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गर्मी को मात दे रहा है तबादलों का मौसम, क्या आला अफसर होंगे यहां से वहां

 (आशीष शुक्ला)

भीषण गर्मी में स्थानांतरण का मौसम अपने अलग ही मिजाज में चल रहा है। कई विभागों की सूचियां जारी होते ही प्रदेश के दूर दराज के कर्मचारी अधिकारीयों में सुख -दुख दोनों का माहौल देखा जा रहा है। जिनके मन की हो गई उनकी पौं-बारह, जिनके मन को दुख पहुंचा वे अपने तरह से गणित में लग कर भोपाल तक पहुंच रहे हैं। यह कोई नई तस्वीर नहीं है । यह तस्वीर हर तबदलों के मौसम में देखी जाती है। मंत्री अपने खास लोगों को खुश भी कर देते हैं और दुखित भी कर देते हैं। अधिकारी तो अपना पल्ला झाड़ लेते हैें, लेकिन जब राजनीतिक लोग अपनों का काम नहीं कर पाते हैं तो उनके चेहरे देखने लायक होते हैं। इन स्थितियों के चलते सरकारी अधिकारी प्रभावित हैं वे काफी पशोपेश में हैं कि किस रास्ते से उनके मन का तबादला हो जाएगा। मंगलवार को तबादले की अंतिम तारीख है अब देखना यह है कि कौन खुश होता है और कौन दुखित। इसी बीच आला अधिकारियों के तबदलों की चर्चा भी व्याप्त है। ऐसे में भोपाल में मंत्रियों और सत्ता में पूछपरख रखने वाले तबादलों से प्रभावित लोगों को आसानी से देखा सकता है। राजनीति में तबादला संस्कृति का सबसे ज्यादा बोलबाला रहता है। चुनावों में भी जब विधायक सांसदों के चुनाव होते हैं तब सरकारी अधिकारी कर्मचारी भी तरह तरह से अपने आकाओं से जीत हार में कुछ कर पाएं या नहीं दावें प्रतिदावे में व्यस्त रहते हैं। आला अफसर से लेकर नीचे तक के कर्मचारी की यह सक्रियता सिर्फ अपने तबादले को लेकर चलती है। यह लोकतंत्र का बहुत खूबसूरत पहलू है। किसी भी स्तरह के निर्वाचित जनप्रतिनिधि भी सत्ता में अपनी दखलांंदाजी तबादलों से ही अपने कद का पैमाना नापते रहते है। नेताजी की तबादलों में नहीं चल रही है तो उनकी राम जयराम में भी फर्क आ जाता है। बहरहाल बात अभी इस वक्त की हो रही है। लगातार सूची जारी होने के बाद भी जिनका हो जाता है और जिनका नहीं हो पाता है वे इस भौतिक दौर में मोबाइल की घंटियों के बीच अपने आकाओं को गुहार लगाने लगते हैं और जिनका हो जाता है वे प्रणाम करने लगते हैं। तीन दिन तक यह दौर हर पहल चलता रहेगा देखना यह है कि सत्ता में बैठे नेता अधिकारियों से तालमेल करके किस तरह से अपने समर्थित अधिकारियों को खुश कर पाएंगे। क्योंकि हर मंत्री के आसपास के आसपास उनके समर्थकों का जमावड़ा रहता है और वे चुनाव के वक्त किए गए कार्यों की दुहाई देते रहते हैं साष्थ ही स्थानांतरण के लिए दबाव भी बनाते रहते हैं। ऐसा नहीं है कि सिर्फ राजनेता परेशान होते हैं। वे भी इस तबादला मौसम में अपने दिमाग को ठंडा गर्म करते रहते हैं। संशोधनों के लिए जुगत, जाना था जापान पहुंच गए चीन जिन विभागों की सूची जारी हुई है इसके साथ ही संशोधन के लिए भी भोपाल में मंत्रियों के यहां और सत्ता में दखल रखने वालों के यहां काफी भीड़ देखी जा रही है। हर जिले के नेता अपने चहेतों के लिए स्थानंतरण में संशोधन कराने पहुंचने लगे हैं। भारी भरकम शिक्षा विभाग इसमें सबसे ज्यादा आगे हैं। शिक्षकों की तबादला सूची जारी होते ही संशोधन के लिए शिक्षक उन लोगों के यहां दस्तक दे रहे हैं जिनके उन्हें उम्मीद है कि उनका संशोधन हो जाएगा। बताया जाता है कि कई वरिष्ठ नेताओं की अनुशंसा के बाद भी स्थानांतरण यहां से वहां से हो गए हैं। जिसकों लेकर अब इन सब चीज से कैसे बाहर निकला जाए इसका रास्ता निकाला जा रहा है। हुआ यह है कि मनचाही जगह बताई ग, लेकिन पहुंच गए चौथी जगह।

