हमीदिया अस्पताल में डॉक्टर ठग सक्रिय: भर्ती मरीजों के परिजनों से ऑपरेशन के नाम पर वसूली, इंदौर से धराया

हमीदिया अस्पताल में डॉक्टर ठग सक्रिय: भर्ती मरीजों के परिजनों से ऑपरेशन के नाम पर वसूली, इंदौर से धराया
भोपाल, यशभारत। राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ गंभीर मरीजों के परिजनों की मजबूरी का फायदा उठाकर एक जालसाज उन्हें लाखों की चपत लगा रहा था। खुद को अस्पताल का डॉक्टर बताकर डराने वाले इस ठग को कोहेफिजा पुलिस और क्राइम ब्रांच ने इंदौर से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान जितेंद्र खागरे (31) निवासी बैतूल के रूप में हुई है।
ऐसे बिछाता था जाल: लिवर में सूजन और इमरजेंसी का डर
आरोपी का काम करने का तरीका बेहद शातिर था। वह मरीजों के परिजनों को फोन कर कहता था- मैं डॉक्टर अर्णव बोल रहा हूँ, आपके मरीज की हालत बिगड़ गई है। लिवर में सूजन है, तुरंत ऑपरेशन करना होगा। जल्दी से दवाओं के लिए 5000 रुपए इस क्यूआर कोड पर भेजें। घबराए हुए परिजन बिना सोचे-समझे पैसे ट्रांसफर कर देते थे, जिसके बाद आरोपी उनका नंबर ब्लॉक कर देता था।
अस्पताल के भेदी पर शक: कैसे लीक हुआ डेटा?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा और गोपनीयता पर है। पुलिस जांच में यह संदिग्ध पाया गया है कि आरोपी के पास मरीजों के नाम, वार्ड नंबर और उनके परिजनों के निजी मोबाइल नंबर तक उपलब्ध थे। आशंका जताई जा रही है कि अस्पताल के ही कुछ निचले स्तर के कर्मचारी इस गिरोह का हिस्सा हैं, जो चंद रुपयों के लालच में मरीजों का डेटा लीक कर रहे थे।
अधीक्षक की रणनीति ने फंसाया आरोपी को
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद हमीदिया अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन ने पुलिस के साथ मिलकर जाल बिछाया। पीड़ित विनोद अहिरवार के जरिए ठग को दोबारा लालच देकर संपर्क किया गया। जैसे ही आरोपी ने कॉल किया, क्राइम ब्रांच ने उसकी टावर लोकेशन ट्रेस की और उसे इंदौर से दबोच लिया। आरोपी ने हमीदिया में 4 और अन्य शहरों (उज्जैन, देवास) के अस्पतालों में भी ठगी करना स्वीकार किया है।
अस्पताल की अपील:
हमीदिया अस्पताल में किसी भी इलाज या ऑपरेशन के लिए ऑनलाइन पैसे नहीं मांगे जाते। भुगतान केवल आधिकारिक काउंटर पर ही करें। किसी भी संदिग्ध कॉल की सूचना तुरंत प्रबंधन को दें।
हमीदिया अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन







