओं से भी जोड़ती है।
आयोजन की भविष्य की
योजनाएँ भी अत्यंत प्रेरणादायी हैं
गुरुकुल शिक्षा पुनर्जागरण योजना के माध्यम से वैदिक शिक्षा और आधुनिक ज्ञान का समन्वय, स्वदेशी स्वावलंबन अभियान द्वारा ग्राम्य उद्योगों को बढ़ावा और धर्म-विज्ञान संवाद द्वारा आस्थावान आधुनिक समाज का निर्माण। यह कार्यक्रम स्वयं में एक विचार है, एक साधना है, और एक क्रांति है – जो धर्म, संस्कृति, सेवा और शिक्षा को एक सूत्र में पिरोकर भारत को पुन: उसके दिव्य स्वरूप में लौटाने का प्रयास है।
यह लोग थे उपस्थित
श्री कृष्णा सूर्यवंशी, डॉ अनिल भार्गव वायु पंडित बच्चन आचार्य श्री अजय चतुर्वेदी श्री प्रमोद भार्गव श्री राजेंद्र भार्गव श्री शरद आचार्य श्री सुखेंद्र मिश्रा जी पंडित गिरीश शर्मा, श्री राकेश चतुर्वेदी श्री अमितानंद श्री निरंजन सिंह ठाकुर श्री रविंद्र शर्मा श्रीमती रेनू शर्मा श्रीमती रानी ठाकुर श्रीमती संजना रिछारिया श्रीमती ममता शर्मा श्रीमती सारिका आचार्य श्रीमती स्वाति चतुर्वेदी श्रीमती प्रियंका अनिल मिश्रा श्रीमती दीपा शर्मा श्रीमती स्वाति भार्गव श्रीमती जय माला दुबे श्रीमती देव मनी चतुर्वेदी श्रीमती सरोज भार्गव श्री बीके दुबे श्री राजेंद्र जोशी श्रीमती बावली जोशी श्री मिथिलेश गौतम श्री एसपी त्रिपाठी श्री हिमांशु मिश्रा सूर्योदय चौरसिया डॉक्टर सी के चौरसिया श्री हेमंत श्रीवास्तव श्री जगदीश श्रीवास्तव श्री सतीश पाठक, श्री सोनू पालीवाल श्री प्रवीण उपाध्याय श्री आज्ञाराम चौधरी श्री अजय शर्मा श्री विपिन भार्गव श्री एमपी व्यास श्रीमती निवेदिता व्यास, श्री भारत द्विवेदी श्री अवध नारायण भार्गव श्री तुलसीराम भार्गव श्री राजेंद्र रघुवंशी आदि उपस्थित थे।







