फर्जी परिचय पत्र, अफगानी युवक मामला, वनरक्षक की मदद से आधार-पासपोर्ट बनवाया, निकाह कर भारतीय नागरिक बनने की साजिश, कलेक्ट्रेट के अन्य अधिकारी भी रडार पर

जबलपुर। शहर में गहराते राष्ट्रीय सुरक्षा संकट के बीच एसटीएफ और एटीएस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अफगानी नागरिकों के एक फर्जी पहचान नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह की मदद से अफगानी नागरिक न केवल अवैध रूप से भारत में रह रहे थे, बल्कि आधार कार्ड, पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज बनवाकर खुद को भारतीय नागरिक के रूप में स्थापित करने में लगे थे। इस मामले में दो प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें एक वन विभाग का कर्मचारी भी शामिल है।
निकाह रचाकर बना भारतीय नागरिक, पासपोर्ट बनवाने की थी साजिश
मुख्य आरोपी सोहबत खान पिता बदरुद्दीन खान पिछले 10 वर्षों से जबलपुर में अवैध रूप से रह रहा था। उसने एक स्थानीय महिला से निकाह कर भारतीय पहचान बनाने की साजिश रची और फर्जी दस्तावेजों के सहारे आधार कार्ड तथा पासपोर्ट बनवाया। यही नहीं, उसने अन्य अफगानी नागरिकों के लिए भी यही तरीका अपनाया और उन्हें भी फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराए।
वनरक्षक ने जारी किया फर्जी परिचय पत्र, बना पहचान बनाने का आधार
इस पूरे मामले में चौंकाने वाली भूमिका वन विभाग जबलपुर में पदस्थ वनरक्षक दिनेश गर्ग की सामने आई है। जांच में पता चला है कि दिनेश गर्ग ने सोहबत खान के नाम से फर्जी परिचय पत्र तैयार कर उसे आधार कार्ड दिलवाया, जो बाद में पासपोर्ट बनने का आधार बना। इतना ही नहीं, वह पिछले 5 वर्षों से चुनाव कार्य (BLO) में कलेक्ट्रेट कार्यालय में तैनात था, जबकि वन परिक्षेत्रों में दर्जनों बीटें रिक्त हैं।
20 से ज्यादा अफगान नागरिकों के पासपोर्ट जबलपुर पते पर
जांच में सामने आया है कि अब तक 20 से अधिक अफगान नागरिकों के पासपोर्ट जबलपुर के फर्जी पते पर बनाए गए हैं। दो अफगानी युवक अकबर और इक़बाल, जो कथित तौर पर पश्चिम बंगाल निवासी बताए गए, उनके भी पासपोर्ट जबलपुर पते से जारी हुए हैं।
पैसे लेकर बनवाए दस्तावेज, दूसरा आरोपी भी पकड़ा गया
पूछताछ में सामने आया है कि पासपोर्ट बनवाने के बदले 10 लाख रुपये से अधिक की अवैध लेनदेन भी हुई है। इसी सिलसिले में एटीएस ने महेंद्र कुमार सुखदन (निवासी कटंगा, जबलपुर) को भी गिरफ्तार किया है, जो फर्जी कागजातों की प्रक्रिया में शामिल था।
सरकारी विभागों में भी संलिप्तता की जांच
जांच एजेंसी ने इस पूरे रैकेट में पासपोर्ट कार्यालय, पुलिस वेरिफिकेशन टीम और डाकघर के कुछ कर्मचारियों की संलिप्तता की भी आशंका जताई है। इस दिशा में पूछताछ और दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है।
जल्द होंगे और गिरफ्तारियां
एटीएस ने यह स्पष्ट किया है कि यह केवल प्रारंभिक खुलासा है और नेटवर्क में शामिल अन्य अफगानी नागरिकों एवं सहयोगियों की जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। सुरक्षा एजेंसियां अब इस मामले को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर गहन जांच में जुट गई हैं।


वनरक्षक ने जारी किया फर्जी परिचय पत्र, बना पहचान बनाने का आधार





