बुलडोजर ने ढाया आशियाना, मलबे में दबी NEET की उम्मीदें: कल परीक्षा, आज अंकिता के हाथ में बचीं सिर्फ फटी किताबें

बुलडोजर ने ढाया आशियाना, मलबे में दबी NEET की उम्मीदें: कल परीक्षा, आज अंकिता के हाथ में बचीं सिर्फ फटी किताबें
भोपाल, यशभारत। राजधानी के मानस भवन के पीछे शनिवार को चली नगर निगम की जेसीबी ने सिर्फ कंक्रीट के मकान नहीं गिराए, बल्कि एक छात्रा के डॉक्टर बनने के सपने को भी मलबे के ढेर में दबा दिया। कल यानी रविवार को अंकिता दांगी की देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET है, लेकिन आज उसके सिर से छत छिन गई और पढ़ने के लिए किताबें तक नसीब नहीं बचीं।
मलबे में भविष्य तलाश रही अंकिता
18 वर्षीय अंकिता दांगी उस समय अपनी अंतिम तैयारी कर रही थी, जब अचानक पुलिस बल और नगर निगम की टीम ने उसके घर पर बुलडोजर चला दिया। अंकिता ने रोते हुए बताया, मैंने बहुत मिन्नतें कीं, अधिकारियों के पैर तक पकड़े कि मेरी कल परीक्षा है, मुझे थोड़ा समय दे दो। लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। मेरा घर गिरा दिया गया और मेरी सारी किताबें, नोट्स और जरूरी दस्तावेज मलबे के नीचे दब गए।
बिना छत और बिना किताबों के कैसे होगा मुकाबला?
अंकिता का घर उन 27 आदिवासी परिवारों में शामिल था जिन्हें अवैध निर्माण बताकर हटाया गया है। कल होने वाली परीक्षा के लिए अंकिता ने सालों मेहनत की थी, लेकिन ऐन वक्त पर मलबे से फटी किताबें निकालते हुए वह बेबस नजर आई। अंकिता ने सवाल किया, अब न रहने की जगह है, न रात को पढ़ने के लिए रोशनी। पूरी रात मलबे के पास बैठकर काटनी होगी, ऐसे में कल एग्जाम कैसे दूंगी? समझ नहीं आ रहा पेपर देने जाऊं या बेघर हुए माता-पिता को संभालूं।
प्रशासन की संवेदनशीलता पर उठ रहे सवाल
बस्ती के निवासियों का कहना है कि प्रशासन को कम से कम बच्चों की बोर्ड और प्रवेश परीक्षाओं के खत्म होने तक का इंतजार करना चाहिए था। एक तरफ सरकार बेटी पढ़ाओ के विज्ञापन पर करोड़ों खर्च करती है, वहीं दूसरी तरफ एक छात्रा के भविष्य को इस तरह सड़क पर ला दिया गया। घर टूटने के बाद अंकिता के परिवार का सारा सामान खुले आसमान के नीचे बिखरा पड़ा है, जिसमें उसकी साल भर की मेहनत यानी उसके नोट्स भी धूल में मिल गए हैं।







