सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद HC के फैसले को रोका
कहा - नाबालिग का ब्रेस्ट पकड़ना, नाड़ा तोड़ना असंवेदनशील दृष्टिकोण

नई दिल्ली, 27 मार्च 2024 सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस विवादास्पद फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें कहा गया था कि नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना और पायजामे का नाड़ा तोड़ना रेप या अटेम्प्ट टु रेप नहीं है। जस्टिस बीआर गवई और एजी मसीह की पीठ ने इस फैसले को असंवेदनशील और अमानवीय बताया और केंद्र व यूपी सरकार से जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट का दृष्टिकोण पूरी तरह असंवेदनशील है। यह बहुत गंभीर मामला है और फैसला लिखने वाले जज में संवेदनशीलता की कमी थी।
ऐसी टिप्पणियां महिलाओं के खिलाफ हिंसा को सामान्य बनाती हैं, जो अस्वीकार्य है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन किया।
इलाहाबाद HC ने क्या कहा था
17 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने फैसला सुनाया था कि:
किसी लड़की के निजी अंग पकड़ना, पायजामे का नाड़ा तोड़ना और जबरन पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश रेप या अटेम्प्ट टु रेप नहीं है।
हाईकोर्ट ने आरोपियों पर अटेम्प्ट टु रेप का चार्ज हटाकर केवल यौन उत्पीड़न की धाराएं लगाई थीं।
3 साल पुराना मामला
10 नवंबर 2021: यूपी के कासगंज में एक 14 साल की लड़की को पवन और आकाश ने बाइक पर बैठाकर उसके प्राइवेट पार्ट छुए, पायजामे की डोरी तोड़ी और पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश की।
मां ने FIR दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। बाद में कोर्ट ने POCSO एक्ट और IPC की धाराओं (376, 354, 354B) के तहत केस दर्ज किया।
हाईकोर्ट ने आरोप कम कर दिए, जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया।
SC का पिछला रुख
2021 में सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे HC के उस फैसले को पलट दिया था, जिसमें “स्किन-टु-स्किन संपर्क न होने को यौन हमला न मानने की बात कही गई थी। SC ने स्पष्ट किया था कि किसी भी प्रकार का यौन उत्पीड़न POCSO एक्ट के तहत अपराध है।
अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और यूपी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई जल्द होगी।







