भोपालमध्यप्रदेश

दीपावली आज: वृषभ स्थिर लग्न और प्रदोष काल के महासंयोग में होगी मां लक्ष्मी की आराधना, बाजारों में उत्साह

दीपावली आज: वृषभ स्थिर लग्न और प्रदोष काल के महासंयोग में होगी मां लक्ष्मी की आराधना, बाजारों में उत्साह

भोपाल, यशभारत। प्रकाश पर्व दीपावली पर आज राजधानी भोपाल में श्रद्धा, उल्लास और रोशनी का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। घरों से लेकर बाजारों और देवालयों तक भव्य सजावट की गई है। इस बार दीपावली पर दो दिन अमावस्या का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे पर्व का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। ज्योतिषाचार्य पंडित जगदीश शर्मा के अनुसार, आज शाम मां लक्ष्मी और भगवान गणेश के पूजन के लिए सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त शाम 6:02 बजे से रात 8:01 बजे तक रहेगा। इस समयावधि में वृषभ स्थिर लग्न और प्रदोष काल का विशेष और शुभ संयोग बन रहा है। स्थिर लग्न में पूजन करने से घर-परिवार में सालभर सुख-समृद्धि और मां लक्ष्मी की कृपा स्थायी रूप से बनी रहती है।

शहर में आज सूर्यास्त शाम 5:38 बजे होगा, जिसके साथ ही प्रदोष काल शाम 5:38 से रात 8:13 बजे तक की शुरुआत हो जाएगी। इसी दौरान शाम 6:02 से रात 8:01 बजे तक वृषभ स्थिर लग्न में महालक्ष्मी, भगवान गणेश, धन के अधिपति कुबेर और नए बहीखातों का पूजन करना सबसे उत्तम फलदायी रहेगा। पंडित शर्मा ने बताया कि अमावस्या तिथि आज सुबह 11:27 बजे शुरू हो चुकी है, जो कल यानी 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी। रविवार को प्रदोष काल में दीपावली पूजन के बाद अगले दिन सोमवार को सोमवती अमावस्या होने के कारण स्नान, दान, जप और पितरों के निमित्त किए जाने वाले धार्मिक कार्यों का विशेष पुण्य प्राप्त होगा।

दीपावली पर इन बातों का रखें विशेष ध्यान
पूजन से पहले घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ-सफाई कर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। कलश स्थापना के बाद सबसे पहले विघ्नहर्ता गणेश जी का पूजन करें, इसके बाद मां लक्ष्मी, कुबेर जी और बहीखातों की पूजा कर विधि-विधान से आरती करें। पूजन के दौरान रोली, कुमकुम, अक्षत, कमल का पुष्प, पंचामृत और खील-बताशे का विशेष रूप से उपयोग करें। साथ ही, पूजा के बाद गणेश मंत्र ‘ॐ गं गणपतये नमः’ और महालक्ष्मी मंत्र ‘ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ का जाप अवश्य करें।

पारंपरिक विधान के अनुसार आज शाम घर के मुख्य द्वार, आंगन, खिड़कियों और तुलसी चौरे के पास दीपदान जरूर करें। जानकारों का कहना है कि यह पर्व अंधकार पर प्रकाश और सकारात्मकता की विजय का प्रतीक है, इसलिए पूजन के दौरान जल्दबाजी या अव्यवस्था से बचते हुए पूरी श्रद्धा और सात्विक भाव के साथ उत्सव मनाएं तथा जरूरतमंदों को यथासंभव अन्न-वस्त्र का दान कर खुशियां साझा करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button