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महिला अधिवक्ता की मौत से वकीलों में आक्रोश : डॉक्टरों संग टकराव बढने की आशंका, विरोध प्रदर्शन 

विवाद के बाद निजी अस्पताल में ले गए 

महिला अधिवक्ता की मौत से वकीलों में आक्रोश : डॉक्टरों संग टकराव बढने की आशंका, विरोध प्रदर्शन 
राजेश सरकार
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट की अधिवक्ता जागृति शुक्ला का सोमवार सुबह लखनऊ स्थित पीजीआई में उपचार के दौरान निधन हो गया। वह 20 मई को हुए एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। उनके निधन के बाद अधिवक्ताओं में शोक और आक्रोश का माहौल है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने लंच के बाद न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया। जबकि विभिन्न स्थानों पर अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन और विरोध जताया। जानकारी के अनुसार, झूंसी निवासी अधिवक्ता जागृति शुक्ला 20 मई की सुबह महिला अधिवक्ताओं के क्रिकेट टूर्नामेंट की तैयारी के लिए स्कूटी से प्रैक्टिस करने जा रही थीं। इसी दौरान इंदिरा गांधी चौराहे के पास उनके साथ सड़क हादसा हो गया। हादसे में उनके दोनों पैरों और सिर में गंभीर चोटें आईं। उन्हें तत्काल स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय में भर्ती कराया गया।

 उपचार के दौरान हुआ था विवाद 

अस्पताल में उपचार के दौरान अधिवक्ताओं और जूनियर डॉक्टरों के बीच विवाद हो गया जो धक्का-मुक्की और मारपीट में बदल गया। घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बन गया था। महिला अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया था कि उनके साथ अभद्रता की गई और मारपीट की गई। वहीं डॉक्टरों की ओर से भी आरोप लगाए गए थे। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया था।

विवाद के बाद निजी अस्पताल में ले गए 

विवाद के बाद परिजन जागृति शुक्ला को एक निजी अस्पताल ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें 21 मई को लखनऊ स्थित संजय गांधी पीजीआई रेफर कर दिया गया। लगभग 18 दिनों तक चले इलाज के बाद सोमवार को उनका निधन हो गया।
• निधन की सूचना मिलते ही शोक  अधिवक्ता के निधन की सूचना मिलते ही इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने शोक व्यक्त किया। बार एसोसिएशन के संयुक्त सचिव अखिलेश शर्मा ने बताया कि दिवंगत अधिवक्ता के परिजनों को बार एसोसिएशन की ओर से पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। साथ ही लंच के बाद न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया गया है।

 चल रहा धरना प्रदर्शन 

इसबीच अंबेडकर मूर्ति चौराहे पर अधिवक्ताओं का एक समूह धरना-प्रदर्शन कर रहा है। प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं की मांग है कि अधिवक्ताओं से मारपीट के आरोप में निलंबित डॉक्टरों के नाम सार्वजनिक किए जाएं तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। अधिवक्ता रितेश श्रीवास्तव ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उधर, जनपद न्यायालय के अधिवक्ताओं ने कलेक्ट्रेट गेट के सामने प्रदर्शन करते हुए पुतला दहन किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। वहीं कुछ अधिवक्ताओं ने सिविल लाइंस स्थित एकलव्य चौराहे पर जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक पीड़ित परिवार को समुचित सहायता और मामले में न्याय नहीं मिलता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

दूसरी ओर, अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों ने भी ओपीडी सेवाएं बंद कर विरोध दर्ज कराया है। उनका आरोप है कि उनके एक साथी डॉक्टर को कुछ अज्ञात लोग घर से अपने साथ ले गए हैं। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। गौरतलब है कि 20 मई को स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय में अधिवक्ताओं और जूनियर डॉक्टरों के बीच हुआ विवाद पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना था। अब अधिवक्ता जागृति शुक्ला के निधन के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है और दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया है।

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