जहां रखा गेहूं, वहीं बनाया उपार्जन केंद्र, अब गोदाम सील करने का आदेश
प्रशासन की दोहरी नीति

जबलपुर, यश भारत। गेहूं उपार्जन में प्रशासन का दोहरा चरित्र देखने को मिल रहा है। जिला प्रशासन द्वारा आदेश जारी किया गया है कि जहां पर गेहूं का भंडारण किया गया है, उपार्जन के दौरान वहां से गेहूं का उठाव नहीं होगा, यानी उपार्जन अवधि में गेहूं गोदामों में बंद रहेगा। वहीं दूसरी तरफ, जिला प्रशासन द्वारा ही लगभग आधा दर्जन से अधिक ऐसे गोदामों में गेहूं के उपार्जन केंद्र बना दिए गए हैं, जहां पहले से पुराना गेहूं रखा हुआ है। जबकि प्राथमिकता सूची के हिसाब से इन गोदामों में उपार्जन केंद्र नहीं बनाया जाना चाहिए था।
इसलिए हुआ निर्णय
अधिकारियों के मुताबिक गेहूं का रीसायकल रोकने, यानी पुराना गेहूं गोदाम से उठकर फिर से केंद्रों में न पहुंचे, इसके लिए यह निर्णय लिया गया है। लेकिन जिन गोदामों में पहले से गेहूं रखा हुआ है और वहीं उपार्जन केंद्र भी बना दिए गए हैं, वहां यह आदेश बेमानी साबित होगा। ऐसी स्थिति में यह आशंका बनी रहेगी कि पुराना गेहूं नए गेहूं में समायोजित कर दिया जाए। यदि प्रशासन को ऐसा निर्णय लेना था, तो जहां गेहूं का भंडारण है वहां केंद्र बनाना ही नहीं था, क्योंकि कई ऐसे गोदाम उपलब्ध हैं जो उपार्जन के लिए उपयुक्त और खाली पड़े हैं। खास तौर पर वेयरहाउसिंग की करारी शाखा में इस तरह का खेल खुलेआम हुआ है।
उपार्जन के 10 दिन बाद 15 नए केंद्र बनाने की तैयारी
प्रशासन द्वारा उपार्जन केंद्रों की संख्या बढ़ाने के लिए 15 नए संकुल स्तरीय संगठनों के केंद्र खोलने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसको लेकर जिला पंचायत से 15 संगठनों के नाम मांगे गए हैं। सवाल यह उठता है कि जो प्रक्रिया एक माह पहले पूरी हो जानी चाहिए थी, वह उपार्जन शुरू होने के 10 दिन बाद क्यों की जा रही है। वहीं दूसरी ओर 13 ऐसी समितियां हैं, जिन पर वित्तीय अनियमितताओं के मामले दर्ज किए गए थे, लेकिन ये मामले अधिकतर तकनीकी खामियों से जुड़े बलाए जाते हैं और इनमें किसी वित्तीय गड़बड़ी का स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला है। इसके बावजूद प्रशासन इन समितियों को काम नहीं दे रहा है। वहीं, दूसरी तरफ संदेह के घेरे में रहे स्वयं सहायता समूहों को फिर से अधिक काम वेने की तैयारी की जा रही है, जबकि उनके वित्तीय लेनदेन और महिला हितों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। अब देखना होगा कि जिला पंचायत द्वारा भेजे जाने वाले 15 नाम उपार्जन के निर्धारित मापदंडों जैसे खाते में 72,00,000 की राष्शि, नियमित बैठकें और वित्तीय बस्तावेज को पूरा करते हैं या नहीं।
आर.बी. एसोसिएट्स ने अपने ही क्षेत्र में नियुक्त किए औचक निरीक्षक
यश भारत द्वारा गुरुवार को प्रकाशित समाचार में बताया गया था कि गेहूं उपार्जन में गुणवता की निगरानी कर रही आर.बी. एसोसिएट्स द्वारा नियुक्त सर्वेयरों में से कई को उनके गृह क्षेत्र के आसपास ही तैनात कर दिया गया है। ऐसा ही एक मामला सकरा समिति केंद्र क्रमांक एक का है जहां पर सर्वेयर अभिषेक यादव द्वारा सबसे पहले अपना ही गेहूं तुलवा कर गोदाम के अंदर रख दिया गया हालांकि सर्वेयर का परिवार इस क्षेत्र का किसान है ऐसे में तकनीकी रूप से तो यह सही माना जाएगा लेकिन अपने ही क्षेत्र में नियुक्ति सवाल तो खड़े करेगी ही।
यहां की गई नियुक्तियां
विजय मोहन साहू मझोली,आयुष पटेल सिहोरा,रोहित पटैल पनागर,हर्षित ठाकुर शाहपुरा पाटन,हिमांशु यादव निरीक्षक भी अपनी-अपनी तहसीलों में ही पदस्थ हैं। इनका कार्य सभी केंद्रों पर जाकर औचक निरीक्षण करना है, ताकि अनियमितताओं पर नियंत्रण रखा जा सके। लेकिन जब निरीक्षकों की तैनाती उनके अपने क्षेत्र में ही की गई है।






