दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी : मासूम बच्चों का जीवन दुभर, अंधेरे कमरे में रहने मजबूर

रीवा । जिले के जवा तहसील के ग्राम पंचायत देवखर के कोरियान टोला में रहने वाला एक गरीब परिवार ऐसी दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से जूझ रहा है, जो उसे परिवार के परेशानी का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है, जिसने चार मासूम बच्चों का सामान्य जीवन लगभग छीन लिया है.
दरअसल, रीवा जिले से एक बेहद भावुक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है. जिसने चार मासूम बच्चों का सामान्य जीवन लगभग छीन लिया है. हालत यह है कि ये बच्चे तेज रोशनी में आंखें तक नहीं खोल पाते और दिनभर अंधेरे कमरे में रहने को मजबूर हैं. बच्चों के खेलने की उम्र में उनकी जिंदगी मुश्किल बन गई है. सुग्रीव कोरी के परिवार में चार बच्चे है. जिनका नाम अनामिका, रिया, प्रियांशु और पुष्पेंद्र है.
परिजनों ने बताया कि बच्चे जन्म से ही गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं. बच्चों की त्वचा और बाल पूरी तरह सफेद हैं, जबकि आंखों की रोशनी बेहद कमजोर है. धूप या तेज रोशनी पड़ते ही उनकी आंखों में तेज जलन और चुभन होने लगती है. कई बार तो आंखें अपने आप बंद हो जाती हैं और चलते-चलते बच्चे गिर पड़ते हैं. कई बार ऐसी घटनाएं हुई कि उनको अचानक से चक्कर आ गया गर्मी में यह परेशानी और भी बढ़ जाती है।
जिस उम्र में बच्चे खेलते-कूदते और स्कूल जाते हैं, उस उम्र में ये चारों भाई-बहन घर के अंधेरे कमरों में कैद होकर रह गए हैं. परिवार के मुताबिक किताबों के अक्षर साफ दिखाई नहीं देने के कारण बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है. बीमारी से ज्यादा दर्द बच्चों को समाज के तानों से मिल रहा है. गांव के कुछ लोग और बच्चे उन्हें “अंग्रेज” कहकर चिढ़ाते हैं. लगातार मजाक और उपहास के कारण बच्चे मानसिक रूप से टूटने लगे हैं और अब उन्होंने बाहर निकलना भी लगभग बंद कर दिया है.
परिवार की आर्थिक हालत भी बेहद खराब है. माता-पिता मजदूरी करके जैसे-तैसे घर चलाते हैं. बड़े अस्पतालों में इलाज करवाना उनके लिए संभव नहीं है. दूसरी तरफ सरकारी योजनाओं का लाभ भी परिवार को नहीं मिल पा रहा है. सबसे बड़ी परेशानी यह है कि बच्चों के फिंगरप्रिंट और रेटिना स्कैन बायोमेट्रिक मशीन में मैच नहीं होते, जिसके कारण राशन कार्ड सक्रिय नहीं हो पाया है. परिवार को सरकारी राशन तक नहीं मिल रहा. इतना ही नहीं, बच्चों की गंभीर हालत के बावजूद अब तक उनका दिव्यांग प्रमाण पत्र भी नहीं बन पाया है, जिससे वे पेंशन, छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं.
परिवार ने प्रशासन और सरकार से मदद की गुहार लगाई है. उनका कहना है कि बच्चों का सही इलाज कराया जाए, दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाया जाए और राशन समेत जरूरी सरकारी योजनाओं का लाभ जल्द से जल्द दिया जाए, ताकि इन मासूम बच्चों की जिंदगी में थोड़ा उजाला आ सके. बच्चों की मां माया बताती है कि बच्चों को यह समस्या उनके जन्म से ही है गरीब परिवार से है लेकिन आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि इनका कहीं इलाज कराया जा सके तीन बच्चे हैं तीनों बच्चों को ऐसी समस्याएं जन्मजात से बनी हुई।
दुर्लभ बीमारी को लेकर डॉ राहुल मिश्रा बताते हैं कि यह बीमारी यह एक प्रकार की अनुवांशिक बीमारी है, जिसे एलबिस्म बोलते हैं और यह बीमारी में रंग हीन पूरा शरीर हो जाता है. समस्याएं होने लगती है. धूप में निकलना मुश्किल होता है. शरीर जलने लगता है और इसका इलाज भी जल्दी संभव नहीं हो पाता है।







