डेढ़ हजार बदमाशों की डिजिटल कुंडली तैयार, अपराधों पर लगाम लगाने आधुनिक तकनीक का सहारा, पुलिस कंट्रोल रूम में लगाई अत्याधुनिक मेजरमेंट कलेक्शन यूनिट मशीन

कटनी, यशभारत। बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने के लिए कटनी पुलिस अब आधुनिक तकनीक का सहारा ले रही है। डकैती, लूट, चोरी, अपहरण, बलात्कार, अवैध हथियारों व मादक पदार्थों शराब, गांजा की तस्करी, पशु क्रूरता और साइबर फ्रॉड जैसे गंभीर मामलों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देश पर अपराधियों का एक व्यापक डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। इस हाईटेक अभियान के तहत वर्ष 2025-2026 में अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले या सक्रिय रहने वाले बदमाशों का पूरा ब्योरा ऑनलाइन दर्ज किया जा रहा है।
पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा ने बताया कि इस पूरी व्यवस्था को अमलीजामा पहनाने के लिए पुलिस कंट्रोल रूम में अत्याधुनिक मेजरमेंट कलेक्शन यूनिट मशीन स्थापित की गई है। जिले के सभी 17 थानों से जुड़े अपराधियों और संदिग्धों को पकडक़र इस यूनिट में लाया जा रहा है, जहां उनकी डिजिटल प्रोफाइलिंग हो रही है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक अब तक 16 शातिर अपराधियों का डेटा इस सिस्टम में अपलोड किया जा चुका है, जबकि जिले के करीब 1500 चिन्हित अपराधियों का डेटा संकलित करने का लक्ष्य रखा गया है।
फेशियल रिकग्निशन तकनीक उजागर करेगी पहचान
इस नए डिजिटल रिकॉर्ड में अपराधियों की केवल सामान्य जानकारी नहीं, बल्कि उनके शरीर और आदतों से जुड़े सूक्ष्म वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। अपराधियों के दोनों हाथों की उंगलियों के निशान फिंगरप्रिंट हथेलियों के प्रिंट पाम प्रिंट और आंखों का रेटिना स्कैन, चेहरे की बनावट की मैपिंग और शरीर के विभिन्न कोणों एंगल्स से तस्वीरें, अपराधी के चलने.दौडऩे के तरीके गेट पैटर्न का वीडियो रिकॉर्ड। यदि कोई शातिर अपराधी पुलिस को चकमा देने के लिए अपना नाम बदल लेता है, हुलिया बदल लेता है या चेहरा छिपा लेता है, तब भी फेशियल रिकग्निशन तकनीक और उसके चलने के अंदाज के आधार पर पुलिस चंद सेकंड में उसकी असली पहचान उजागर कर देगी।
केंद्रीय एजेंसियों की रहेगी नजर
यह हाईटेक सिस्टम सिर्फ कटनी जिले या मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा। इस डेटाबेस को देश की प्रमुख केंद्रीय जांच एजेंसियों केंद्रीय जांच ब्यूरो, राष्ट्रीय जांच एजेंसी, राजस्व खुफिया निदेशालय और आतंकवाद विरोधी दस्ते के नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। इससे अंतरराज्यीय गिरोहों, फरार अपराधियों और संगठित अपराध करने वाले नेटवर्क पर रियल टाइम नजर रखी जा सकेगी। जैसे ही कोई आरोपी गिरफ्तार होगाए उसे तुरंत कंट्रोल रूम भेजकर स्कैन किया जाएगा। इस परियोजना के दायरे में सिर्फ बाहर घूमने वाले अपराधी ही नहीं, बल्कि जेलों में बंद विचाराधीन और सजायाफ्ता कैदी भी आएंगे।
उंगलियों के निशान सलाखों के पीछे पहुंचे अपराधी
तकनीक के इस इस्तेमाल का असर जमीन पर दिखने लगा है। पुलिस अधीक्षक के अनुसार हाल ही में जिले में हुए कुछ गंभीर अपराधों का खुलासा फिंगरप्रिंट तकनीक की मदद से ही संभव हो पाया है, जिसमें चार शातिर बदमाशों को दबोचा गया है। माधवनगर थाना क्षेत्र में हुई चोरी के आरोपी को पुलिस ने अलीराजपुर से दबोचा एवं शातिर बदमाश सचिन पारथी को भोपाल से गिरफ्तार किया गया। बड़वारा में हुई चोरी की वारदात को अंजाम देने वाले आरोपी को सतना से दबोचने में सफलता मिली।
इनका कहना है
पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर अपराध नियंत्रण को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह हाईटेक डिजिटल सिस्टम लागू किया जा रहा है। इसके माध्यम से अपराधियों के फिंगरप्रिंट रेटिना स्कैन और फेशियल रीडिंग का अचूक रिकॉर्ड तैयार हो रहा है। इससे न केवल संदिग्धों की पहचान सेकंडों में होगी, बल्कि अंतरराज्यीय अपराधियों, साइबर फ्रॉड करने वालों और संगठित गिरोहों पर शिकंजा कसना बेहद आसान हो जाएगा।
-अभिनय विश्वकर्मा, पुलिस अधीक्षक







