प्राइवेट पब्लिकेशन की बुकें चला रहे निजी स्कूल, एनसीईआरटी के नियमों की अव्हेलना, लुट रहे अभिभावक हजारों में मिल रहा प्रायमरी और मिडिल क्लास का सेट, पुस्तक मेले से नहीं मिला लाभ

कटनी, यशभारत। शहर में कतिपय निजी स्कूल एनसीईआरटी के नियमों की खुलेआम अव्हेलना कर रहे हैं। नियमों की बात करें तो स्कूलों में एनसीईआरटी द्वारा संचालित पाठ्यक्रम की पुस्तकों से पढ़ाई कराई जानी है, लेकिन शहर के कतिपय नामी-गिरामी निजी स्कूलों द्वारा एनसीईआरटी की बुकों की बजाए प्राईवेट पब्लिकेशन की बुकों से पढ़ाई कराई जा रही है। एनसीईआरटी की तुलना में प्राईवेट पब्लिकेशन की बुकें काफी महंगी है, जिसके चलते अभिभावक लुटने के लिए मजबूर हो रहे हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देशन में जिला प्रशासन द्वारा साधूराम स्कूल परिसर में पुस्तक मेले का आयोजन किया गया था, जिसमे शहर के लगभग सभी बुक स्टेशनर्स ने स्टाल लगाए थे। जिला प्रशासन का कहना था कि अभिभावकों को एक ही छत के नीचे पुस्तकें, कापियां और यूनीफार्म मिल जाए। पुस्तक मेले में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ भी उमड़ी। यहां खरीदी भी हुई। इसके बाद अब बुक स्टेशनर्स में अभिभावकों की भीड़ उमड़ रही है। इसके पीछे मुख्य कारण निजी स्कूलों द्वारा प्राईवेट पब्लिकेशन की बुकों को चलाया जाना है। अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूलों में प्राईवेट पब्लिकेशन की बुकें चलाई जाती है, वो बुकें पुस्तक मेला में नहीं मिली। इसके अलावा ज्यादातर स्कूलों ने अपने स्कूल का सिलेबस भी बताया, जिससे अभिभावकों को कई तरह की परेशानियां भी हुई। कई अभिभावकों ने कहा कि पुस्तक मेले का आयोजन का समय ठीक नहीं था। स्कूल खुलने के बाद पुस्तक मेला आयोजत किया जाना था। यह भी पता चला है कि कुछ स्कूलों ने अभी तक रिजल्ट भी घोषित नहीं किया है। जिससे अभिभावकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
एनसीईआरटी की तुलना में प्राईवेट पब्लिकेशन की बुकें महंगी
अभिभावकों ने बताया कि शहर के कई ऐसे बड़े स्कूल हैं, जो प्राईवेट पब्लिकेशन की बुकों से पढ़ाई कराते हैं। जो बुक एनसीईआरटी में 60 रूपए से 100 रूपए में मिल जाती है, वो बुकें प्राईवेट पब्लिकेशन में 500 रूपए से 600 रूपए तक मिल रही है। इस तरह प्रायमरी और मिडिल क्लास का एक छात्र का बुक्स 8 से 10 हजार रूपए में मिल रहा है। यदि किसी अभिभावक के दो बच्चे हैं तो उन्हें यह सेट 16 हजार रूपए में मिल रहा है। अभिभावकों का साफ कहना है कि जब सरकार के निर्देश हैं कि एनसीईआरटी की बुकों से पढ़ाई कराई जानी है तो फिर निजी स्कूल सरकार के नियमों का पालन क्यों नहीं करते।
क्या कहते हैं जिला शिक्षा अधिकारी
इस संबंध में जब प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी राजेश अग्रहरि से बात की गई तो उनका कहना था कि कई स्कूलों का रिजल्ट देर से आया है, जिसकी वजह से अधिकांश अभिभावकों ने मेले से पुस्तकें नहीं खरीदी। इसके अलावा कई स्कूलों द्वारा सिलेबस को भी बदल दिया गया है। जिसकी वजह से दुकानों में अभिभावकों की भीड़ उमड़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मेले में ज्यादातर निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोग आते हैं, जबकि उच्च आय वर्ग के लोग मेले की बजाए दुकानों से खरीदी करते हैं। डीईओ श्री अग्रहरि ने इस बात को स्वीकार किया कि पुस्तक मेले के आयोजन का समय सही नहीं था। अगले साल से रिजल्ट घोषित होने और नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद पुस्तक मेले का आयोजन कराने के प्रयास किए जाएंगे।






