मलबे में दबी करोड़ों की ‘जीवनदायिनी’ अब कबाड़ में तब्दील

मलबे में दबी करोड़ों की ‘जीवनदायिनी’ अब कबाड़ में तब्दील
_ भोपाल में सड़ रही 108 एंबुलेंस बनीं सरकारी लापरवाही की मिसाल
_ यशभारत की पड़ताल में खुलासा ईदगाह हिल्स स्थित पुराने 108 कार्यालय परिसर के पीछे सरकारी वाहनों में अब भी लगी है सरकारी मोहर
अरविंद कपिल
भोपाल। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार लाख दावे करे, लेकिन राजधानी के ईदगाह हिल्स इलाके में खड़ी “जीवनदायिनी” 108 एंबुलेंसों की दुर्दशा इन दावों की पोल खोल रही है। करोड़ों की लागत से खरीदी गई ये एंबुलेंस अब जंग खा रही हैं । कुछ जमीन में धंस चुकीं, तो कुछ से इंजन, टायर, वायरिंग और मेडिकल उपकरण तक गायब हैं।

मलबे में दबा सरकारी धन
जब मौके पर पहुंचे तो सामने खड़ा था सरकारी उपेक्षा का जीता-जागता उदाहरण। पुराने 108 कार्यालय के पीछे खुली जगह पर दो दर्जन से अधिक एंबुलेंसें सड़ी-गली हालत में खड़ी थीं। सभी पर ‘एमपी 02’ सीरीज के शासकीय नंबर दर्ज हैं। वाहनों पर “मप्र शासन” और “नेशनल रूरल हेल्थ मिशन” की मोहर अब भी स्पष्ट देखी जा सकती है।
इनमें से कई वाहन वर्ष 2009 में खरीदे गए थे, जिनका पंजीयन अब भी परिवहन विभाग की ई-सेवा पोर्टल पर दर्ज है।

कभी बचाती थीं जान, अब बन गईं खतरा
* एमपी 02 एवी 4130 नंबर की टाटा सुमो एंबुलेंस से स्टेयरिंग के नीचे का हिस्सा तक गायब है। सीटें उखड़ी हुईं हैं और शीशे टूट चुके हैं।
* एमपी 02 एवी 2652 पूरी तरह मिट्टी में धंसी पड़ी है, उस पर मिट्टी की मोटी परतें चढ़ चुकी हैं।
* एमपी 02 एवी 2741 की हालत सबसे बदतर है। एक-एक पुर्जा चोरी हो चुका है, केवल खाली ढांचा बचा है।
* एमपी 02 एवी 2647 पर अब भी मप्र शासन की मोहर और नेशनल रूरल हेल्थ मिशन लिखा है, लेकिन पूरी बॉडी जंग से खाई हुई है।

फाइलों में दबी जिम्मेदारी
सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इस जगह की पूरी जानकारी है, लेकिन “प्रक्रियागत कारणों” के नाम पर फाइलें वर्षों से अटकी हुई हैं। कोई अधिकारी यह बताने को तैयार नहीं कि करोड़ों की सरकारी संपत्ति इस हाल में कैसे पहुंची। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस मामले पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
क्या हो सकता था फायदा
अगर समय रहते इन एंबुलेंसों की मरम्मत या नीलामी की जाती, तो इससे सरकारी राजस्व को लाखों का फायदा हो सकता था। इन वाहनों को दुरुस्त कर ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों या जिला अस्पतालों को सौंपा जा सकता था। लेकिन लापरवाही के चलते अब केवल जंग लगे ढांचे ही बचे हैं।
सरकारी उपेक्षा का प्रतीक बन चुकीं ‘जीवनदायिनी’ कभी मरीजों को जीवन देने वाली ये एंबुलेंसें आज सरकारी तंत्र की लापरवाही की पहचान बन चुकी हैं। राजधानी के बीचोंबीच मलबे में दबी ये गाड़ियाँ इस सवाल को बार-बार दोहरा रही हैं — जब ‘जीवनदायिनी’ ही मर चुकी हैं, तो सिस्टम से जीवन की उम्मीद किससे करें?

असामाजिक तत्वों का अड्डा बनी जगह
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, रात के समय इस इलाके से गुजरना खतरनाक हो गया है। नशेड़ी और संदिग्ध लोग इन टूटी-फूटी एंबुलेंसों में बैठकर शराब पीते हैं और उपद्रव करते हैं। कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। सरकारी संपत्ति अब असामाजिक तत्वों के अड्डे में बदल चुकी है।

गंभीर मामला है, जांच करवाएंगे
ईदगाह में सरकारी नंबर लिखी कई एंबुलेंस रखे होने की जानकारी मिली है। इस संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। एम्बुलेंस इस हालात में क्यों खड़ी की गई है इसकी जांच कराई जाएगी।
.. मनीष शर्मा, सीएमएचओ, भोपाल







