भोपाल

महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी के भाषण का मूल पाठ …

महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी के भाषण का मूल पाठ …
भापाल यशभारत। सबसे पहले मैं मां भारती को भारत की मातृशक्ति को प्रणाम करता हूं। आज यहां इतनी बड़ी संख्या में माताएं, बहने, बेटियां आशीर्वाद देने आईं हैं। मैं आप सभी का दर्शन पाकर धन्य हो गया हूं। आज लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर देवी की तीन सौ जन्म जयंती हैं। 140 करोड़ भारतीयों के लिए यह अवसर प्रेरणा का है राष्ट्र निर्माण के लिए हो रहे भगीरथ प्रयासों में अपना योग्यदान देने का है। देवी अहिल्याबाई कहती थी कि शासन का सही अर्थ जनता की सेवा करना और उनके जीवने में सुधार लाना होता है। आज का कार्यक्रम उनकी सोच को आगे बढ़ाता है। आज इंदौर मेट्रो की शुरुआत हुई है। सतना और दतिया भी हवाई सेवा से जुड़ गए हैं ये सभी प्रोजेक्टर मप्र में सविधा को बढाएंगे और विकास को गति देंगे रोजगार के अवसर बनाएंगे। मैं आज इस पवित्र दिवस पर विकास के इन सारे कामों के लिए आप सभी को पूरे मप्रदेश को बधाई देता हूं।
लोकमाता देवी बाई अहिल्या का नाम सुनते ही मन में श्रद्धा का भाव उमड पड़ता है। उनके बारे में बोलने के लिए शब्द कम पड़ते हैं। देवी अहिल्याबाई इस बात का प्रतीक हंै कि जब इच्छा शक्ति होती हैं तो परिस्थितयां कितनी भी विपरीत हों परिणाम लाकर दिखाया जा सकता है।
ढाई तीन सौ साल पहले जब देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा था उस समय ऐसे महान कार्य कर जाना की आने वाली अनेक पीढिय़ां भी उसकी चर्चा करें। कहना तो आसान है लेकिन करना आसान नही था। अहिल्या बाई ने प्रभु सेवा और जन सेवा इसे कभी अलग नहीं माना। कहते हैं कि वे हमेशा शिवलिंग साथ लेकर चलती थीं। उस चुनौती पूर्ण कालखंड में राज्य का नेतृत्व कांटों से भरा ताज था। कोई कल्पना कर सकता है कि कांटों से भराताज ताज पहनकर अहिल्याबाई ने अपने राज्य की समृदिध को नई दिशा दी। उन्होंने गरीब से गरीब को समर्थ बनाने के लिए काम किया। अल्यिाबाई भारत की विरासत की संरक्षक थी। जब देश की संस्कृति पर हमारे मंदिरों तीर्थ स्थलों पर हमले हो रहे थे तब लोक माता ने संरिक्षत करने का बीड़ा उठाया। काशी विश्वनाथ सहित देश में अनेक मंदिरों तीर्थों का पुननिर्माण किया। यह मेरा सौभाग्य है कि जिस काशी में लोकमाता अहिल्याबाई ने विकास के इतने काम किए उस काशी ने मुझे भी सेवा का अवसर का मौका दिया। आज अगर आप काशी विश्वनाथ महादेव के दर्शन करने जाएंगे तो वहां आपको अहिल्याबाई की मूर्ति मिलेगी। माता अहिल्याइबाई ने सुशासन का ऐसा उत्तम माडल बनाया जिसमें गरीबों और वंचितों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता। रोजगार के लिए उद्यम बढ़ाने के लिए योजनाओं को शुरू किया। कृषि और वन पर आधारित खेती को बढ़ावा देने के लिए