खदानों में ब्लास्टिंग से स्कूल भवनों में दरारें, बच्चों की सुरक्षा दांव पर, कभी भी हो सकती बड़ी दुर्घटना, ग्रामीणों का आरोप : खदानों में नियमों को ताक पर किया जा रहा विस्फोट

कटनी/रीठी, यशभारत। रीठी तहसील क्षेत्र के अंतर्गत संचालित पत्थर खदानों की बेकाबू और कथित नियम विरुद्ध ब्लास्टिंग अब सिर्फ पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि जनजीवन, बच्चों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर सीधा हमला बनती जा रही है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि शासकीय माध्यमिक विद्यालय की इमारत तक इस कंपन और धमाकों की मार से नहीं बच रही है। स्कूल भवन की दीवारों और छतों में बड़ी-बड़ी दरारें उभरकर आने से अब बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि क्या मासूम बच्चों की जान से बड़ा भी कोई मुनाफा है। इस ओर न तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों का ध्यान है और न ही प्रशासन का।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के आसपास संचालित खदानों में नियमों को ताक पर रखकर भारी क्षमता के विस्फोट किए जा रहे हैं। इन धमाकों से पैदा होने वाला कंपन अब घरों, स्कूलों और आम जनजीवन को झकझोर रहा है। परेवागार, कारीपाथर सहित आसपास के क्षेत्रों में मकानों में दरारें, धूल का बढ़ता प्रदूषण, जलस्रोतों पर संकट और दहशत का माहौल लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहा है। सबसे गंभीर और विचारणीय पहलू यह है कि पत्थर खदानों में रात के समय ब्लास्टिंग पूरी तरह प्रतिबंधित और अवैध मानी जाती है। नियमों के तहत विस्फोट से पूर्व आसपास के लोगों को सायरन या हूटर बजाकर चेतावनी देना अनिवार्य है। पर्यावरण स्वीकृति में तय मानकों के अनुसार ही विस्फोट की अनुमति होती है लेकिन यदि इन नियमों का पालन नहीं हो रहा, तो सवाल यह है कि क्या कानून सिर्फ कागजों तक सीमित है। मामला अब सिर्फ भवनों में आई दरारों तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि संभावित जनहानि और बड़े हादसे की आशंका को भी जन्म दे रहा है। यदि स्कूल भवन की हालत लगातार कमजोर हो रही है तो किसी भी अप्रिय स्थिति की जिम्मेदारी कौन लेगा।
क्या कहते हैं ग्रामीण
ग्रामीणों ने मांग की है कि स्कूल भवन का तत्काल तकनीकी परीक्षण कराया जाए। क्षेत्र की खदानों में हो रही ब्लास्टिंग की उच्चस्तरीय जांच हो और यह स्पष्ट किया जाए कि आखिर किसकी निगरानी में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इस संबंध में रीठी एसडीएम से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं हो सकी। वहीं विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि शिकायत पहले भी की गई थी पर अपेक्षित कार्यवाही नहीं हुई। अब लोगों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं।







