कटनीभोपाल

1843 में बसी स्लीमनाबाद की पहचान बदलने की कवायद

रेलवे स्टेशन और डाकघर भी आएंगे दायरे में

1843 में बसी स्लीमनाबाद की पहचान बदलने की कवायद

ग्राम सभा के प्रस्ताव के बाद प्रशासन ने शासन को भेजी 14 बिंदुओं की रिपोर्ट

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कटनी, यशभारत। करीब 183 साल पहले अंग्रेज कर्नल स्लीमन के नाम से अस्तित्व में आए स्लीमनाबाद की पहचान बदलने की प्रशासनिक कवायद शुरू हो गई है। अब इस क्षेत्र को संत हरिदास महाराज की तपोभूमि के रूप में पहचान दिलाने के लिए हरिदासपुर नाम करने का प्रस्ताव शासन स्तर पर पहुंच गया है। जिला प्रशासन ने नाम परिवर्तन से जुड़े 14 बिंदुओं की जानकारी आयुक्त, भू-संसाधन प्रबंधन को भेज दी है। प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय शासन स्तर पर होना है।
नाम बदलने की पहल ग्राम पंचायत स्लीमनाबाद की ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव के बाद आगे बढ़ी। जिला प्रशासन ने इस संबंध में एसडीएम बहोरीबंद, तहसीलदार स्लीमनाबाद, जनपद पंचायत बहोरीबंद, रेलवे और डाक विभाग से जानकारी जुटाकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रतिवेदन तैयार किया। कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर यह जानकारी शासन को भेजी गई है।
हरिदासपुर नाम रखने के पीछे क्षेत्र की धार्मिक आस्था और संत परंपरा को प्रमुख आधार बताया गया है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, स्लीमनाबाद संत हरिदास महाराज की तपोभूमि है। यहां ‘मंदिर बंगला’ नामक पुराना स्थान भी संत की स्मृतियों से जुड़ा है। नाम परिवर्तन के समर्थकों का मानना है कि इससे क्षेत्र की पहचान संत हरिदास महाराज की परंपरा से जुड़ सकेगी।
ऐतिहासिक विवरण के मुताबिक, वर्ष 1843 में अंग्रेज कर्नल स्लीमन ने गोविन्द मालगुजार से 96 एकड़ भूमि लेकर यहां बस्ती बसाई थी। इसके बाद यह स्थान स्लीमनाबाद के नाम से प्रसिद्ध हुआ। राजस्व अभिलेखों में वर्ष 1909-10 में ‘कोहका उर्फ स्लीमनाबाद’ नाम दर्ज होने का उल्लेख मिलता है। वर्ष 1989-90 के बंदोबस्त के बाद स्लीमनाबाद नाम दर्ज होने की जानकारी भी प्रशासनिक विवरण में दी गई है।
प्रस्ताव लागू होने की स्थिति में बदलाव केवल ग्राम और तहसील के नाम तक सीमित नहीं रहेगा। स्लीमनाबाद से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित स्लीमनाबाद रोड रेलवे स्टेशन और यहां के डाकघर का नाम भी बदलने की प्रक्रिया में शामिल होगा। जिला प्रशासन के अनुसार, संबंधित रेलवे और डाक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की सहमति मिल चुकी है। फिलहाल प्रस्ताव शासन स्तर पर समीक्षा के लिए भेजा गया है और अंतिम फैसला निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

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