नहरों का जाल बिछाया। तीन सौ साल पहले जल संरक्षण के लिए कितने ही तालाब बनवाए। आज हम लोग भी कह रहें कि बारिश के एक एक बूंद को बचाओ। देवी अहिल्या बाई ने तीन सौ साल पहले काम बताया था। किसनों की आय बढ़ाने के लिए कपास और मसालों की खेती को बढ़ाने का प्रयास किया। किसनों को कहना है कि धान और गन्ने की खेती में अटक नहीं सकते। कई चीजों को उत्पाद करना चाहिए। यह मेरा सौभाग्य है कि एक आदिवासी बेटी भारत के उच्च पद पर हैं भारत के आदिवासियों की सेवा करने का मौका करने अवसर मिला ।
महेश्वरी साड़ी के लिए नए उद्योग लगाए। लोगों को कम पता होगा कि देवी अहिल्या माता हुनर की पारखी थी। वो जूनागढ़ गुजरात से कुछ परिवारों को महेश्वर लाईं और उनको साथ जोडक़र महेश्वरी साड़ी का काम आगे बढ़ाया। जो अनेक परिवारों का गहना बन गया। बुनकरों को फायदा हुआ। देवी अहिलयाबाई को कई सामाजिक सुधारों के लिए याद रखा जाएगा। आज बेटियों के शादी के लिए चर्चा करें तो देश के लिए कुछ लोगों को यह धर्म के खिलाफ लगता है। देवी अहिलयाबाई उस जमाने में बेटियों के लिए शादी के उम्र के बार में सोचती थीं। देवी अहिल्या बाई ने महिलाओं के लिए संपत्ति के बारे में सोचा। पति की मृत्यु के बाद पुर्नविवाह के लिए विचार किया । उस कालखंड में यह सब सोचना मुश्किल होता था, लेकिन अहिल्याबाई ने इन समाज सुधारों के प्रति काम किया। मालवा की सेना में महिलाओं की टुकड़ी बनाई। पश्चिम के देश हमेश कोसते रहते हैं माता बहनों के अधिकार के नाम पर नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं। सेना में महिलाओं का होना गांवों में नारी सुरक्षा टोलियां बनाने का काम किया गया। माता अहिल्याबाई राष्ट्र निर्माण में नारी शकित का प्रतीक हैं।
समाज में इतने बड़ा परिर्वतन करने वाली देवी को प्रणाम करता हूं। मैं उनसे प्रार्थना करता हूं कि देवी अहिल्या का प्रेरक कथन को भूल नहीं सकता। जो कुछ भी हमें मिला है वो जनता द्वारा दिया ऋण है उसे चुकाना है।
सरकार इन्हीं मल्ूयों पर काम कर रही है। नागरिक देवो भव सरकार का मंत्र हैँ। सरकार की हर बड़ी योजना के केंद्र में माता बहने और बेटियां हैं।
चार करोड घर बनाए गए। ये घर माता बहनों के नाम पर है। इनमें से ज्यादातर महिलाएं ऐसी हैं जिनके नाम पहली बार संपत्ति दर्ज हैं पहली बार मालकिन बनीं। आज सरकार नल से जल पहुंचा रही है ताकि माता बहनों को असुविधा न हो। बेटियां पढ़ाई पर ध्यान दे सकें। बिजली, एलपीजी गैस की सुविधा नहीं थी। ये सुविधाएं भी सरकार ने पहुंचाई। यह सिर्फ सुविधाएं नहीं है माता बहनों के लिए प्रयास है। इसके लिए माता बहनों की मुश्किल कम हुई है। माता बहनें अपनी बीमारियां छुपाने के लिए मजबूरी थीं, अस्पताल जाने से बचती थीं। उन्हें लगता था कि परिवार पर बोझ ना पड़े। सरकार ने आयुष्मान भारत योजना लागू कर इस समस्या को दूर किया।
