प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत मिशन को मजबूत करेगा भोपाल में हुआ शोध – भोपाल के वैज्ञानिक ने उपयोग हीन प्लास्टिक से बनाया बायो डीजल

प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत मिशन को मजबूत करेगा भोपाल में हुआ शोध
– भोपाल के वैज्ञानिक ने उपयोग हीन प्लास्टिक से बनाया बायो डीजल
– अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स ‘जनरल ऑफ द एनर्जी इंस्ट्टीयूट’ और ‘एनर्जी नेक्सेस’ में प्रकाशित हुआ शोध
आशीष दीक्षित, भोपाल। देश भर में चलाए जा रहे प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत मिशन को अब भोपाल में किया गया शोध मजबूत करेगा। यह प्रयोग राजधानी भोपाल के वैज्ञानिकों ने किया है। प्रयोग इतना सफल हुआ है कि दो प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स ‘जनरल ऑफ द एनर्जी इंस्ट्टीयूट’ और ‘एनर्जी नेक्सेस’ में शोध पत्र प्रकाशित हुआ है। अब प्रयोग प्लास्टिक और जैविक कचरे के प्रबंधन में प्रयोग मील का पत्थर साबित होने की दिशा में बढ़ चुका है।
आईआईएसईआर यानि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों न वेस्ट ऑफ मटेरियल यानी उपयोग हीन माने जाने वाले प्लास्टिक और फल के कचरे से बायो डीजल बनने का तरीका ढूंढा है। खास बात तो यह है कि केले के छिलके को भी इस प्रयोग में लिया जा रहा है। आईआईएसईआर के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ शंकर चाकमा ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर यह शोध किया है और उसमें सफल हुए हैं।
पर्यावरण अनुकूल किए गए खोज की चर्चा अब देश भर में हो रही है। डॉ चाकमा के मुताबिक इस तकनीक को को-पैरोलीसिस कहा जाता है। 75प्रतिशत प्लास्टिक कचरे को एक खास तापमान पर गर्म किया जाता है।
प्लास्टिक और केले के छिलके को जब गर्म किया गया तो इसमें पायरो ऑयल मिला। यह तेल पारंपरिक डीजल का एक अच्छा विकल्प है। शोध में पाया गया कि इस नए ईंधन को सामान्य डीजल में 20प्रतिशत तक मिलाया जा सकता है. इसका इस्तेमाल वाहनों में आसानी से हो सकता है। इस मिश्रण का इस्तेमाल करने से ईंधन की खपत कम हो जाती है और ब्रेक थर्मल एफिशिएंसी में भी सुधार होता है।
गैस और चारकोल से भी मिलेगा फायदा
– एक किलोग्राम मिश्रण से करीब 850 ग्राम तरल ईंधन मिलता है।
– 140 ग्राम गैस और 10 ग्राम चारकोल भी प्राप्त होता है।
– गैस खाना पकाने के काम आ सकती है, जबकि चारकोल का उपयोग पानी साफ करने में।
– कचरे का लगभग पूरा हिस्सा इस्तेमाल हो जाता है।
पायरो ऑयल की ऊष्मा क्षमता अच्छी
पायरो-ऑयल की ऊष्मा क्षमता बहुत अच्छी मानी जाती है। करीब करीब 55 मेगाजूल प्रति किलोग्राम तक पहुंचती है। इसका पोर पॉइंट -25प्रतिशत है, जो इसे ठंडे मौसम के लिए भी उपयुक्त बनाता है। इसका फ्लैश पॉइंट सामान्य डीजल से ज्यादा है, जो इसे सुरक्षित बनाता है।







