जेपी अस्पताल के मुख्य द्वार पर घंटों पड़ा रहा बुजुर्ग का शव, जिम्मेदार अधिकारी नदारद

जेपी अस्पताल के मुख्य द्वार पर घंटों पड़ा रहा बुजुर्ग का शव, जिम्मेदार अधिकारी नदारद
भोपाल में कोहरे और कड़ाके की ठंड के बीच मानवता शर्मसार; इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे थे परिजन, गेट पर ही थमीं सांसें
भोपाल, यशभारत। राजधानी में सोमवार को कोहरे की घनी चादर ने न केवल दृश्यता कम की, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की संवेदनशीलता को भी पूरी तरह धुंधला कर दिया। शहर के प्रतिष्ठित जयप्रकाश (जेपी) अस्पताल के मुख्य द्वार पर एक बुजुर्ग की मौत और उसके बाद घंटों खुले में पड़े रहे शव ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है।
इलाज की उम्मीद में थमीं सांसें
जानकारी के अनुसार, एक बुजुर्ग को उनके परिजन गंभीर स्थिति में इलाज के लिए जेपी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। कड़ाके की ठंड और शीतलहर के कारण बुजुर्ग की तबीयत पहले ही बिगड़ चुकी थी। मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि अस्पताल परिसर के मुख्य गेट पर पहुंचते ही बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया। परिजन बदहवास थे, लेकिन उससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि अस्पताल के भीतर मौजूद स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों को इसकी भनक तक नहीं लगी या शायद उन्होंने देखना जरूरी नहीं समझा।
हैरानी की बात यह है कि अस्पताल का गेट, जहां से डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की गाड़ियां लगातार गुजरती हैं, वहां बुजुर्ग का शव कई घंटों तक पड़ा रहा। कोहरे और विजिबिलिटी 20 मीटर से कम होने का बहाना शायद प्रशासन बनाए, लेकिन अस्पताल के सुरक्षा गार्ड्स और एंट्री गेट पर तैनात स्टाफ की मौजूदगी पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। मानवता को शर्मसार करने वाली इस स्थिति में किसी ने भी शव को सम्मानजनक तरीके से अंदर ले जाने या स्ट्रेचर उपलब्ध कराने की जहमत नहीं उठाई
ठंड ने बढ़ाया दर्द, सिस्टम ने दी बेरुखी
भोपाल में रविवार-सोमवार की रात इस सीजन की सबसे ठंडी रात रही। घने कोहरे के बीच जहां आम जनजीवन अस्त व्यस्त है, वहीं सरकारी अस्पताल की यह लापरवाही व्यवस्था पर बड़ा तमाचा है। अस्पताल प्रबंधन अब जांच की बात कह रहा है, लेकिन सवाल वही है क्या एक आम आदमी के जीवन और उसकी मृत्यु के बाद के सम्मान की कीमत सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगी?







