भोपाल की शाहपुरा झील और छोटे तालाब खटलापुरा में गंदगी का अंबार

भोपाल की शाहपुरा झील और छोटे तालाब खटलापुरा में गंदगी का अंबार
यशभारत भोपाल। राजधानी भोपाल को स्वच्छता सर्वेक्षण में देश का नंबर वन शहर बनाने का सपना हर नागरिक और प्रशासन देखता है, लेकिन शहर की झीलों की स्थिति इस सपने को खोखला करती दिख रही है। शाहपुरा झील और खटलापुरा स्थित छोटे तालाब के किनारों पर फैली गंदगी और बदइंतजामी इस बात की गवाही देती है कि स्वच्छता केवल कागजों और पोस्टरों तक सीमित रह गई है।
कहां क्या है हालात
शाहपुरा झील:
कचरे और सीवेज की मार
राजधानी की खूबसूरत झीलों में शामिल शाहपुरा झील अब गंदगी और प्रदूषण की मार झेल रही है। झील के किनारे प्लास्टिक, पॉलिथीन, पूजा सामग्री और गंदा पानी बहता दिखाई देता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इसी झील से पाइपलाइन के माध्यम से पेयजल की सप्लाई का स्रोत जुड़ा हुआ है। जब झील में सीवेज का पानी और कचरा बहकर पहुंच रहा है, तो यह पानी की गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। आसपास के रहवासी और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि नगर निगम की सफाई टीमें केवल दिखावे के लिए आती हैं। कुछ जगह सफाई होती है, लेकिन झील के अंदर जमा गाद, काई और प्लास्टिक का ढेर जस का तस बना रहता है।
खटलापुरा तालाब:
धार्मिक स्थल भी उपेक्षा का शिकार
पुरानी भोपाल स्थित खटलापुरा का छोटा तालाब, जहां धार्मिक आयोजन और विसर्जन कार्यक्रम होते हैं, वहां की स्थिति भी चिंताजनक है। तालाब के आसपास बने घाटों पर गंदगी और दुर्गंध फैली हुई है। नालों का पानी सीधे तालाब में गिरता है, जिससे जल गुणवत्ता और अधिक खराब हो रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन केवल त्योहारों के वक्त थोड़ी सफाई करवाता है, लेकिन नियमित रखरखाव का कोई ठोस प्रबंध नहीं है।
पहचान खोती जा रही ऐतिहासिक विरासत
शहर की झीलें भोपाल की पहचान रही हैं, लेकिन इनका संरक्षण अब गंभीर सवाल बन गया है। नगर निगम, पर्यावरण विभाग और स्थानीय पार्षदों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। शाहपुरा और खटलापुरा दोनों ही स्थानों पर साफ-सफाई की कमी, कचरे का अंबार और सीवेज के खुले स्रोत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि जिम्मेदार विभागों के बीच समन्वय की भारी कमी है।
सफाई कराई जाएगी
तालाब की सफाई के लिए अभियान चलाया जायेगा। इसके लिए अमले को निर्देशित किया जा रहा है।
.. मालती राय, महापौर, भोपाल







