जबलपुर के सरकारी स्कूलों में 3 साल की उम्र से पढ़ाई 82 जिलों में लिए जा रहे आवेदन

जबलपुर के सरकारी स्कूलों में 3 साल की उम्र से पढ़ाई
82 जिलों में लिए जा रहे आवेदन
जबलपुर. यशभारत। अब जिले के शासकीय स्कूलों में भी नर्सरी कक्षा की शुरुआत होगी। अब बच्चे तीन साल की उम्र में ही सरकारी स्कूल में पढ़ाई कर सकेंगे। इससे निजी स्कूलों की ज्यादा फीस से अभिभावकों को राहत मिलेगी। शिक्षा विभाग ने जिले के 82 स्कूलों में नर्सरी कक्षा शुरु करने की तैयारी की है। इसमें शहर के 17 स्कूल शामिल हैं। इससे बच्चों को नजदीकी सरकारी स्कूल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी रहेगा। इस बार जिले में दस हजार बच्चों के प्रवेश का अनुमान है। आवेदन अधिक आने पर लॉटरी के माध्यम से चयन होगा।
सीट से दोगुने आवेदन आए
जानकारी के अनुसार सीएम राइज स्कूल कन्या करौंदीग्राम, सीएम राइज स्कूल मेडिकल कॉलेज, सीएम राइज स्कूल अधारताल के साथ रानी दुर्गावती स्कूल गढ़ा, सुभाषनगर स्कूल, मिडिल स्कूल कछपुरा में नर्सरी और केजी कक्षाओं के लिए सीट से दोगुने आवेदन आए हैं। मेडिकल कॉलेज सीएम राइज स्कूल के प्रभारी प्राचार्य शैलेश पाठक ने बताया कि अभिभावक सरकारी स्कूल में बच्चों का दाखिला करा रहे हैं। केजी के लिए 75 आवेदन आए हैं। मिडिल स्कूल कछपुरा के प्रवेश प्रभारी विवेक रंजन शुक्ला ने कहा कि सरकारी स्कूलों के प्रति अभिभावकों का रुझान बढ़ा है। नर्सरी में 20 से अधिक आवेदन आ चुके हैं। सीएम राइज स्कूल करौंदी ग्राम के प्राचार्य जीपी झारिया के अनुसार नर्सरी कक्षाओं में प्रवेश को लेकर फर्नीचर और शिक्षकों की व्यवस्था की गई है। प्रवेश के लिए 25 आवेदन आए हैं। प्रयास किए जा रहे हैं कि सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी कर ली जाएं।
आयु सीमा का हटा पेंच
नए सत्र से सीएम राइज स्कूलों के साथ अन्य सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाओं के लिए दाखिले होंगे। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस बार अधिक से अधिक बच्चों को प्रवेश देने की तैयारी है। न्यूनतम प्रवेश की आयु तीन वर्ष तय की गई है। अधिकतम आयु 7 वर्ष 6 माह रहेगी। पिछले साल आयु सीमा की गफलत के कारण बड़ी संख्या में बच्चे प्रवेश नहीं ले सके थे। इस बार नियम में बदलाव कर दिया गया है। अभिभावकों का भी कहना है कि उम्र का पेंच खत्म होने से अब भ्रम नहीं रहेगा।
इनका कहना है
शासकीय स्कूलों में नर्सरी कक्षाओं की शुरुआत की गई है। स्कूलों में इसके लिए समुचित संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। आवेदनों को देखकर कहा जा सकता है कि अभिभावकों में इस व्यवस्था को लेकर उत्साह है। इससे सरकारी स्कूलों के प्रति अभिभावकों में रुझान बढ़ेगा।
योगेश शर्मा, जिला परियोजना समन्वयक







