रिश्तों का खूनी दौर: जबलपुर में 38 हत्याओं के पीछे निकले अपने ही कातिल,आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में सफल रही पुलिस
दोस्त, प्रेमी, बेटे, भाई और परिचितों ने छीनी जिंदगियां; हर हत्या छोड़ गई एक उजड़ा परिवार और कई अनुत्तरित सवाल


जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर में वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों में दर्ज 38 हत्याकांड केवल आपराधिक घटनाएं नहीं रहे, बल्कि समाज में बदलते रिश्तों और कमजोर पड़ते भरोसे की चिंताजनक तस्वीर बनकर सामने आए हैं। इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर रिश्तों में इतनी कड़वाहट क्यों बढ़ रही है कि दोस्त, प्रेमी, पड़ोसी, बेटे और परिचित ही एक-दूसरे की जान लेने पर उतारू हो रहे हैं। जिला पुलिस के आंकड़ों पर नजर डालें तो अधिकांश मामलों में हत्या करने वाले कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि मृतकों के बेहद करीबी लोग थे। कहीं दोस्ती दुश्मनी में बदल गई, कहीं प्रेम संबंधों का अंत खून-खराबे में हुआ तो कहीं मामूली विवाद ने किसी परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं।
गुस्सा, अविश्वास और नशा बन रहे हत्या की वजह
जांच में सामने आया है कि कई हत्याएं अचानक हुए विवाद, प्रेम प्रसंग, शराब के नशे, पैसों के लेन-देन और आपसी अविश्वास के कारण हुईं। चिंताजनक बात यह है कि जिन लोगों के साथ मृतक रोज उठते-बैठते थे, वही कई मामलों में उनकी मौत की वजह बने।अपराध विशेषज्ञों का मानना है कि समाज में सहनशीलता लगातार कम हो रही है। संवाद और समझदारी की जगह आक्रोश और हिंसा ले रही है, जिसके परिणामस्वरूप छोटी-छोटी बातों पर भी जानलेवा घटनाएं सामने आ रही हैं।
मां की गोद में टूटी बेटे की सांसें
गोहलपुर क्षेत्र में आकाश अहिरवार हत्याकांड शहर के सबसे मार्मिक मामलों में शामिल रहा। मां कलावती बाई ने अपने बेटे को खून से लथपथ हालत में देखा और उसे बचाने की गुहार लगाती रहीं, लेकिन हमलावर नहीं रुके। गंभीर रूप से घायल आकाश ने मां की गोद में ही दम तोड़ दिया। जांच में सामने आया कि आरोपी वही युवक थे जो कभी उसके करीबी दोस्त माने जाते थे।
प्रेम कहानी का दर्दनाक अंत
पाटन क्षेत्र की युवती तनु चक्रवर्ती अपने प्रेमी के साथ भविष्य के सपने संजो रही थी, लेकिन वही प्रेमी उसकी मौत का कारण बन गया। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर युवती की हत्या की और साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया। तकनीकी जांच और कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस ने पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया।
प्रेम संबंधों के विरोध में बहा खून
मझौली क्षेत्र में अर्जुन सिंह उर्फ अज्जू गोंड की हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। प्रेम संबंधों का विरोध इतना बढ़ा कि विवाद हिंसा में बदल गया और कुल्हाड़ी के वार से युवक की जान चली गई। घटना के बाद क्षेत्र में लंबे समय तक तनाव की स्थिति बनी रही।
दोस्ती का खौफनाक अंजाम
पाटन में 20 वर्षीय मनीष चढ़ार की हत्या ने साबित कर दिया कि मामूली विवाद भी किस तरह जानलेवा रूप ले सकते हैं। जिन युवकों को वह अपना मित्र समझता था, उन्हीं पर उसकी हत्या का आरोप लगा। घटना के बाद गांव में शोक और आक्रोश का माहौल रहा।
शव छिपाकर बचना चाहते थे आरोपी
