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यश भारत विशेष: देहार नदी के तट पर विराजीं माँ हरसिद्धि, एक दिन में देती हैं तीन स्वरूपों में दर्शन

सागर, यशभारत l सागर- रहली मार्ग पर रहली से करीब 20 किलोमीटर दूर देहार नदी के पावन तट और प्राकृतिक वादियों के बीच स्थित माँ हरसिद्धि का धाम इन दिनों आस्था और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। नवरात्र के पावन अवसर पर यहाँ दूर-दूर से पहुँच रहे श्रद्धालु माता के दरबार में मत् टेककर मन्नतें मांग रहे हैं। इतिहास के पन्नों में अपनी विशेष पहचान रखने वाले इस पावन स्थल पर हर वर्ष नवरात्र पर्व पर भव्य मेलों का आयोजन होता है, जिसमें हजारों की संख्या में भक्त शामिल होते हैं।

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52 शक्तिपीठों में है विशेष स्थान

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, रानगिर के हरसिद्धि माता मंदिर को 52 शक्तिपीठों में शुमार किया जाता है। जनश्रुति है कि इस पवित्र स्थान पर माता की ‘रान’ (जांघ) गिरी थी, जिसके चलते इस क्षेत्र का नाम ‘रानगिर’ पड़ा। वर्तमान में यहाँ एक नया भव्य मंदिर निर्मित किया गया है, जबकि इसके प्राचीन इतिहास में यह स्थान एक किले (गढ़) के रूप में विख्यात रहा है।

दिन में तीन रूपों में दर्शन देती हैं माँ हरसिद्धि

मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ माता हरसिद्धि एक ही दिन में तीन अलग-अलग रूपों में अपने भक्तों को दर्शन देती हैं। मान्यता है कि प्रात:काल में माता बालिका रूप में, दोपहर के समय युवती के रूप में और संध्या बेला में वृद्धा के रूप में भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती हैं। मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली देवी होने के कारण ही इन्हें ‘हरसिद्धि’ के रूप में पूजा जाता है।

महाराजा छत्रसाल के इतिहास से जुड़ा है ताल्लुक

यह तीर्थ स्थल केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यह स्थान महाराजा छत्रसाल और धामोनी के मुगल फौजदार खालिक के बीच हुए ऐतिहासिक युद्ध का साक्षी रहा है। इसके साथ ही, मराठा सूबेदार गोविंदराव पंडित ने भी रानगिर को अपना मुख्यालय बनाया था।

भक्तों के लिए विशेष प्रबंध और मेला

देहार नदी के तट पर बसे इस मंदिर के गर्भगृह में माँ हरसिद्धि की भव्य प्रतिमा विराजमान है, जिसके दरवाजों पर अत्यंत सुंदर और कलात्मक नक्काशी की गई है। मंदिर परिसर के चारों तरफ सुसज्जित गलियारा और समीप ही अन्य छोटे मंदिर इस परिसर की भव्यता को बढ़ाते हैं। नवरात्र के दिनों में मंदिर के बाहर सजी प्रसाद, नारियल और चुनरी की दुकानों पर खरीदारों की खासी भीड़ देखने को मिलती है। चैत्र और आश्विन दोनों ही नवरात्रों में यहाँ भक्तों का तांता लगा रहता है, और मान्यता है कि सच्चे मन से जो भी भक्त यहाँ आता है, माँ उसकी हर मनोकामना पूर्ण करती हैं।

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