यशभारत पड़ताल : छात्रावाास में दो साल से लगा ताला, बच्चों को नहीं मिल रही सुविधा, दो साल में एक भी छात्र दर्ज नहीं, रीठी विकासखंड के ग्राम चिखला के 50 सीटर शासकीय अनुसूचित जनजाति जूनियर छात्रावास का मामला

कटनी, यशभारत। ग्रामीण क्षेत्रों मेंं निवास करने वाले गरीब वर्ग के छात्र-छात्राओं को अध्ययन के साथ छात्रावास की सुविधा प्रदान की गई है लेकिन जिले में एक ऐसा भी छात्रावास है, जहां इस सुविधा का लाभ गरीब वर्ग के छात्रों को नहीं मिल पा रहा है। यशभारत की टीम ने जब यहां पहुंचकर छात्रावास की पड़ताल की तो पता चला कि 50 सीटर छात्रावास में एक भी छात्र निवासरत नहीं है। हम बात कर रहे हैं रीठी विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत पटौंहा के ग्राम चिखला के 50 सीटर शासकीय अनुसूचित जनजाति जूनियर छात्रावास की। जहां पिछले दो सालों से ताला लगा हुआ है। आदिवासी जूनियर छात्रावास की दुर्दशा पर ग्रामीणों का कहना है कि शासन ने लोगों के कल्याण के लिए कई तरह की योजनाएं संचालित की है लेकिन इसका लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रहा है। आदिवासी जूनियर छात्रावास दुर्दशा का शिकार है लेकिन जिला प्रशासन से लेकर संबंधित विभाग के अधिकारी बेखबर बने हुए हैं। मौके पर जाकर जब जांच पड़ताल की गई तो पता चला कि शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक बालक आश्रम पाठशाला में कक्षा पहली से पांचवी तक केवल 11 छात्र हैं, जबकि कक्षा छठवीं से आठवीं तक केवल 8 छात्र अध्यनरत हैं। जबकि राज्य शासन द्वारा यहां पूर्णकलिक रूप से पांच शिक्षकों की तैनाती गई है, जिनको प्रतिमाह हजारों रूपए वेतन भी दिया जा रहा है। इस सबके बाद भी छात्रावास का लाभ गरीब वर्ग के जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को नहीं मिल पा रहा है। छात्रावास एवं बालक आश्रम पाठशाला की बद से बदत्तर हालत पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने भी ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों की सूचना पर यशभारत की टीम ने ग्राम चिखला पहुंचकर पड़ताल की तो आदिम जाति कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग गया। विगत शनिवार को प्राथमिक और माध्यमिक में कुल दर्ज 19 छात्रों में से दो प्राथमिक दो माध्यमिक याने कुल 4 छात्र ही अध्ययन करते हुए पाए गए। अब ऐसी स्थिति में गांव के लोगों ने जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार से मांग की है कि चिखला शासकीय बालक आश्रम पाठशाला को मर्ज कर दिया जाए।
आंगनबाड़ी केंद्र में मिली अनियमितताएं
ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम चिखला स्थित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 31 में केंद्र की कार्यकत्र्ता किरण सिंह साहित बच्चे केंद्र से नदारत रहते हैं। केंद्र की सहायिका तिलक रानी सिंह आंगनबाड़ी केंद्र को खोलकर दिखावे के लिये संचालित कर रही हैं। यशभारत की पड़ताल से आई महिला बाल विकास परियोजना विभाग रीठी की सच्चाई सामने आई। केन्द्र को देखकर ऐसा लगा कि कागजो में संचालित हो रहा है।








