Delhiजबलपुरदेशमध्य प्रदेश

समिति के कर्मचारी निभा रहे रिश्तेदारी, अधिकारी लाचार

हर स्तर पर चल रही मनमानी

समिति के कर्मचारी निभा रहे रिश्तेदारी, अधिकारी लाचार

जबलपुर, यश भारत। गेहूं उपार्जन में मनमर्जी से केंद्रों की स्थापना के साथ-साथ अब समिति के कर्मचारियों की रिश्तेदारी निभाने के मामले भी सामने आने लगे हैं। जानकारी के मुताबिक आरछा समिति का केंद्र शिवम वेयरहाउस में खोला गया है, जबकि उक्त वेयरहाउस संचालक द्वारा धान खरीदी में सहयोग नहीं किया गया था और गेहूं खरीदी में मैपिंग के दो दिन पहले ही अपना प्रस्ताव दिया था। लेकिन उक्त वेयरहाउस संचालक समिति कर्मचारियों का रिश्तेदार है, इसके चलते दबाव डालकर यहां केंद्र खोल दिया गया।
इसी तरह वृताकार शाहपुरा का केंद्र काकुल वेयरहाउस में खोला गया है, जो कि प्राथमिकता सूची को दरकिनार कर खोला गया है। जानकारी सामने आ रही है कि काकुल वेयरहाउस वृताकार शाहपुरा का संचालन करने वाले लोगों के परिवार का ही है। जबकि यहां मात्र 1400 मेट्रिक टन की क्षमता खाली थी और केंद्र बनाने के लिए न्यूनतम क्षमता 3000 मेट्रिक टन रखी गई है। ऐसे और भी कई मामले हैं,
जहां समिति के कर्मचारी अपने परिवार के लोगों या रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं और अधिकारी गांधारी की तरह आंखों में पट्टी बांधकर बैठे हुए हैं।
जहां हो चुकी 10 खरीदी, वही गोदाम अब अनुपयुक्त
आरछा समिति का ही एक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां महादेव वेयरहाउस में समिति का केंद्र क्रमांक 2 खोला गया है। इसे लेकर समिति प्रबंधक और समिति से जुड़े लोगों द्वारा एक पत्र दिया गया है, जिसमें बताया गया है कि उक्त गोदाम का परिसर उपार्जन योग्य नहीं है, जबकि उक्त समिति पहले दो बार उस परिसर में खरीदी कर चुकी है और कोई समस्या नहीं आई थी। इसके अलावा अन्य समितियां भी पांच बार यहां पर खरीदी कर चुकी हैं और तीन बार स्व सहायता समूह के माध्यम से खरीदी हो चुकी है। लेकिन इस बार आरछा समिति को यहां अनुपयुक्तता दिखाई दे रही है, क्योंकि उनकी पसंद कर्मचारी के रिश्तेदार का गोदाम बना हुआ है।

WhatsApp Image 2026 04 19 at 14.26.17

कटंगी से लगे हिनोत गांव में 22000 मेट्रिक टन क्षमता के पांच वेयरहाउस खाली पड़े हैं, जिन्हें कहीं भी मैप नहीं किया गया।

लुहारी समिति का केंद्र 25 किलोमीटर दूर काला हस्ती वेयरहाउस में स्थापित किया गया था, जिसे बदलकर शिव शक्ति वेयरहाउस में कर दिया गया है, लेकिन समिति से दूरी में कोई अंतर नहीं आया है। वहीं नया केंद्र सरोद समिति से मात्र 500 मीटर दूर स्थापित कर दिया गया है।
कुंडम क्षेत्र की पड़रिया समिति का केंद्र कुडम समिति स्थल से 10 किलोमीटर दूर स्थापित किया गया है, जबकि समिति स्थल से 5 किलोमीटर की दूरी पर ही मारुति वेयरहाउस की दो यूनिट खाली पड़ी हुई हैं और उसी परिसर में एक यूनिट में द्वार प्रदायक केंद्र भी है।
वृताकार समिति शाहपुरा का केंद्र काकुल वेयरहाउस में बनाया गया है, जहां मात्र 1400 मेट्रिक टन की क्षमता खाली है, जबकि न्यूनतम क्षमता 3000 मेट्रिक टन निर्धारित की गई थी। विपणन समिति शाहपुरा का केंद्र शाहपुरा से 22 किलोमीटर दूर बेलखेड़ा के जागेश्वर वेयरहाउस में बनाया गया है, जबकि शाहपुरा में ही रघुवीर श्री वेयरहाउस में 17000 मेट्रिक टन की क्षमता खाली है।

हर स्तर पर चल रही मनमानी

रघुवीर श्री वेयरहाउस, जहां 17000 मेट्रिक टन की क्षमता खाली है, जहां से विपणन और वृताकार शाहपुरा की समितियां मात्र डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर हैं, फिर भी यहां कोई केंद्र नहीं बनाया गया।
शुभी एग्रो लॉजिस्टिक्स में समिति नरेंद्रपुर-2 का केंद्र बनाया गया था, जिसे बाद में गोदाम ब्लैकलिस्टेड होने की बात कहकर हटा दिया गया, जबकि वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन द्वारा ब्लैकलिस्टेड होने की कोई जानकारी नहीं दी जा रही है।
सिगोद समिति का केंद्र ओम साईं वेयरहाउस में खोला गया है, जबकि यहां 3000 मेट्रिक टन से कम क्षमता खाली है।
मझगमा समिति का केंद्र समिति से 50 किलोमीटर दूर बघेल वेयरहाउस, बुढ़ागर में बनाया गया है, जबकि मागमा समिति के 10 किलोमीटर के क्षेत्र में लगभग पांच वेयरहाउस खाली हैं, जो उपार्जन योग्य हैं।
मझौली के मां अन्नपूर्णा वेयरहाउस में 4000 मेट्रिक टन की क्षमता है, लेकिन प्राथमिकता सूची को दरकिनार करते हुए दादा भंडारी में केंद्र खोल दिया गया, जबकि यहां रिक्त क्षमता कम है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button