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खितौला बैंक डकैती – सोना ने उड़ा रखी है पुलिस की नींद

मालदार आरोपी अभी भी दूर सफलता के नाम पर चार गिरफ्तारियां बरामदगी बेहद कम

जबलपुर यश भारत। 11 अगस्त को सिहोरा के खितौला में के इसाफ स्मॉल फाइनेंस बैंक में 15 करोड़ की डकैती के मामले में पुलिस ने भले ही कथित मास्टरमाइंड पाटन के रईस लोधी सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार करके घटना का खुलासा कर दिया हो बावजूद इसके इनके पास से पुलिस ने जो बरामदगी दिखाई है वह बेहद कम है असली माल लेकर फरार होने वाले आरोपियों की तलाश में पुलिस हाथ पैर तो मार रही है लेकिन अब तक इन चार के अलावा और कोई पुलिस के हाथ ला नहीं लगा है और पुलिस की सबसे बड़ी परेशानी भी यही है। पुलिस हर हाल में उन आरोपियों तक पहुंचाने की कवायद में तो लगी है जिनके पास सोना है। पुलिस का पूरा फोकस माल की बरामदगी पर है वही इस मामले में खुद पुलिस महकमे में इस बात को लेकर चर्चाएं भी है कि माल की बरामदगी होना टेढ़ी खीर है। और वाकई यह आशंका सही साबित होती है तो कुछ साल पहले घटना कटनी में हुई इसी तरह की घटना की पुर्नावृति्ती होने से इनकार नहीं किया जा सकता। क्योंकि कटनी की घटना में भी आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी माल बरामद नहीं हो पाया था।

यदि रायगढ़ थ्योरी सही है तो यह हो सकते हैं आरोपी

घटना के बाद और मास्टरमाइंड रईस की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में यह सामने आया था कि इस पूरी घटना की योजना उसने रायगढ़ छत्तीसगढ़ की जेल में रहते हुए बनाई थी और जेल से रिहा होने के बाद बिहार के आरोपियों के साथ मिलकर खितौला की घटना को अंजाम दिया गया। यह बात सौ फीसदी सही है कि रईस एनडीपीएस मामले में रायगढ़ की जेल में बंद हुआ था। वही उसकी मुलाकात रायगढ़ में एक्सिस बैंक में हुई डकैती के आरोपियों से हुई थी और उसी के बाद पूरी योजना बनाई गई। 19 सितंबर 2023 को रायगढ़ एक्सिस बैंक में भी डकैतों ठीक उसी तरह से घटना को अंजाम दिया था किस तरह खितौला की घटना सामने आई है। रायगढ़ के एक्सिस बैंक में भी बैंक खुलने के समय वारदात अंजाम दी गई थी और उक्त घटना में आठ आरोपी शामिल थे जिनके नाम सूत्रों के मुताबिक राकेश।गुप्ता उपेंद्र सिंह सुंदरिका सिंह राजपूत निशांत उर्फ पंकज कुमार और अमरजीत बाद में जेल से छूट गए हैं। जबकि इस घटना के आरोपी रहे नीरज जाधव राहुल कुमार प्रकाश जाधव और अमित दास वर्तमान में भी जेल में ही है और इन्हीं में से चार आरोपियों के खितौला की घटना मे संलिप्त होने की जानकारी सूत्रों के हवाले से बताई जा रही है। अब इसमें कितनी सच्चाई है यह तो पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को ही मालूम होगी। लेकिन यह बात भी तय है कि यह सभी आरोपी बिहार से ही थे और जबलपुर पुलिस को भी बिहार और झारखंड के आरोपियों की ही तलाश है। हालांकि जब रायगढ़ में घटना हुई थी तो वहां की पुलिस ने घटना वाली रात ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। रायगढ़ की घटना में डकैतों ने 5 करोड़ 59 लाख की लूट की थी जिसमें चार करोड़ 19 लाख नगद और एक करोड़ 40 लाख की ज्वेलरी शामिल थी। इस डकैती कांड में शामिल आरोपी शेरघाटी गया बिहार के रहने वाले थे और जैसी की सूत्रों से जानकारी लग रही है जबलपुर पुलिस की एक टीम भी गया गई थी और वहां अमरजीत दास और राकेश साव नामक व्यक्तियों की तलाश थी जिसमें अमरजीत की पुलिस को मिलने की जानकारी भी सूत्रों ने दी है और यह भी बताया है कि जबलपुर पुलिस ने उसे नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुलाया भी है जबकि राकेशसाव से पुलिस की मुलाकात भी ना हो पाई।

क्राइमब्रांच और ग्रामीण थानों की सात टीम लगी है तलाश मै

हमारे जानकारी सूत्रों की माने तो माल के साथ गायब आरोपियों की तलाश में पुलिस की सात टीम एक्टिव है जिसमें ग्रामीण थाना क्षेत्र की पुलिस के अलावा क्राइम ब्रांच के लोग भी हैं और जानकारी तो यहां तक लगी है कि इनमें से एक टीम खाली हाथ वापस भी लौट आई है उसके हाथ कुछ भी नहीं लगा। अब पुलिस के आला अधिकारियों की नजर बाकी टीमों पर लगी है और उनके लौटने के बाद ही कुछ स्पष्ट हो पाएगा।

यदि वाकई आरोपी बिहार के है तो उनके आसानी से पुलिस के हाथ लगने मै उतना संशय भी है क्योंकि वर्तमान में बिहार में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं और यह आतंक का भी जताई जा रही है कि वहां के किसी नेता के संरक्षण में आरोपी न केवल भूमिगत हो सकते है बल्कि उनके लिए बिहार से नेपाल भागना भी बहुत आसान है और यदि एक बार वह बिहार से बाहर निकल गए तो फिर उनका मिलना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में माल की बरामदगी को लेकर भी पुलिस सासंकित है और वरिष्ठ अधिकारियों की नींद उड़ी हुई है।

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