
बोहता में भूमाफियाओं का खुला खेल: सरकारी नाला पाटकर धड़ल्ले से हो रही अवैध प्लाटिंग
कलेक्टर के निर्देशो की सरेआम उड़ रही धज्जियां, कृषि भूमि पर प्लॉटिंग जारी

राजस्व अमले की कार्यप्रणाली पर संदेह
कटनी, यशभारत। जिले में अवैध प्लाटिंग पर प्रशासन की सख्ती और लगातार जारी कार्रवाई के दावों के बीच ग्राम बोहता में भूमाफियाओं की बेखौफ गतिविधियों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नेशनल हाईवे क्रमांक-30 बायपास से सटे क्षेत्र में कृषि भूमि को कथित रूप से प्लॉटों में बदलकर खुलेआम बिक्री की जा रही है, जबकि नियमों के अनुसार बिना वैधानिक अनुमति कृषि भूमि पर प्लाटिंग करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
जानकारी के अनुसार पटवारी हल्का क्रमांक-4 अंतर्गत खसरा नंबर 59 एवं 60/4 की लगभग चार एकड़ कृषि भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध प्लॉट विकसित किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भूमि का स्वरूप बदलकर उस पर सड़कें और बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है तथा कई प्लॉटों के लिए अग्रिम राशि तक वसूली जा चुकी है। हालांकि इन लेन-देन और अनुमति से जुड़े दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट नहीं है, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया है।
सबसे गंभीर आरोप यह सामने आ रहा है कि प्लाटिंग क्षेत्र तक पहुंच मार्ग बनाने के लिए सरकारी नाले को भी पाट दिया गया है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो बरसात के दौरान जल निकासी पूरी तरह बाधित हो सकती है, जिससे नेशनल हाईवे क्रमांक-30 पर जलभराव और यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की गंभीर आशंका है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस प्रकार का कार्य न केवल पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह जनसुरक्षा और सार्वजनिक संपत्ति से भी सीधा खिलवाड़ है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद मौके पर प्रभावी कार्रवाई न होना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है। क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि भूमाफिया बिना किसी डर के सक्रिय हैं, जिससे प्रशासनिक सख्ती के दावे कमजोर पड़ते दिखाई दे रहे हैं। लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि प्रशासन अवैध कॉलोनियों पर लगातार निगरानी और कार्रवाई कर रहा है, तो फिर इतने बड़े स्तर पर गतिविधियां कैसे संचालित हो रही हैं।
वहीं राजस्व अमले की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर भी स्थानीय स्तर पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में चल रही गतिविधियों की जानकारी होने के बावजूद समय पर रोकथाम नहीं की गई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामले ने राजस्व तंत्र की कार्यशैली पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय नागरिकों ने कलेक्टर से पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है। साथ ही मांग की गई है कि यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाए तो जिम्मेदार भूमाफियाओं और संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की अवैध प्लाटिंग पर पूरी तरह रोक लग सके। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में अवैध प्लाटिंग के साथ-साथ बरसात में जलभराव और हाईवे प्रभावित होने जैसी गंभीर समस्याएं सामने आ सकती हैं।