महिलाओं के लिए पढ़ाई और दवा के साथ कमाई भी जरूरी है। महिलाओं की आय होती तो उनका घर में महत्व बढ़ जाता है। बीते 11 वर्ष में सरकार ने लगातार प्रयास किया है।
2014 से पहले अपने मुझे सेवा करने का मौका दिया उसके पहले तीस करोड महिलाओं का बैंक खाता नहीं था। सरकार ने जन धन खाते खुलवाए। सरकार खाते में पैसे भेज रही है। गांव या शहर में काम कर रही है। स्वरोजगार कर रही है। मुद्रा योजना से बिना गांरटी का लोन मिल रहा है लभार्थी माता बहने हैं।
देश में दस करोड़ बहने सेल्फ हेल्थ से जुड़ी हैं ंये बहने अपनी कमाई के नए साधन बना रही हैं। इसके लिए सरकार मदद कर रही है। ऐसी महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का संकल्प लिया। डेढ़ करोड़ बहने लखपति दीदी बन चुकी हैं। बैंकिंग से जुड़ रही है। बीमा सखियां बनाने का अभियान शुरू किया है। देश को बीमा सुरक्षा देने में सरकार भूमिका निभा रही है। एक समय था जब तकनीक से महिलाओं को दूर रखा जाता था। आधुनिक तकनीक में भी बहने बेटियां आगे बढक़र नेतृत्व दें। खेती में ड्रोन क्रांति आ रही है इसे नमो ड्रोन दीदी अभियान से गांव की महिलाओं का हैसला बढ रह है पहचान बन रही है।
बेटियां वैज्ञानिक बन रही है, डाक्टर, इंजीनियर पायलेट बन रही हँ। साइंस और मैथथ्य पढृने वाली बेटियों की ंसंख्या बढ रही है।
उनमें वैज्ञानिक के नाते बेटियां काम कर रही हैं। चंद्रयान थ्री मिशन में सौ से अधिक महिलाएं वैज्ञानिक और इंजीनियर शामिल थीं। ऐसे ही जमाना स्र्टाटअप का है उसमें भी बेटियां काम कर रही हैं। देश में 45 प्रतिशत स्टार्टअप में महिलाएं हैं। यह संख्या बढ़ रही है। हमारा प्रयास है कि नीति निर्माण में बेटियों की भगीदारी बढ़े। बीते एक दशक में कदम उठाए गए हैं। सरकार में पहली बार पूर्ण कालिक महिला रक्षा मंत्री बनी। पंचायत से लेकर पार्लिीमेंट तक महिलाओं की ंसख्या बढ़ी। महिला सांसद की संख्या बढ़ी। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पीछे भी यही भावना है। इसे रोका गया लेकिन सरकार ने पारित किया। महिला आरक्षण पक्का हो गया है। भाजपा सरकार बहनों और बेटियों को हर क्षेत्र में सशक्त कर रही है। भारत संस्कृति और संज्ञकरों का देश है।
सिंदूर पंरपरा में देशभक्ति का प्रतीक है। हनुमान भी सिंदूर धारण किए। श्क्ति पूजन में भी सिंदूर का पूजन करते हैं। सिंदूर भारत में शौर्य का प्रतीक बना है। पहलगाम में आतंकियों ने सिर्फ भारतियों का खून नहीं बहाया हमारी संस्कृति पर प्रहार किया। समाज को बांटने की कोशिश की। आतंकवादियों ने भारत की नारी शक्ति को चुनौती दी। यह चुनौती आतंकवादियों और उनके आकाओं के लिए काल बन गई है। ऑपरेशन सिंदूर आतंकवादियों के खिलाफ भारत के इतिहास का सबसे बड़ा और सफल आपरेशन है। पाकिस्तान की सेना ने सोचा नहीं था कि आतंकी ठिकानों को सेना ने मिटटी में मिला दिया। आपरेशन सिंदूर से हमने डंके की चोट पर कह दिया है कि आतंकियों को घर में घुसकर मारेंगे। जो उनकी मदद करेंगे उनन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। भारत का एक एक नागरिक कह रहा है अगर तुम गोली चलाओगे तो गोली का जवाब गोले से दिया जाएगा।
