भोपालमध्य प्रदेश

कलेक्टर ने लिया शिक्षकों का स्थान बच्चों से पूछे सवाल

कलेक्टर ने लिया शिक्षकों का स्थान बच्चों से पूछे सवाल

– कमजोर पढ़ाई पर जताई नाराजगी, शक्षकों को कारण बताओ नोटिस के निर्देश

 

भोपाल यशभारत। प्रदेश में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी के तहत अब प्रशासनिक अधिकारी शिक्षा व्यवस्था की कमान खुद संभाल रहे हैं। नर्मदापुरम कलेक्टर सोनिया मीना ने शिक्षक की भूमिका निभाते हुए सेमरीहरचंद स्थित शाकीय जनजातीय बालक आश्रम शाला सिद्धपुर में छात्रों से संवाद किया। छात्रों को यह नहीं पता था कि वो जिनसे बात कर रहे हैं वो जिले की कलेक्टर हैं। कलेक्टर के सवालों पर छात्रों ने अपने ही अंदाज में जवाब दिए। कलेक्टर और छात्रों के बीच हुए संवाद का वीडियो भी सामने आया है। तेज तर्रार शैली के लिए कलेक्टर को जाना जाता है। कलेक्टर ने छात्रों के साथ हुए हिंदी-अंग्रेजी के शब्दार्थ पूछे तथा गणित के सरल सवाल हल कराते हुए छात्रों की वास्तविक शैक्षणिक स्थिति का आकलन किया। कलेक्टर की सीधी पूछताछ से बच्चे पहले सहज हुए और बाद में खुलकर उत्तर देने लगे।

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अधूरी मिली किताबं अभ्यास कम नजर आया

निरीक्षण के दौरान कई छात्रों की किताबें अधूरी मिलीं और अभ्यास भी कम दिखाई दिया। इस पर कलेक्टर ने गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए स्पष्ट कहा कि आवासीय विद्यालय शासन की अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना है। ऐसे संस्थानों में लापरवाही अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि बच्चे सीखने की अद्भुत क्षमता रखते हैं, लेकिन शिक्षकों की उदासीनता शैक्षणिक गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। कलेक्टर ने मौके पर ही एसी ट्राइबल को निर्देश दिए कि संबंधित शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में शैक्षणिक प्रगति की समीक्षा की जाएगी और यदि सुधार नहीं दिखा तो कठोर कार्रवाई की जाएगी।

छात्रों के भोजन की गुणवत्ता परखी

कलेक्टर ने छात्रावास के कमरों, रसोईघर, भोजन कक्ष और स्वच्छता व्यवस्थाओं का भी गहन निरीक्षण किया। रसोई में पहुंचकर उन्होंने भोजन की गुणवत्ता, सामग्री की ताजगी तथा बच्चों को परोसी जा रही थाली की स्थिति की स्वयं जांच की। भोजन कक्ष की साफ-सफाई पर उन्होंने विशेष ध्यान दिया और निर्देश दिया कि छात्रावास में स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा जाए। कलेक्टर ने छात्रावास में रहने वाले बच्चों से उनके भोजन, नींद, स्वास्थ्य और दैनिक दिनचर्या के बारे में विस्तार से पूछा। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे पढ़ाई में मन लगाएं और शिक्षकों द्वारा दिए जाने वाले कार्य को नियमित रूप से पूरा करें।

लापरवाही पर जताई नाजरागी, छात्रों की सराहना

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर का स्वर कहीं सख्त तो कहीं बेहद संवेदनशील दिखाई दिया। एक ओर उन्होंने शिक्षकों की लापरवाही पर नाराजग़ी जताई, वहीं दूसरी ओर बच्चों से मधुर संवाद कर उनकी सीखने की क्षमता की सराहना की। उनका यह अंदाज देखकर बच्चें और स्टाफ दोनों प्रभावित नजर आए। कलेक्टर का यह औचक निरीक्षण न केवल व्यवस्थाओं की खामियों को उजागर कर गया, बल्कि शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रशासन की गंभीरता भी स्पष्ट कर गया।

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