परिजनों ने कहा : बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए भेजा था मदरसा, बिहार से कटनी पहुंचे बच्चों के अभिभावक, दर्ज कराए बयान, बच्चों के मेडिकल परीक्षण कराने के बाद होगी सुपुर्दगी, जीआरपी कर रही जांच

कटनी, यशभारत। पटना से पूर्णा जा रही एक्सपे्रस टे्रन से महाराष्ट्र के नांदेड स्थित मदरसा में पढऩे जा रहे 163 बच्चों को मानव तस्करी के संदेह पर कटनी जंक्शन में उतारे जाने की घटना के तीन दिन बाद भी रेल पुलिस की जांच पूरी नहीं हो पाई है। अब इस मामले में नया मोड़ आ गया है। सूत्रों का कहना है कि पुलिस अब सभी बच्चों को मेडिकल परीक्षण कराने के बाद ही बच्चों को उनके परिजनों को सौंपेगी। उधर यह भी पता चला है कि बच्चों को मदरसा ले जा रहे सभी 8 लोगों को जबलपुर ले जाकर रेल पुलिस अधीक्षक के समक्ष शिनाख्त कराई जा रही है। इसके बाद संभवत: उन्हें कोर्ट में भी पेश किया जा सकता है। इस पूरे मामले में मुस्लिम समाज पैनी निगाह रखे हुए है। समाज के लोगों की मंशा यह है कि पुलिस अपनी जांच पूरी करे और बच्चों को उनके परिजनों को सुपुर्द करे लेकिन मामले की जांच में लेटलतीफी के चलते मुस्लिम समाज के लोगों में भी अंदर ही अंदर रोष देखा जा रहा है। समाज के जागरूक लोगों का कहना है कि पुलिस को अपनी जांच जल्द से जल्द पूरी करना चाहिए। जिससे बच्चों को उनके परिजनों को सौंपा जा सके। मुस्लिम समाज द्वारा इस मामले को हाईकोर्ट में भी चुनौती देने की तैयारी की जा रही है। बताया जाता है कि कल मंगलवार को बड़ी संख्या में बच्चों के परिजन कटनी जीआरपी थाने पहुंचे, जहां उनके बयान दर्ज किए गए। बच्चों के परिजनों का कहना है कि उन्होंने अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और भविष्य के लिए नांदेड़ महाराष्ट्र भेजने की अनुमति दी थी और इसमें कोई गलत मंशा नहीं थी। गौरतलब है कि शनिवार को जीआरपी, आरपीएफ और बाल सुरक्षा आयोग की संयुक्त टीम ने पटना पूर्णा एक्सप्रेस ट्रेन से 163 बच्चों को संदिग्ध परिस्थितियों में उतारा था। सभी बच्चों को सुरक्षा के मद्देनजर जबलपुर और कटनी के बाल गृहों में भेजा गया था। इस मामले में आठ लोगों के खिलाफ जीआरपी थाने में मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई थी।
बयान के आधार पर होगी कार्रवाई : डीएसपी
जीआरपी डीएसपी विजय गोठरिया ने बताया कि परिजनों से बाल कल्याण समिति द्वारा पूछताछ की जा चुकी है। अब पुलिस उनके बयान दर्ज कर रही है। सभी बयानों का सत्यापन किया जाएगा, जिसके बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर संदेहियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। पूरा मामला अब जांच के अहम चरण में पहुंच गया है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि बच्चों को भेजने के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था और कहीं इसमें किसी प्रकार की अनियमितता या अपराध तो नहीं हुआ।







