कटनीमध्य प्रदेश

ढाई करोड़ रुपये कीमती सरकारी जमीन षड्यंत्रपूर्वक निजी नाम पर दर्ज, जनपद सभा कटनी की भूमि में बड़ा खेल, अध्यक्ष ने की अधिकारियों से शिकायत

कटनी, यश भारत। जिले में शासकीय जमीन से जुड़े घोटालों का एक और गंभीर मामला सामने आया है। समीपी ग्राम हीरापुर कौड़ियां की करीब ढाई करोड़ रुपये मूल्य की बेशकीमती सड़क किनारे स्थित भूमि, जो विधिवत रूप से जनपद सभा कटनी के नाम पर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज थी, उसे सुनियोजित षड्यंत्र के तहत निजी व्यक्ति के नाम पर दर्ज कर दिया गया। यह मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार हीरापुर कौड़ियां ग्राम की भूमि बंदोबस्त के पहले तक जनपद सभा मुड़वारा की संपत्ति के रूप में दर्ज थी और इसका उपयोग जनहित एवं विकास कार्यों के लिए किया जाना प्रस्तावित था। इसके बावजूद कुछ प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत से राजस्व अभिलेखों में संदिग्ध तरीके से नामांतरण कर निजी स्वामित्व दर्शा दिया गया। पूरे प्रकरण को लेकर जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती गीता बाई ने जनपद पंचायत सीईओ को लिखित शिकायत दी है। शिकायत में उन्होंने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि हीरापुर कौड़ियां की भूमि पुराना खसरा नंबर 1155 बंदोबस्त के पूर्व 1978-79 तक जनपद सभा मुड़वारा के नाम पर दर्ज थी लेकिन बंदोबस्त के दौरान बिना किसी शासनादेश के इसके नए खसरा नंबर 1444 और इसके बटाक नंबर नियमों को ताक पर रखकर सुंदरलाल बल्द रम्मेलाल सोनी के वारिसानो के नाम दर्ज कर दिया गया है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर जमीन को फिर से जनपद सभा के नाम पर दर्ज करने के साथ दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। बताया जा रहा है कि वर्तमान में इस भूमि की बाजार कीमत करीब ढाई करोड़ रुपये आंकी जा रही है। ऐसे में शासकीय निकाय की इतनी कीमती जमीन का इस तरह निजी हाथों में जाना भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मिलीभगत की ओर सीधा इशारा करता है। सूत्रों के मुताबिक जमीन के रिकॉर्ड में परिवर्तन के दौरान नियमों की अनदेखी, फर्जी दस्तावेज और कूट रचना की आशंका जताई जा रही है। मामले की गहन जांच होने पर राजस्व विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी उजागर हो सकती है। अब यह देखना अहम होगा कि जनपद पंचायत और जिला प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है। क्या जमीन को पुनः जनपद सभा कटनी के नाम पर दर्ज किया जाएगा या फिर मामला कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रह जाएगा।[

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