
जबलपुर, यशभारत। मेडिकल कॉलेज के अंतर्गत संचालित राज्य कैंसर संस्थान में रेडिएशन थैरेपी की एक मशीन के लंबे समय से बंद रहने के कारण कैंसर मरीजों को इलाज में देरी और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। संस्थान में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं, जिनमें प्रदेश के दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले लोग भी शामिल होते हैं। ऐसी स्थिति में एकमात्र मशीन का काम करना बंद कर देना मरीजों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
मरीजों की बढ़ती संख्या, सीमित संसाधन
संस्थान में रेडिएशन थैरेपी के लिए हर दिन कई दर्जन मरीज पहुंचते हैं। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में रेडिएशन थेरेपी एक प्रमुख उपचार विधि मानी जाती है, जो समय पर दी जाए तो रोग नियंत्रण में सहायक होती है। लेकिन वर्तमान में मशीन की अनुपलब्धता के कारण मरीजों को या तो लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, या अगली तारीख दी जा रही है। कई बार यह स्थिति तब और जटिल हो जाती है जब मरीजों को बार-बार लंबी दूरी तय कर संस्थान आना पड़ता है, लेकिन उपचार न मिल पाने के कारण उन्हें निराश लौटना पड़ता है। इससे न केवल आर्थिक बल्कि मानसिक दबाव भी बढ़ रहा है।
मरीजों और परिजनों की अपील
मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि राज्य कैंसर संस्थान पूरे प्रदेश के लिए एकमात्र समर्पित केंद्र है, जहां आधुनिक तकनीकों से उपचार की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे में यहां की मशीनों और व्यवस्थाओं का दुरुस्त रहना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी अपील की कि रेडिएशन मशीन की मरम्मत या आवश्यकता अनुसार नई मशीन की व्यवस्था जल्द की जाए, जिससे किसी भी मरीज का उपचार बाधित न हो।
समय पर रेडिएशन न मिलने की चिंता
चिकित्सकों के अनुसार कैंसर जैसी बीमारी में समय पर इलाज न मिलना रोग की गंभीरता को बढ़ा सकता है। रेडिएशन थेरेपी में तय शेड्यूल के अनुसार सत्र पूरे करना जरूरी होता है। यदि इसमें देरी होती है, तो रोगी की स्थिति पर विपरीत असर पड़ सकता है। इसलिए मशीन को पुनः चालू करने की दिशा में तेजी लाना बेहद जरूरी हो गया है।
प्रयास जारी, लेकिन आवश्यकता त्वरित समाधान की
संस्थान प्रशासन की ओर से जानकारी मिली है कि मशीन को जल्द से जल्द चालू करने के लिए प्रक्रिया जारी है। तकनीकी टीम समस्या की पहचान कर रही है, और वैकल्पिक समाधान पर भी विचार किया जा रहा है ताकि मरीजों को उपचार में विलंब न हो। इसके साथ ही यह भी प्रयास हो रहे हैं कि जिन मरीजों की स्थिति गंभीर है, उन्हें प्राथमिकता दी जाए और सीमित संसाधनों में उन्हें राहत मिल सके।







