कटनी

दुकानों पर ताले, 7 दिन नहीं मिलेगा राशन, कमीशन बढ़ाने सहित पांच सूत्रीय मांगों को लेकर राशन दुकान संचालकों की हड़ताल

कटनी, यशभारत। पांच सूत्रीय मांगों को लेकर प्रांतव्यापी आव्हन के तहत कटनी जिले में भी राशन दुकान संचालकों की हड़ताल शुरू हो गई है। हड़ताल की वजह से राशन दुकानों में ताले लटके हुए नजर आ रहे हैं। हड़ताल का असर शहर से लेकर गांव तक देखने को मिल रहा है, जहां उचित मूल्य दुकानें बंद होने की वजह से हितग्राहियों को बिना राशन लिए वापस लौटना पड़ रहा है। विदित हो कि कमीशन बढ़ाने सहित अन्य मांगों को लेकर 1 से 7 अक्टूबर तक हड़ताल का आव्हान किया गया है। राशन दुकान संचालकों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों का निराकरण नहीं होने के कारण अब उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। संचालकों ने पूर्व में प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया था। मांगें पूरी नहीं होने पर खाद्यान्न वितरण बंद करने की चेतावनी भी दी गई थी। राशन विक्रेताओं की प्रमुख मांग खाद्यान्न वितरण पर मिलने वाले कमीशन में बढ़ोत्तरी किए जाने की है। विक्रेताओं के अनुसार वर्तमान में 90 रुपये प्रति क्विंटल कमीशन मिलता है, जिसे बढ़ाकर 200 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने की मांग की जा रही है। इसके अलावा शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के राशन विक्रेताओं के लिए 40 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय अथवा न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई है। विक्रेताओं ने परिवहन, तौल और खाद्यान्न के रखरखाव के दौरान होने वाली घटत को ध्यान में रखते हुए प्रति क्विंटल एक किलो की छूट देने की मांग की है। उनका कहना है कि वास्तविक संचालन के दौरान होने वाले नुकसान का भार कई बार दुकानदारों को उठाना पड़ता है।
5 तारीख तक मिल जाए कमीशन
राशन दुकान संचालकों ने कहा कि कमीशन का भुगतान नियमित और समयबद्ध तरीके से किए जाए। इसके तहत प्रत्येक महीने की 5 तारीख तक कमीशन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। सेवा सहकारी समितियों और वन समितियों के माध्यम से होने वाले भुगतान में देरी को समाप्त करने की भी मांग है। राशन दुकान संचालकों का दावा है कि कई दुकानदारों का पूर्व वर्षों का कमीशन भी लंबित है। उनका कहना है कि समय पर भुगतान नहीं होने से दुकान संचालन में आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। इसके अलावा खाद्यान्न की गुणवत्ता से संबंधित समस्याओं का सामना भी विक्रेताओं को करना पड़ता है।
उपभोक्ताओं की बढ़ी चिंता
हड़ताल के पहले दिन ही राशन लेने पहुंचे उपभोक्ताओं को निराश होकर लौटना पड़ा। सात दिनों तक दुकानें बंद रहने की स्थिति में सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर निर्भर परिवारों के सामने खाद्यान्न की व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। अब निगाहें सरकार और प्रशासन के निर्णय पर हैं कि राशन विक्रेताओं की मांगों को लेकर क्या कदम उठाया जाता है और खाद्यान्न वितरण व्यवस्था कब सामान्य होती है।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button