मध्य प्रदेशराज्य

इंदौर त्रासदी के बाद ‘शुद्ध जल’ के लिए कसरत: पुरानी लापरवाहियों, विपक्ष के हमलों के बीच हरकत में आया प्रशासन

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सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 17 मौतों की गूँज अब सागर की राजनीति में भी सुनाई दे रही है। इस भीषण घटना से सबक लेते हुए सागर में प्रशासन और जनप्रतिनिधि सक्रिय तो हुए हैं, लेकिन उनके सामने पूर्व की उन गंभीर लापरवाहियों को सुधारने की बड़ी चुनौती है, जिन्हें लेकर विपक्ष लगातार हमलावर रहा है। विधायक शैलेंद्र जैन, महापौर संगीता तिवारी और निगम आयुक्त राजकुमार खत्री ने कमान संभालते हुए पेयजल व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के निर्देश दिए हैं।

गौरतलब है कि सागर नगर निगम की जल प्रदाय व्यवस्था लंबे समय से विवादों में रही है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने पूर्व में कई बार शहर के पुराने वार्डों में जर्जर पाइपलाइनों और ड्रेनेज के बीच से गुजरती लाइनों का मुद्दा सदन से लेकर सड़क तक उठाया था। पूर्व में मटमैले और कीड़ेयुक्त पानी की शिकायतों पर प्रशासन द्वारा केवल खानापूर्ति करने और अमृत योजना के नाम पर सड़कों को खोदकर छोड़ने जैसी लापरवाहियों ने जनता की मुश्किलों को बढ़ाया था। निगम में नेता प्रतिपक्ष बाबू सिंह बब्बू यादव का आरोप रहा है कि करोड़ों खर्च होने के बाद भी जनता को ‘जहर’ समान पानी सप्लाई किया गया, जिस पर अब प्रशासन पर्दा डालने की कोशिश कर रहा है।

इन पुरानी खामियों और बढ़ते दबाव को देखते हुए विधायक शैलेंद्र जैन ने निगम अमले को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब ‘पैच वर्क’ से काम नहीं चलेगा, हर संवेदनशील क्षेत्र का ‘वाटर ऑडिट’ अनिवार्य है। विधायक ने अमृत योजना के कार्यों में हुई पुरानी गलतियों को सुधारने और ड्रेनेज के पास वाली पाइपलाइनों को तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि मैदानी अमला कागजों के बजाय जमीन पर लीकेज चेक करे।

महापौर संगीता तिवारी और निगम आयुक्त ने भी फिल्टर प्लांट पर निगरानी का नया प्रोटोकॉल लागू किया है। अब ब्लीचिंग और क्लोरिनेशन की प्रक्रिया की 24 घंटे मॉनिटरिंग होगी। आयुक्त ने स्वास्थ्य निरीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे उन वार्डों से नियमित रैंडम सैंपल लें, जहाँ पूर्व में विपक्ष और जनता ने दूषित पानी की सर्वाधिक शिकायतें दर्ज कराई थीं। नगर निगम प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि शिकायतों को ठंडे बस्ते में डालने की पुरानी आदत को बदला जाए।

इंदौर की त्रासदी के बाद सागर में जनप्रतिनिधियों की यह सक्रियता बताती है कि अब उक्त गंभीर घटना से सबक लेते हुए व्यवस्थाओं में अमूल-चूल परिवर्तन की कोशिश की जा रही है। प्रशासन का पूरा जोर इस बात पर है कि किसी भी प्रकार की मानवीय चूक से इंदौर जैसे हालात सागर में पैदा न हों।

50 सेम्पल प्रतिदिन शहर में चैक करें : संभागीय आयुक्त

संभागीय आयुक्त अनिल सुचारी ने निगमायुक्त के साथ राजघाट बांध का निरीक्षण कर शहर में पेयजल सप्लाई का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने 

राजघाट बांध सहित अन्य स्रोतों से नागरिकों को उपलब्ध होने वाले पेयजल के कम से कम 50 सेम्पल प्रतिदिन सागर शहर में चैक करने के निर्देश निगम आयुक्त राजकुमार खत्री को दिए।

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