अपराधियों की डिजिटल प्रोफाइल तैयार कर रही पुलिस, अपराधों की रोकथाम के लिए तकनीकी साधनों का उपयोग, सिंगल क्लिक से खंगाला जा सकेगा क्रिमिनल डेटा

कटनी, यशभारत। अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस अब तकनीकी साधनों का उपयोग कर रही है। गंभीर किस्म की अपराधिक वारदातों को अंजाम देने वाले शातिर अपराधियों पर नजर रखने पुलिस एक खास सॉफ्टवेयर के माध्यम से हर गिरफ्तार व्यक्ति की डिजिटल क्राइम प्रोफाइल तैयार कर रही है। इसे केंद्रीय जांच एजेंसियों जैसे सीबीआई, एनआइए और डीआरआइ से भी जोड़ा जा रहा है। इसके अलावा लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू, एटीएस, एसटीएफ और साइबर पुलिस भी लिंक्ड होंगी, ताकि गिरफ्तार होने वाले व्यक्तियों का डेटा सिंगल क्लिक से खंगाला जा सके। यह व्यवस्था नेशनल क्राइम रेकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के मेजरमेंट कलेक्शन यूनिट एमसीयू प्रोजेक्ट में लागू की गई है। सूत्रों के मुताबिक एनसीआरबी राज्यों को सॉफ्टवेयर मुहैया करा रहा है, जबकि हार्डवेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च राज्य पुलिस को उठाना पड़ेगा। इस सॉफ्टवेयर के तहत प्रदेश में अब तक 7 हजार 500 से ज्यादा गिरफ्तार किए गए अपराधियों की डिजिटल प्रोफाइल तैयार की जा चुकी है। कटनी की बात करें तो यहां भी पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा के निर्देशन में पुलिस द्वारा अपराधियों की डिजिटल प्रोफाइल तैयार की गई है। इसमे अपराधियों का रिकार्ड भी दर्ज किया जा रहा है।
ऐसे तैयार होगी बदमाशों की डिजिटल प्रोफाइल
1. फिंगरप्रिंट और पाम प्रिंट।
2. आईरिस और रेटिना स्कैन।
3. गेट पैटर्न चलने का ढंग वीडियो बनाकर।
4. डीएनए प्रोफाइल।
5. फेशियल रिकग्निशन आंख और कान के बीच दूरी का माप।
6. 12 अलग-अलग एंगल से फोटो।
7. मल्टी लेयर बायोमेट्रिक डेटा स्टोरेज।
पुलिस की बड़ी पहल
मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश में आंतरिक सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़, तकनीकी रूप से सक्षम तथा भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए नेशनल सिक्योरिटी गार्ड के सहयोग से आयोजित कॉम्प्रिहेन्सिव कैपेसिटी बिल्डिंग ट्रेनिंग प्रोग्राम का समापन हो चुका है। वर्तमान समय में ड्रोन हमलों सहित नई प्रकार की आतंरिक सुरक्षा चुनौतियां सामने आ रही हैं, जिनसे निपटने के लिए इस प्रकार का उच्च स्तरीय प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है।
पुलिस को होगा फायदा : एसपी
पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा ने बताया कि एक बार डेटा दर्ज होने के बाद आरोपी की पहचान तुरंत हो सकेगी। केंद्रीय एजेंसियों को रियल टाइम डेटा मिलने से जांच तेज होगी। फेशियल रिकॉग्निशन से ट्रैकिंग की जाएगी। भीड़ या सीसीटीवी फुटेज से भी संदिग्धों की पहचान हो सकेगी। राज्यों में जानकारी साझा करने में तेजी आएगी। विचाराधीन और सजायाफ्ता कैदियों का सटीक रेकॉर्ड रहेगा।







