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शहरवासियों के ग्रीन एनर्जी के सपने में बाधा बन रही चार्जिंग प्वाइंट की कमी,लाखों की संख्या मे इलेक्ट्रिक वीकल और ई-रिक्शा , वहीं पेट्रोल पंपों की संख्या भी बढ़ी

जबलपुर. इलेक्ट्रिक वीकल और ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या के बीच चार्जिंग प्वाइंट की कमी शहरवासियों के ग्रीन एनर्जी के सपने में बाधा बन रही है। जो गिन-चुने चार्जिंग प्वॉइंट है, वे भी वाहनों को चार्ज करने में हांफ रहे हैं। फास्ट चार्जिंग के अभाव में चार्जिंग में लंबा समय लग रहा है। ऐसे में स्कूटर और ई-रिक्शा की संख्या लाखों में पहुंच रही है पर अब भी लंबी यात्रा के लिए लोग ईंधन के परंपरागत साधन पर ही भरोसा करने को विवश हैं। प्वॉइंट की कमी से लोग चाहकर भी इबाइक नहीं खरीद रहे हैं। इससे ग्रीन एनर्जी अभियान को धक्का लगा है।

15 पेट्रोल पंप खुले, चार्जिंग स्टेशन कम
पेट्रोल कंपनियों ने बीते एक साल में जिले में 15 नए पेट्रोल पंप खोले हैं। इनमें शहरी क्षेत्र में 6 तो ग्रामीण क्षेत्र में हाइवे के किनारे करीब 9 पंप हैं। इनसे निवेश और क्षेत्रीय युवाओं को रोजगार बढ़ा हैै, लेकिन वैकल्पिक ऊर्जा पर फोकस पिछड़ गया है। ईवी के चार्जिंग स्टेशन की संख्या सीमित है

यह है स्थिति

● 15 नए पंपों की हो रही है स्थापना।

● रोजाना 7 लाख लीटर ईंधन की खपत।

● निगम के सात जगहों पर हैं चार्जिंग प्वाइंट।

● आधा दर्जन पंपों पर चार्जिंग सुविधा।

बढ़ रही ईंधन की खपत
भले ही एलपीजी और बैटरी से चलने वाले वाहनों की संख्या में बढ़ रही है लेकिन पेट्रोल और डीजल की खपत भी कम नहीं हुई हैं। जिले में प्रति दिन ढाई से तीन लाख लीटर पेट्रोल की खपत होती है। वहीं डीजल की खपत चार से साढ़े चार लाख लीटर की है। जबलपुर से गुजरने वाले हाइवे की हालत सुधरने के कारण मालवाहनों की आवाजाही बढऩे से खपत बढऩे का अनुमान है।

छह माह में लग जाएंगे फास्ट चार्जर
पेट्रोल पंपों पर चार्जिंग प्वाइंट बने हैं। इनकी चार्जिंग की गति धीमी है। अब इन्हें बदलकर फास्ट चार्जर लगाए जा रहे हैं, ताकि ग्राहकों को सुविधा मिल सके। अगले छह माह के भीतर यह स्थापित हो जाएंगे

लग रही लम्बी कतार
पुराने और नए मिलाकर शहर में पांच से छह पंप ही हैं जहां इलेक्ट्रिक वाहन को चार्ज किया जा सकता है। इनमें जो चार्जर लगे हैं, वे पूरी बैटरी को चार्ज करने में चार से पांच घंटे का समय लेते हैं। अब फास्ट चार्जिंग की जरुरत है। इसमें आधे घंटे में काफी चार्जिंग हो जाती है। देर सवेर इनको लगाने की योजना बनाई जा रही है लेकिन प्रगति धीमी है। जानकारों के अनुसार इसमें बिजली का लोड सबसे बड़ी समस्या है।

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