हम सभी जानते हैं बीएसएफ का इस आपरेशन में बडा रोल रहा है। जम्मू से लेकर राजस्थान की सीमा तक बीएसएफ की बेटियों ने मोर्चा संभाला। उन्होंने सीमा पार से होने वाली फायरिंग का जवाब दिया।
दुश्मन की पोस्ट को बेटियों ने पराक्रम दिखाया। इसके लिए भी बीते दशक में सरकार ने कदम उठाए हैं।
स्कूल से लेकर युद्ध के मैदान तक आज देश अपनी बेटियों के शौर्य पर भरोसा कर रहा है। सेना ने पहली बार सैनिक स्कूल के दरवाजे बेटियों के लिए खोले हैं। पहले एनसीसी में 25 प्रतिशत बेटियां होती थी आज उनकी संख्या 50 प्रतिशत की तरफ बढ़ रही है।
आज अखबार में देखा होगा कि एनडीए महिला कैड्ेटस का पहला बैच पासआउट हुआ है। सेना नौ सेना और वायुसेना में बेटियां अग्रिम मोर्चा में तैनात हो रही हैं। फाइटर प्लने से लेकर आईएनएस युद्ध पोत तक बेटियां शौर्य दिखा रही हैं। आपको मैं नाविका सागर परिक्रमा के बारे में बातना चाहता हूं। नेवी की बेटियों न ढाई सौ मील की समुद्री यात्रा पूरी की है। धरती का चक्कर लगाया है। ऐसी नाव से यात्रा की जो मोटर से नहीं बल्कि हवा से चलती है। सोचिए ढाई सौ दिन समुंदर में रहना। कई कई हफ्ते तक जमीन के दर्शन तक ना हों। समंदर का तूफान खराब मौसम दो बेटियों ने हर मुसीबत को हराया है। यह दिखाता है कि चुनौती कितनी बड़ी है भारत की बेटियां उस पर विजय पा सकती हैं।
नक्सलियों के खिलाफ अपरेशन हो या सीमा पर आपरेशन है हमारी बेटियां भीारत की सुरक्षा की ढाल बन गई हैं। देश की नारी शक्ति को सेल्यूट करता हूं। देवी अहिल्या ने अपने शासन काल में विकास के कार्यों के साथ विरासत को भी सहेजा। आज का भारत भी विकास और विरासत साथ लेकर चल रहा है। देश में विकास गति दे रहा है यह कार्यक्रम इसका उदाहरण है। देश को पहली मेट्रो मिली है। इंदौर देश में पहचान बना चुका है। इंदौर की पहचान मेट्रो से होगी। मप्र में रेलवे के क्षेत्र में व्यापक काम हो रहा है। कुछ दिन पहेले ही सरकार ने चार रेल लाइनों में बदलने में स्वीकृति दे दी है। भीड़ कम होगी, ज्यादा ट्रेन चलेगी। रेलवे ने परियोजना को मंजूरी दे दी है। सरकार ने दतिया और सतना भी हवाई नेटवर्क से जुड़ गए हैं। बुंदेलखंड अैर विंध्य क्षेत्र में एयर कनेक्टिविटी मजबूत होग। धाम के दर्शन करना और सुलभ होगा। भारत इतिहास के उस मोड पर है जहां भारत की सुरक्षा समर्थन और संस्कृति हर स्तर पर प्रयास करना है। इसमें हमारी मातृ शक्तियों की भूमिका बड़ी है। लोक माता देवी अहिल्याबाई की प्रेरण है। रानी लक्ष्मी बाई, रानी दुर्गावति, रानी कमला पति, अवंतिबाई लोधी, सावित्री बई फूले के नाम गौरव से भर देते हैं। तीन सौवीं जयंती निरंतर प्रेरित करती रही।

 

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