*मासूम की सिसकियां सुन दौड़े ट्रेन मैनेजर, बचाई 4 माह की बच्ची की जिंदगी,नागदा-बीना एक्सप्रेस के जनरल कोच में लावारिस मिली मासूम*
*विष्णु अहिरवार की तत्परता से चाइल्ड केयर कटनी मुड़वारा पहुंचाई गई बच्ची*

जबलपुर यशभारत। रेलगाड़ी में सफर के दौरान जहां हर यात्री को अपनी मंजिल तक पहुंचने की जल्दी रहती है, वहीं नागदा-बीना एक्सप्रेस में एक ऐसा मार्मिक दृश्य सामने आया, जिसने मानवता और जिम्मेदारी की मिसाल पेश कर दी। ट्रेन के जनरल कोच में करीब चार से पांच माह की एक मासूम बच्ची अकेली रो रही थी। बच्ची के आसपास कोई परिजन नजर नहीं आ रहा था। जैसे ही इसकी सूचना ट्रेन मैनेजर विष्णु अहिरवार को मिली उन्होंने बिना देर किए मौके पर पहुंचकर बच्ची को सुरक्षित बाहर निकलवाया और उसे उचित संरक्षण दिलाने की पहल की। इस संबंध में रेलवे सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ट्रेन संख्या 19341 नागदा-बीना एक्सप्रेस में ट्रेन मैनेजर विष्णु अहिरवार सागर से कटनी मुड़वारा की ओर ड्यूटी पर जा रहे थे। इसी दौरान बखलेटा स्टेशन पर सूचना मिली कि ट्रेन के इंजन से लगे पहले जनरल कोच में लगभग चार से पांच माह की एक बच्ची अकेली रो रही है। इतनी छोटी बच्ची को इस हालत में देखकर उसकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई।
*सूचना मिलते ही दिखाई तत्परता*
विष्णु अहिरवार ने सूचना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मौके पर पहुंचने की पहल की। उन्होंने सहायक लोको पायलट (एएलपी) और अन्य रेलकर्मियों की मदद से बच्ची को सुरक्षित कोच से बाहर निकलवाया। इसके बाद संबंधित कंट्रोल और चाइल्ड केयर टीम को सूचना दी गई, ताकि बच्ची को सुरक्षित संरक्षण मिल सके। आवश्यक प्रारंभिक कार्रवाई के बाद बच्ची को जीआरपी और आरपीएफ के सुपुर्द किया गया।
*चाइल्ड केयर कटनी मुड़वारा पहुंचाई गई मासूम*
रेलवे सुरक्षा बल और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई के बाद मासूम बच्ची को चाइल्ड केयर कटनी मुड़वारा के सुपुर्द किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में ट्रेन मैनेजर की तत्परता महत्वपूर्ण रही। समय रहते सूचना पर कार्रवाई होने से बच्ची को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की व्यवस्था हो सकी।
*ड्यूटी से बढ़कर मानवता की जिम्मेदारी*
ट्रेन मैनेजर विष्णु अहिरवार की यह पहल बताती है कि रेलवे कर्मचारियों की जिम्मेदारी केवल ट्रेनों का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत के समय मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे आना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। एक ऐसी मासूम, जो अपनी परेशानी किसी को बता भी नहीं सकती थी, उसकी सुरक्षा के लिए समय पर उठाया गया कदम सराहनीय है।
रेलवे की व्यस्त दिनचर्या के बीच विष्णु अहिरवार ने यह साबित किया कि सतर्कता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का मेल किसी जरूरतमंद के लिए बड़ी मदद बन सकता है। यह घटना रेलकर्मियों के कर्तव्यबोध के साथ-साथ मानवता के उस पक्ष को भी सामने लाती है, जिसमें किसी अनजान की सुरक्षा भी अपनी जिम्मेदारी बन जाती है।







