यमुना तो लौट गई, पर पीछे छोड़ गई सिर्फ कीचड़ और आंसू…. देखिए दिल्ली की तस्वीरे
लेकिन वहाँ घर नहीं, सिर्फ मलबा और कीचड़ का दलदल

यमुना का पानी जब दिल्ली में दाखिल हुआ, तो वो सिर्फ पानी नहीं था। वो अपने साथ लेकर आया था लोगों के डर, उनकी उम्मीदें और आने वाले कल की अनिश्चितता। पुराने लोहे के पुल के ऊपर से जब पानी बहने लगा, तो लोगों के दिल की धड़कनें तेज हो गईं। यमुना का वो रौद्र रूप मानो कह रहा था, “मैं लौट आई हूँ।

नदी के पास बसी झुग्गियों से लेकर पक्की कॉलोनियों तक, एक ही अफरा-तफरी का माहौल था। सामान समेटो, बच्चों को लेकर भागो, कौन कहाँ जा रहा है… कुछ समझ नहीं आ रहा था। यमुना बाजार में रहने वाले रामलाल ने अपने जीवन में ऐसी बाढ़ कभी नहीं देखी थी। उनका छोटा सा घर, जो उनकी ज़िंदगी की सारी कमाई था, कुछ ही घंटों में घुटनों तक पानी में डूब गया। उन्होंने अपनी बूढ़ी माँ और दो छोटे बच्चों को बस सुरक्षित जगहों पर भेजा और खुद अपनी कुछ बची-खुची चीजें बचाने में लग गए।

रिलीफ कैंप में भी जिंदगी आसान नहीं थी। सैंकड़ों लोग एक ही छत के नीचे, एक ही थाली में खाना खा रहे थे। यहाँ हर चेहरे पर डर और उदासी थी, लेकिन एक उम्मीद भी थी। एक छोटे बच्चे का जन्मदिन कैंप में मनाया गया। कीचड़ में सने हुए चेहरे पर खुशी की एक हल्की-सी मुस्कान थी, जो बता रही थी कि चाहे जितनी भी मुश्किलें आ जाएं, जिंदगी नहीं रुकेगी। लोग एक-दूसरे को हिम्मत दे रहे थे। कोई अपने घर की बर्बादी का दुख बाँट रहा था, तो कोई भविष्य की चिंता में डूबा था।यमुना का पानी धीरे-धीरे उतरने लगा। लोग अपने घरों की ओर लौटे।

लेकिन वहाँ घर नहीं, सिर्फ मलबा और कीचड़ का दलदल था।
रामलाल का घर अब पहचान में भी नहीं आ रहा था। दीवारों पर काले धब्बे और चारों ओर बदबूदार गाद। आँखों में आंसू थे, पर दिल में एक उम्मीद थी। उन्होंने अपने बच्चों को देखा और सोचा, “मैं फिर से शुरू करूँगा।”
पूरी दिल्ली में यही हाल था। लोग फावड़े और बाल्टी लेकर कीचड़ निकालने में जुट गए थे। मोनेस्ट्री मार्केट के दुकानदारों ने मिलकर अपनी दुकानें साफ करना शुरू किया। उनकी मुस्कुराहट बता रही थी कि उनका कारोबार फिर से खड़ा होगा। यह सिर्फ सफाई का काम नहीं था, यह अपनी ज़िंदगी को फिर से पटरी पर लाने की लड़ाई थी।

आज यमुना शांत है। उसका पानी खतरे के निशान से नीचे है। लेकिन उसके जाने के बाद जो जख्म उसने दिए हैं, वे अभी भी ताज़ा हैं। टूटे हुए घर, बर्बाद हुए सपने और दिल में बसा डर। लेकिन इन सबके बीच, एक चीज और भी है… लोगों का हौसला। दिल्ली ने दिखाया है कि चाहे जितना भी बड़ा संकट आ जाए, यहाँ के लोग हार नहीं मानते। वे गिरते हैं, उठते हैं और फिर से मुस्कुराते हैं। यमुना तो लौट गई, पर पीछे छोड़ गई है हिम्मत, उम्मीद और जिंदगी की एक ऐसी कहानी, जो आने वाली कई पीढ़ियों को याद दिलाएगी कि हर तूफान के बाद एक नई सुबह ज़रूर आती है।







