शांतिनगर में राहगीरी डे का 10वां संस्करण, जनसहभागिता से बना जन उत्सव
‘नो-व्हीकल जोन’ बना जीवन, खेल, स्वच्छता और संस्कृति का जीवंत मंच

शांतिनगर में राहगीरी डे का 10वां संस्करण, जनसहभागिता से बना जन उत्सव
‘नो-व्हीकल जोन’ बना जीवन, खेल, स्वच्छता और संस्कृति का जीवंत मंच

कटनी ,यशभारत। शांतिनगर मार्ग आज सुबह से ही एक अलग ही रंग में नजर आया। आम दिनों में जहां वाहनों की आवाजाही रहती है, वहीं आज पूरा क्षेत्र ‘नो-व्हीकल जोन’ बनकर जनउत्सव में बदल गया।
सुबह 7 बजे से ही लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। बच्चे रंग-बिरंगी पेंटिंग कर रहे हैं, युवा जुंबा और खेलों में ऊर्जा दिखा रहे हैं और बुजुर्ग योग एवं प्राणायाम के जरिए स्वस्थ जीवन का संदेश दे रहे हैं। पूरा माहौल किसी मेले जैसा नजर आ रहा है।
इस मौके पर सांसद विष्णु दत्त शर्मा, महापौर प्रीति सूरी, भाजपा अध्यक्ष दीपक टंडन सोनी और नगर निगम आयुक्त तपस्या परिहार की मौजूदगी ने आयोजन को और अधिक ऊर्जा प्रदान की। सांसद सहित सभी जनप्रतिनिधि सिर्फ मंच तक सीमित नहीं रहे, बल्कि खेल गतिविधियों में सीधे शामिल हुए। उन्होंने रस्साकशी, मटकी फोड़ और नींबू-चम्मच दौड़ में भाग लेकर बच्चों और युवाओं का उत्साह बढ़ाया।।पेंटिंग कर रहे बच्चों से संवाद करते हुए उन्होंने स्वच्छता का संदेश दिया और ‘मेरा शहर-मेरी जिम्मेदारी’ का आह्वान किया।
स्वच्छता शपथ से गूंजा शांतिनगर
सांसद ने विशाल जनसमूह को स्वच्छता की शपथ दिलाई और कहा कि स्वच्छ शहर तभी संभव है जब हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी निभाए। उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण का संदेश भी दिया।
खेल, संस्कृति और जागरूकता का संगम
शांतिनगर मार्ग पर पारंपरिक खेलों जैसे पिट्टू, लंगड़ी, सांप-सीढ़ी के साथ-साथ एयर गन शूटिंग और हॉर्स राइडिंग जैसी गतिविधियों ने माहौल को जीवंत बना दिया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में बच्चों द्वारा प्रस्तुत ‘देवा श्री गणेशाय’ और ‘स्वच्छ भारत का इरादा कर लिया हमने’ गीतों पर नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया।
स्वच्छता का लाइव संदेश
फोर-बिन सिस्टम, प्लास्टिक से इको-ब्रिक्स निर्माण और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को व्यवहारिक स्वच्छता की सीख दी गई। साथ ही कपड़े के थैले और तुलसी पौधे का वितरण कर हरित जीवनशैली को बढ़ावा दिया गया।
जनउत्सव में बदला राहगीरी डे
कार्यक्रम के अंत में स्वच्छता मित्रों और प्रतियोगिताओं के विजेताओं का सम्मान किया गया। पूरे आयोजन में एक ही संदेश गूंजता रहा—“मेरा शहर-मेरी जिम्मेदारी”।
आज का राहगीरी डे सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शहर की सामूहिक भागीदारी से बना एक जीवंत जीवन अनुभव बन गया।