कुंडम क्षेत्र में दिलीप पटेल उर्फ मिंटू की हत्या के बाद आरोपियों ने शव नदी में फेंक दिया ताकि मामला दब जाए। कई दिनों तक परिजन युवक की तलाश करते रहे। शव मिलने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पुलिस ने वैज्ञानिक जांच और पूछताछ के आधार पर पूरे घटनाक्रम का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
मां के सामने खत्म हो गई बेटी की जिंदगी
19 वर्षीय ऋचा रजक हत्याकांड भी शहर के सबसे दर्दनाक मामलों में शामिल रहा। बेटी पर जानलेवा हमला होता रहा और मां उसे बचाने के लिए चीखती रही, लेकिन उसकी आंखों के सामने बेटी की जिंदगी खत्म हो गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
नशे और आक्रोश ने बढ़ाई वारदातें
भेड़ाघाट, मदनमहल, संजीवनी नगर, रांझी और गोराबाजार सहित कई थाना क्षेत्रों में शराब के नशे में हुए विवाद हत्या तक पहुंच गए। कहीं उधारी के पैसों को लेकर विवाद हुआ तो कहीं मामूली बहस ने खूनी रूप ले लिया। अधिकांश मामलों में आरोपी मृतकों के परिचित या साथी ही निकले।
पुलिस की सक्रियता बनी बड़ी ताकत
इन घटनाओं के बीच एक सकारात्मक पहलू यह रहा कि जबलपुर पुलिस ने अधिकांश मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, साइबर ट्रैकिंग, एफएसएल रिपोर्ट और तकनीकी जांच की मदद से कई जटिल मामलों का खुलासा किया गया।
कई आरोपी हत्या को दुर्घटना या गुमशुदगी का रूप देने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस जांच के सामने उनकी साजिश ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी।
समाज के सामने गंभीर चुनौती
इन 38 हत्याओं ने समाज को आत्ममंथन करने के लिए मजबूर कर दिया है। हर हत्या के पीछे एक बिखरा परिवार, रोती हुई मां, बेसहारा बच्चे और जीवनभर का दर्द छिपा है। सवाल यह है कि आखिर रिश्तों में भरोसा क्यों टूट रहा है और युवा संवाद की जगह हिंसा को क्यों चुन रहे हैं।
सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि पारिवारिक संवाद की कमी, बढ़ता अकेलापन, नशे की प्रवृत्ति और सोशल मीडिया से उपजा मानसिक दबाव लोगों को असहिष्णु बना रहा है। यदि समय रहते इस दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो ऐसे अपराध और बढ़ सकते हैं।
पुलिस चला रही जागरूकता अभियान
जबलपुर पुलिस अपराध नियंत्रण के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता पर भी जोर दे रही है। विभिन्न थाना क्षेत्रों में नशा मुक्ति, महिला सुरक्षा, युवा संवाद और पारिवारिक विवाद समाधान से जुड़े अभियान चलाए जा रहे हैं। हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी, नियमित गश्त और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष अभियान के माध्यम से अपराधों पर अंकुश लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
38 हत्याओं की डराने वाली तस्वीर
दोस्तों द्वारा हत्या – 9 मामले
अन्य रिश्तों में हत्या – 8 मामले
प्रेमी द्वारा हत्या – 5 मामले
परिचित द्वारा हत्या – 5 मामले
अज्ञात आरोपी – 4 मामले
पुत्र द्वारा हत्या – 3 मामले
पड़ोसी द्वारा हत्या – 2 मामले
पार्टनर द्वारा हत्या – 1 मामला
भाई द्वारा हत्या – 1 मामला
“रिश्तों में बढ़ती कटुता समाज के लिए चिंता का विषय”
पारिवारिक विवाद, नशा और आपसी तनाव कई अपराधों की मुख्य वजह बन रहे हैं। पुलिस लगातार जनजागरूकता अभियान, निगरानी और संवेदनशील क्षेत्रों में सक्रिय कार्रवाई कर रही है। समाज और परिवारों को भी संवाद बढ़ाकर रिश्तों में बढ़ती कटुता रोकने की दिशा में आगे आना होगा। हत्या जैसे गंभीर अपराधों पर नियंत्रण और आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

संपत उपाध्याय, पुलिस अधीक्षक, जबलपुर







