जबलपुर के सुरों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले ‘अनसुने सितारे’ सचिन उपाध्याय,लोकल एफएम में कब गूंजेगी जबलपुरिया गायकों के चर्चित गानों की आवाज
अंगना पधारो महारानी' से 'भारत का बच्चा-बच्चा' तक, रिकॉर्डिंग और संगीत संयोजन के दम पर लोकगीतों को दिलाई नई पहचान

अंगना पधारो महारानी से भारत का बच्चा-बच्चा’ तक, रिकॉर्डिंग और संगीत संयोजन के दम पर लोकगीतों को दिलाई नई पहचान
जबलपुर की संगीत और भजन परंपरा में कई ऐसे कलाकार हैं, जिनकी आवाज देश-दुनिया तक पहुंचती है, लेकिन पर्दे के पीछे रहकर इन गीतों को खास पहचान दिलाने वाले तकनीकी विशेषज्ञों और संगीतकारों को बहुत कम लोग जानते हैं। ऐसे ही एक नाम हैं सचिन उपाध्याय, जिन्होंने रिकॉर्डिंग, संगीत संयोजन और वीडियो निर्माण के जरिए जबलपुर के लोकगीतों और भक्ति संगीत को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यश भारत प्राइम टाइम विद आशीष शुक्ला’ में सचिन उपाध्याय ने अपने संगीत सफर, संघर्ष, सफल गीतों और जबलपुर की प्रतिभाओं पर खुलकर बात की।
संगीत विरासत में मिला, तकनीक से बनाई अलग पहचान
सचिन उपाध्याय बताते हैं कि उनके घर में शुरू से ही संगीत का माहौल था। उनके पिता कृष्णकांत (के.के.) उपाध्याय लोकगीत गाते थे और उनका अपना समूह भी था। माता-पिता दोनों संगीत से जुड़े थे, इसलिए संगीत के प्रति लगाव उन्हें विरासत में मिला। सचिन ने बताया कि कलाकारों के साथ भावनात्मक जुड़ाव और संगीत की समझ ने उन्हें रिकॉर्डिंग की दुनिया में आगे बढ़ने में मदद की। उन्होंने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय से तबले का नौ वर्षीय डिग्री कोर्स भी किया और संगीत के साथ तकनीकी पक्ष पर अपनी पकड़ मजबूत की।

महाकोशल के गायक नवरात्रि पर्व पर पूरे देश में देते हैं प्रस्तुतियां
यश भारत प्राइम टाइम विद आशीष शुक्ला’ में सचिन उपाध्याय से खास चर्चा स्थानीय संगीत को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का संकल्प सचिन के मुताबिक, जबलपुर में पहले भी शानदार संगीत तैयार होता था। उन्होंने राकेश तिवारी के गीतों ‘दोई बेरिया’ और ‘चुप चलो री’ को स्थानीय संगीत उद्योग की पहचान बनाने वाले गीतों में गिना। हालांकि, इसके बाद जबलपुर का संगीत काफी हद तक स्थानीय स्तर तक सीमित रह गया। सचिन की इच्छा थी कि यहां के लोकगीत और भजन देशभर में सुने जाएं। इसके लिए उन्होंने रिकॉडिंग की गुणवत्ता, संगीत संयोजन और प्रस्तुति को राष्ट्रीय स्तर के अनुरूप बनाने पर काम किया।
बेटियां’ से मिली सफलता ‘पांव पैजनिया’ ने मचाई धूम
सचिन ने बताया कि अजीत मिनोचा का ‘बेटियां’ गीत उनके शुरुआती महत्वपूर्ण रिकॉर्डिंग कार्यों में शामिल था। एनवीआर स्टूडियो में काम करते हुए उन्हें यह अनुभव मिला कि जबलपुर में तैयार गीत भी दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंच सकते हैं। इसके बाद शहनाज अख्तर का ‘पांव पैजनिया’ व्यापक रूप से लोकप्रिय हुआ। सचिन के अनुसार, इन सफलताओं ने स्थानीय कलाकारों के लिए नए अवसर खोले और जबलपुर के संगीत को बड़ी पहचान दिलाने में मदद की।
अंगना पधारो महारानी’ से ‘भारत का बच्चा-बच्चा’ तक का सफर
वर्ष 2007 में स्टूडियो छोड़कर स्वतंत्र रूप से काम शुरू करने के बाद सचिन ने अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया। वर्ष 2013 में मनीष अग्रवाल के गीत ‘अंगना पधारो महारानी’ में उन्होंने संगीत संयोजन और रिकॉर्डिंग का काम किया। इसके बाद ‘ताली बजा लेना’ में संगीत देने के साथ रिकॉर्डिंग और वीडियो निर्माण की जिम्मेदारी भी निभाई। सचिन ने ‘भारत का बच्चा-बच्चा’ गीत को अपने कॅरियर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल किया। उन्होंने बताया कि पूजा गोलानी की आवाज में तैयार इस गीत को देश के साथ विदेशों में भी सुना गया। अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान निकली रैलियों में भी यह गीत बजता सुनाई दिया। उनके मुताबिक, किसी गीत की सफलता के लिए केवल अच्छी आवाज ही नहीं, बल्कि सही संगीत संयोजन, प्रस्तुति और रणनीति भी जरूरी होती है।
नवरात्र में 200 से 250 गीतों पर काम
सचिन ने बताया कि नवरात्र सहित सालभर उनके स्टूडियो में बड़ी संख्या में भक्ति गीत तैयार होते हैं। इस वर्ष उनके अनुमान के मुताबिक, सालभर में करीब 200 से 250 गीतों पर काम हुआ है। इनमें जबलपुर के कलाकारों के साथ बाहर से आने वाले गायक भी शामिल हैं। चुनावी मौसम में भी उनकी टीम लोकगीतों की धुनों पर आधारित प्रचार गीत तैयार करती है। इसमें गीतकार, गायक, कोरस कलाकार और तकनीकी विशेषज्ञ मिलकर काम करते हैं।
एआई को बताया अवसर भी, चुनौती भी
संगीत के भविष्य पर सचिन का मानना है कि जबलपुर प्रतिभाओं से भरा शहर है और यहां के कलाकारों में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की क्षमता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर उन्होंने कहा कि इसका लाभ और नुकसान दोनों हैं। इसका सही उपयोग रचनात्मकता और उत्पादकता बढ़ा सकता है, लेकिन संगीत की बुनियादी समझ के बिना केवल तकनीक पर निर्भर रहना गुणवत्ता के लिए चुनौती बन सकता है।







