गाडरवारा।वन भूमि पर अवैध उत्खनन के मामले में वन विभाग द्वारा जब्त की गई एक ब्लैकलिस्टेड बोरिंग मशीन के विभागीय सुरक्षा से रहस्यमयी ढंग से गायब हो जाने ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गुजरात पंजीयन (जीजे 02 बीएस 1187) वाली यह करीब 16 टन ट्यूबवेल / बोरिंग रिंग मशीन अवैध खनन करते पकड़े जाने के बाद वन विभाग की निगरानी से गायब हो गई, जिससे मिलीभगत के आरोप लगने लगे हैं।
परिवहन विभाग (आरटीओ) के आधिकारिक रिकॉर्ड से चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। मशीन गुजरात के मेहसाणा आरटीओ में पंजीकृत है, लेकिन इसकी फिटनेस प्रमाणपत्र 4 अप्रैल 2023 को समाप्त हो चुका था, जबकि पीयूसी प्रमाणपत्र 27 सितंबर 2022 से ही एक्सपायर था। इसके अलावा रोड टैक्स बकाया होने के कारण
इसे 4 जुलाई 2024 को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। टैक्स डिफॉल्टर घोषित इस मशीन के दस्तावेज वर्षों से अमान्य होने के बावजूद यह मध्य प्रदेश में संचालित होती रही, जो नियमों का उल्लंघन दर्शाता है। बीमा यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस से कराया गया था, जिसकी वैधता नवंबर 2025 तक बताई जा रही है, लेकिन अन्य दस्तावेजों की स्थिति संदिग्ध बनी हुई है।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि मशीन हाल ही में पिपरिया क्षेत्र में देखी गई, जिससे संदेह गहरा गया है कि मालिक ने ही प्रभावशाली संरक्षण या मिलीभगत से इसे हटाया ताकि स्थायी जब्ती से बच सके। कुछ सूत्रों ने आशंका जताई है कि विभाग द्वारा गलत मशीन जब्त कर मामले को दबाने की कोशिश हो सकती है। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक मशीन बरामद नहीं हुई है।
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