सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ शहर के व्यस्ततम बालक कॉम्प्लेक्स क्षेत्र में गुरुवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक रिहायशी मकान से आग की ऊंची लपटें और काला धुआं निकलने लगा। मकान के भीतर करीब 10 लोगों के फंसे होने की खबर ने प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए। लेकिन गोपालगंज थाना पुलिस की त्वरित सूझबूझ और अदम्य साहस ने एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया। पुलिस जवानों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए आग के तांडव के बीच प्रवेश किया और न केवल लोगों को सुरक्षित निकाला, बल्कि एक बड़े विस्फोट की आशंका को भी खत्म कर दिया।
आग का तांडव और पुलिस का ‘रेस्क्यू ऑपरेशन’
कंट्रोल रूम से सूचना मिलते ही गोपालगंज थाना प्रभारी निरीक्षक घनश्याम शर्मा ने बिना वक्त गंवाए उपनिरीक्षक नीरज जैन के नेतृत्व में एक विशेष टीम और डायल 112 को मौके पर रवाना किया। जब पुलिस टीम पहुंची, तो मंजर खौफनाक था; लपटें पड़ोसी मकानों को अपनी चपेट में लेने को बेताब थीं। ऐसे में जवानों ने चेहरे पर कपड़ा बांधा और सीधे धुआं उगलते मकान में घुस गए। टीम ने सूझबूझ का परिचय देते हुए सबसे पहले फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला और एहतियातन आसपास के घरों को भी खाली कराया, जिससे जनहानि की आशंका शून्य हो गई।
सिलेंडर बाहर निकाल टाला भीषण विस्फोट का खतरा
मकान के भीतर भीषण गर्मी और दम घोंटू धुएं के बीच पुलिस जवानों ने साहस की मिसाल पेश की। टीम ने देखा कि भीतर गैस सिलेंडर और अन्य ज्वलनशील सामग्री रखी थी, जिसमें आग लगने पर पूरा इलाका दहल सकता था। जवानों ने तत्परता दिखाते हुए सिलेंडरों को सुरक्षित बाहर निकाला, जिससे संभावित विस्फोट का खतरा टल गया। इसी बीच फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंची और पुलिस के साथ संयुक्त मोर्चा संभालते हुए भारी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया।
वरिष्ठ अधिकारियों ने संभाली कमान, जनता ने की सराहना
घटना की गंभीरता देखते हुए आरआई नितेश वाइकर और सिविल लाइन थाना प्रभारी आनंद सिंह भी दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। थाना प्रभारी घनश्याम शर्मा के कुशल नेतृत्व और पूरी टीम (जिसमें प्रधान आरक्षक राजेश चौबे, दीपक व्यास, आरक्षक प्रशांत, दशरथ, अरविंद सहित डायल 112 का स्टाफ शामिल था) की बहादुरी ने खाकी का मान बढ़ाया है। स्थानीय नागरिकों ने पुलिस की इस त्वरित और साहसिक कार्यवाही की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि यदि पुलिस चंद मिनट की भी देरी करती, तो परिणाम भयावह हो सकते थे।
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