मध्य प्रदेशराज्य

नल-जल योजना हुई हवा-हवाई, शोपीस बने हैंडपंप,कागजी विकास के बीच बूंद-बूंद पानी को तरस रहे देवलहा के वासिंदे

सतना/मझगवां यश भारत। सरकार की नल-जल योजना की पाइपलाइन में पानी भले न आ रहा हो, लेकिन साहबों की जेब में कमीशन का पैसा बराबर सप्लाई हो रहा है! यह हम नहीं, बल्कि मझगवां ब्लॉक के पहाड़ी अंचल और विशेषकर ग्राम पंचायत देवलहा के ग्रामीणों का आक्रोश कह रहा है, जहां डबल इंजन की सरकार हर घर नल से जल का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं मझगवां मुख्यालय से महज 2 किलोमीटर दूर की ग्राम पंचायत देवलहा में पानी की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। विश्वकर्मा टोला, आदिवासी मवानटोला बस्ती और अहिरान टोला में पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची है, और आधी आबादी इस चिलचिलाती धूप में कई किलोमीटर दूर से गंदा व मटमैला पानी ढोने को मजबूर है।

 

हैरानी की बात यह है कि इस संकट का समाधान खुद ग्रामीणों ने समय रहते प्रशासन को सौंप दिया था। गत 16 अप्रैल 2026 को देवलहा के जानकीशरण साहु ने अपनी निजी आराजी (खसरा नंबर 79/1) में स्थित पक्के कुएं को जनहित में इस्तेमाल करने के लिए ₹50 के गैर-न्यायिक स्टांप पर कानूनी शपथ पत्र दिया था। मवानटोला स्थित इस कुएं से लगभग 200 परिवारों का निस्तार होता आया है। चूंकि कुआं पुराना था और गाद जमा होने से पानी का रिसाव कम हो गया था, इसलिए नागरिक ने पंचायत से गर्मी शुरू होने से पहले इसकी सफाई और गहरीकरण की मांग की थी।

परंतु, सरपंच और सचिव की घोर निष्क्रियता के चलते इस लिखित समाधान पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। नतीजा ? ग्रीष्मकालीन सत्र की पूर्व तैयारी शून्य रही और वह कुआं आज पूरी तरह सूख गया है ।

यहाँ अधिकांश हैंडपंप पहले ही ड्राई हो चुके हैं, विभाग ने ऊपर का हिस्सा खोल दिया और नीचे का ढांचा जमीन में केवल ‘शोपीस’ की तरह नजर आ रहा है। वहीं, मोटर डालकर नल-जल योजना के तहत जो व्यवस्था शुरू हुई थी वह भी पूरी तरह धराशायी हो चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ जगहों की मोटर तो पंचायती जिम्मेदारों ने बहुत पहले ही खुलवा ली थी, जो आज तक वापस नहीं डाली गई।

 

यह मझगवां ब्लॉक का कोई पहला मामला नहीं है। पूरे पहाड़ी अंचल के लगभग सभी गांवों में यही हाहाकार है। यहाँ सबसे शर्मनाक भूमिका लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग की है। जिस ग्रीष्मकाल में इस विभाग को सबसे ज्यादा सक्रिय होना चाहिए था, उस समय यहाँ के जिम्मेदार अधिकारी कागजों पर पाइपलाइन बिछाने की उपलब्धि गिनाने में व्यस्त हैं। मझगवा में खुला विभाग का कार्यालय भी महज शोपीस बनकर रह गया है।

स्थानीय ग्रामीणों ने अब इस घोर लापरवाही के खिलाफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हुई तो वह आंदोलन को बाध्य होंगे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button