इंदौरकटनीमध्य प्रदेश

सर्दी के मौसम में महक बिखेर रहा गुड़ पट्टी का विशिष्ट स्वाद

गुड़ तिल लाई की महक से बाजार गुलजार देशी स्वाद के साथ सांस्कृतिक पहचान

कटनी – जैसे-जैसे ठंड के जमे हुए नमूने दे रहे हैं वैसे ही बाजार में मुर गुड़ की पट्टी, गजक की सौंधी खुशबू से गुलजार हो उठती है ये खास, सोंधी व्यंजन है देशी गुड़ और मूंगफली, रामदाना, चने और गुड़ के अलावा तिल्ली औऱ गुड़ गुड़
मुरुओं की।
यह सिर्फ एक निजीकरण नहीं है, बल्कि कटनी शहर की वर्षों पुरानी सांस्कृतिक पहचान है, जो हर स्वाद में लोगों के स्वाद और स्वास्थ्य दोनों की अनोखी कहानी है। यह, गुड़ तिल, – मूंगफली और मुरमुरों का एक ऐसा प्राकृतिक मिश्रण है जो शरीर को ऊर्जा और गर्मी देता है। गुड़ को आयुर्वेद में प्राकृतिक गर्म पोषक तत्व माना जाता है। यही कारण है कि नाश्ते में लोग गरिष्ठ भोजन से दूरी बनाकर दोपहर के भोजन में लाई को प्राथमिकता देते हैं। तिल और मूंगफली इसे और मछली बनाते हैं, जिससे यह स्वाद और स्वास्थ्य मित्रता का प्रभाव बन जाता है।
अब ये गुड्ड पट्टी सीमित इलाके का स्वाद नहीं ले रही है। इसकी चर्चा आसपास के सजावटी में भी है। यहां के लोग भी गुड़ स्ट्रिप खरीदकर साथ ले जाते हैं।

गुड़ मुंगफली का मिश्रण

ठंड के दिनों में ये गुड़ की पट्टियाँ और गर्मियों के दिनों में लस्सी और कुल्फी का काम शुरू करने वाले पहले लोग 10 रुपये किलों से बिकते थे। धीरे-धीरे महंगी कीमत, स्वाद बढ़ाने के लिए तिल-मूंगफली भी जोड़ें। अब 220 से 240 रुपये की कीमत में पक्की दुकानें हैं।

पंकज लैया
मूर्तिगांधी द्वार
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पिता के हाथों में था जादू…

इस यात्रा का काम
उसी परंपरा का खण्डन कर रहे हैं जिसमें पिता मूलचंद गुप्ता जी के साथ हम कारीगरों ने भी गुड़ की पट्टी, रामदाना की पट्टी, तिल की पट्टी, लाई के लोध, रामदाना की छड़ी का उपयोग किया था, पिता के हाथों में जादू था उनके हर समय में एक अजब सा सोंधा पन था हमने भी वही स्वाद देने का प्रयास किया है। और शहर के लोगों ने हमें भी वही प्यार दिया है। रोजना शाम 6 बजे से ही ठेले लोगों की भीड़ में हम पैकेजिंग भी नहीं कर पाते और माल बिक जाते हैं। यह बहुत ही मेहनत का काम है

“सुनील गुप्ता”
एवेन लाया पट्टियाँ
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पुरानी रेसिपी तोड़ें हैं

हमने 40 रुपये पाव से शुरुआत की थी। अब कीमत तो बढ़िया है, तो थोड़ा रेट भी बढ़े स्वाद को लेकर कोई समझौता नहीं। देशी तिल, गुड़हल की बनी आज भी पुरानी रेसिपी पर रोल हमारे यहां हर रोज 15-20 किलो की पट्टियां बिकती हैं। लागत और मेहनत मुख्य है, हम व्यवसाय को छोड़ना नहीं चाहते।

“अखिल गुप्ता”
गांधी गंज

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