स्कूलों में फिर शुरू हुआ मोनोपोली का खेल,कलेक्टर सख्ती के मूड में, दर्ज होगी FIR
चुनिंदा प्रकाशकों की किताबों को प्राथमिकता

जबलपुर, यश भारत। शहर के स्कूलों में पुस्तक चयन और वितरण व्यवस्था में लापरवाही और संभावित गोलमाल का मामला अब गंभीर होता जा रहा है। जानकारी के अनुसार कई स्कूलों में निर्धारित गाइडलाइन की अनदेखी कर चुनिंदा प्रकाशकों-रत्ना सागर प्राइवेट लिमिटेड, स्काई पब्लिकेशन, आवर्तन पब्लिकेशन और जूम पब्लिकेशन-की किताबें अनिवार्य रूप से लागू की जा रही हैं, जबकि अन्य विकल्पों को नजरअंदाज किया जा रहा है। तकनीकी रूप से यह व्यवस्था पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत मानी जा रही है। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि पुस्तक सूची समय पूर्व सार्वजनिक की जाए और किसी एक प्रकाशक या विक्रेता को बढ़ावा न दिया जाए। इसके बावजूद सीमित विक्रेताओं के माध्यम से ही किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो रही है और अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है।
पब्लिशर्स कर रहे मनमानी, विशेष दुकानों में ही दे रहे सप्लाई
सूत्रों के मुताबिक कुछ मामलों में एक ही विषय की अलग-अलग संस्करणों की किताबें अनिवार्य कर दी गई हैं, जिससे लागत बढ़ने और भ्रम की स्थिति बनने की शिकायतें भी सामने आई हैं। यह भी आरोप हैं कि सभी पुस्तक विक्रेताओं को सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जा रही, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी जैसी स्थिति बन रही है। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन सख्त कार्रवाई के मूड में है।
दर्ज होगी FIR
कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कहा है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई जा रही है और यदि आगे भी शिकायतें मिलती हैं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि समझाइश के बाद भी यदि लापरवाही या गड़बड़ी जारी रहती है तो संबंधित प्रकाशकों के साथ-साथ अन्य जिम्मेदार पक्षों पर भी प्रकरण दर्ज होंगे। प्रशासन ने यह भी संकेत दिए हैं कि जांच में यदि स्कूलों की मिलीभगत सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।