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संशोधनों के लिए जुगत, शिक्षक काफी परेशान मांगी गई जगह की जगह पहुंच गए चौथी जगह

जाना था जापान पहुंच गए चीन

जिन विभागों की सूची जारी हुई है इसके साथ ही संशोधन के लिए भी भोपाल में मंत्रियों के यहां और सत्ता में दखल रखने वालों के यहां काफी भीड़ देखी जा रही है। हर जिले के नेता अपने चहेतों के लिए स्थानंतरण में संशोधन कराने पहुंचने लगे हैं। भारी भरकम शिक्षा विभाग इसमें सबसे ज्यादा आगे हैं। शिक्षकों की तबादला सूची जारी होते ही संशोधन के लिए शिक्षक उन लोगों के यहां दस्तक दे रहे हैं जिनके उन्हें उम्मीद है कि उनका संशोधन हो जाएगा। बताया जाता है कि कई वरिष्ठ नेताओं की अनुशंसा के बाद भी स्थानांतरण यहां से वहां से हो गए हैं। जिसकों लेकर अब इन सब चीज से कैसे बाहर निकला जाए इसका रास्ता निकाला जा रहा है। हुआ यह है कि मनचाही जगह बताई ग, लेकिन पहुंच गए चौथी जगह।

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मंत्री की वजह से लटकी जनजातीय विभाग की सूची उहाफोह में अधिकारी व कर्मचारी

भोपाल । मध्यप्रदेश के जनजातीय विभाग में अभी तक स्थानांतरण को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जहां प्रदेश के सभी विभागों में स्थानांतरण को लेकर अधिकारियों और मंत्रियों की बैठक जारी है वहीं जनजातीय विभाग में अभी तक इस तरह की गतिविधियां दिखाई नहीं दे रही हैं। जनजातीय विभाग के मंत्री विजय शाह विगत एक माह से गायब है। वह पिछली तीन कैबिनेट की बैठक से भी नदारद रहे। उनके नदारद रहने से कर्मचारी अपनी स्थानांतरण को मनचाहे स्थान पर कराने में असमर्थ दिखाई दे रहे हैं। प्रदेश के अन्य जिलों से कर्मचारी मंत्री जी के बंगले पर चक्कर इस उम्मीद से लगा रहे हैं कि मुलाकात हो जाए जो असंभव दिखाई दे रहा है। आज से पचमढ़ी में प्रशिक्षण शिविर शुरू हो गया है जिसमें प्रदेश के सभी विधायक और सांसद शामिल हुए हैं। इस प्रशिक्षण शिविर में मंत्री विजय शाह अपनी उपस्थिति दज कराते हैं या फिर नदारद रहेंगे। कर्नल सोफिया पर विवादित बयान से गायब मोहन यादव के काबिना मंत्री विजय शाह विगत एक माह से गायब हैे। उन्होंने पाकिस्तान पर सर्जिकल स्टयक के बाद कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान दिया था जिसको लेकर पूरे देश में मंत्री के खिलाफ नाराजगी की स्थिति बन गई थी ।उसके बाद से मंत्री जी गायब हुए हैं तो अभी तक वह सामने नहीं आए हैं। स्थानांतरण को लेकर कर्मचारी चिंतित जहां अन्य विभागों के कर्मचारी स्थानांतरण को लेकर आश्वस्त हैं वहीं जनजातीय विभाग के कर्मचारी चिंतित हैं। उनकी चिंता का कारण मंत्री विजय शाह का गायब रहना है। कर्मचारी मंत्री से मिल नहीं पा रहे हैं । अगर वह मिलना चाहें तो वह कहां मिले। जिससे कर्मचारी के द्वारा चाहे गए स्थान पर स्थानांतरण हो सके। फाइलों पर कार्य कर रहे हैं मंत्री- प्रमुख सचिव जनजातीय विभाग में स्थानांतरण में मंत्री के साथ ही प्रमुख सचिव की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। जनजातीय विभाग के प्रमुख सचिव से मंत्रीजी को लेकर बात की गई तो उन्होंने बताया कि मंत्री जी बराबर स्थानांतरण की फाइलों को देख रहे हैं । उनके निर्देशन में ही स्थानांतरण का कार्य किया जा रहा है। समय आने पर सूची जारी की जाएगी।

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