तीन साल की दौड़भाग के बाद पूरी हुई युवक की गुहार, 6 घंटे में नेत्रहीन छात्रा को भी मिली राहत
भोपाल-दिल्ली तक भटकने के बाद जबलपुर में सुलझे आधार के तीन जटिल मामले, किसी की बोर्ड परीक्षा तो किसी की नौकरी पर मंडरा रहा था संकट

जबलपुर, यश भारत। साहब KTM ले लो, बस मेरा आधार सुधार दो यह गुहार जबलपुर के घाना निवासी संदीप सिंह की परेशानी की गंभीरता बयां करती है। आधार में जन्मतिथि सुधारवाने के लिए संदीप करीब तीन साल तक स्थानीय केंद्रों से लेकर भोपाल और दिल्ली तक भटकते रहे, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। आधार की गड़बड़ी के कारण सरकारी भर्ती के फॉर्म भरने और पीएफ खाते से पैसा निकालने में भी परेशानी आ रही थी। आखिरकार जबलपुर में जिला ई-गवर्नेंस कार्यालय के प्रयासों से उनका आधार सुधर गया। संदीप की तरह दो अन्य लोगों की जिंदगी में भी आधार बड़ी बाधा बना हुआ था। इनमें एक नेत्रहीन छात्रा की 12वीं की परीक्षा और एक बच्चे की पांचवीं बोर्ड की पढ़ाई दांव पर लगी थी।
छह घंटे में बना नेत्रहीन छात्रा का आधार
दमोह जिले की नेत्रहीन छात्रा महिमा आरेले पिछले दो साल से आधार अपडेट कराने के लिए परेशान थीं। आधार की समस्या के कारण उनकी छात्रवृत्ति और सामाजिक सुरक्षा पेंशन भी अटकी हुई थी। इस साल 12वीं की परीक्षा का फॉर्म भरने में परेशानी आने से उनका शैक्षणिक वर्ष खराब होने का डर था। पिता के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद उन्हें जिला ई-गवर्नेंस कार्यालय की जानकारी मिली। जिला ई-गवर्नेंस प्रबंधक चित्रांशु त्रिपाठी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक दस्तावेजों की जांच कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत काम शुरू कराया। करीब सुबह 11 बजे शुरू हुई प्रक्रिया छह घंटे में पूरी हो गई और महिमा का आधार जनरेट हो गया। अगले दिन उन्हें आधार उपलब्ध करा दिया गया। महिमा ने राहत जताते हुए मदद के लिए अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।
आधार निष्क्रिय होने से दो महीने से स्कूल नहीं जा रहा था साहिल
दूसरा मामला कुंडम क्षेत्र के बैकुंठपुर निवासी छात्र साहिल मरावी का है। बचपन में बना उसका आधार निष्क्रिय हो गया था। रिकॉर्ड में दूसरा आधार भी होने के कारण मामला जटिल हो गया। आधार के बिना समग्र आईडी बनाने और पांचवीं बोर्ड परीक्षा का फॉर्म भरने में परेशानी आ रही थी। स्थिति यह थी कि साहिल करीब दो महीने से स्कूल नहीं जा पा रहा था। साहिल की मां उसे लेकर ई-गवर्नेंस कार्यालय पहुंचीं। पुराने रिकॉर्ड की जांच के बाद भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) की टीम के सहयोग से निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसका आधार सक्रिय कराया गया। इससे बच्चे की पढ़ाई दोबारा शुरू होने और परीक्षा में शामिल होने की राह खुली।
भोपाल-दिल्ली तक भटका संदीप, तब जाकर सुधरी जन्मतिथि
घाना के पास खमरिया निवासी संदीप सिंह के आधार में जन्मतिथि सुधारने की निर्धारित सीमा समाप्त हो चुकी थी। उन्होंने स्थानीय आधार केंद्र के बाद भोपाल और दिल्ली तक प्रयास किए, लेकिन तकनीकी और प्रक्रियागत अड़चनों के कारण काम नहीं हो पाया। करीब तीन साल तक परेशान रहने के बाद उन्होंने जिला ई-गवर्नेंस कार्यालय में संपर्क किया। जिला ई-गवर्नेंस प्रबंधक चित्रांशु त्रिपाठी के अनुसार, जन्मतिथि सुधार की सीमा पार होने पर वैध दस्तावेजों और विशेष मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत कार्रवाई करनी पड़ती है। दस्तावेजों की जांच और प्रक्रिया पूरी होने के बाद संदीप की जन्मतिथि सुधारी गई और उन्हें आधार उपलब्ध कराया गया। अब वह सरकारी भर्ती के फॉर्म भरने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे। पीएफ खाते से जुड़ी परेशानी दूर होने की उम्मीद भी जगी है।
चित्रांशु त्रिपाठी बोले-लोगों का अटका काम पूरा होने पर मिलती है खुशी
जिला ई-गवर्नेंस प्रबंधक चित्रांशु त्रिपाठी ने बताया कि तीनों मामले जटिल थे। किसी की परीक्षा प्रभावित हो रही थी, किसी की पढ़ाई रुक गई थी, तो कोई युवक प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म नहीं भर पा रहा था। महिमा के मामले में परिवार पहले पांच से छह बार अलग-अलग जगह प्रयास कर चुका था। साहिल के आधार रिकॉर्ड की जांच कर यूआईडीएआई टीम की मदद ली गई, जबकि संदीप के मामले में जन्मतिथि सुधारने के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाई गई। त्रिपाठी ने कहा कि जब कोई व्यक्ति दो-तीन साल से परेशान हो और उसका काम पूरा हो जाए, तो खुशी मिलती है। खासकर बच्चों के भविष्य से जुड़े मामलों में उनकी परेशानी समझना जरूरी है। महिमा, साहिल और संदीप को मिली राहत इस बात का उदाहरण है कि सही दस्तावेजों, निर्धारित प्रक्रिया और संबंधित विभाग के सहयोग से आधार से जुड़ी जटिल समस्याओं का समाधान संभव है।







