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आधा दर्जन समितियो में स्टॉक कम, कार्रवाई से बच रहे अधिकारी

बात-बात पर होती थी FIR अब तो जांच से भी इनकार

आधा दर्जन समितियो में स्टॉक कम, कार्रवाई से बच रहे अधिकारी

बात-बात पर होती थी FIR अब तो जांच से भी इनकार

 

जबलपुर, यश भारत। जिले में धान उपार्जन का कार्य खत्म हुए लगभग एक महीने का समय पूरा होने को आ रहा है। उसके बाद भी कुछ समितियो का हिसाब नहीं मिल रहा। लगभग 50000 क्विंटल ऐसी धान है जो स्टॉक में दिख रही है जिसमें लगभग आधा दर्जन समितियां के नाम सामने आ रहे हैं, लेकिन वास्तविकता के धरातल पर वहां चद बोरिया ही मौजूद है, और बाकी धान कहां गायब हो गई इसका कोई अता पता नहीं है। उपार्जन की शुरुआत में जहां गोदाम के बाहर धान डंप होने पर भी केंद्रों को हटा दिया गया और गोदाम न खोलने पर एफ आई आर कर दी गई, लेकिन अब करोड़ों रुपए की धान गायब हो जाने के बाद भी अधिकारी आंख बंद करें बैठे हैं

क्या कर रहे थे नोडल अधिकारी

पूरे मामले में नोडल अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय होना चाहिए। जिला प्रशासन द्वारा प्रत्येक केंद्र पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी लेकिन उनकी मौजूदगी में भी गोलमाल हो गया है तो फिर उनकी जिम्मेदारी तय होना चाहिए। जब अधिकारियों की मौजूदगी कोई ओचित्य ही नहीं है तो फिर उन्हें वहां पर क्या कमाई करने के लिए भेजा गया था, और यदि उनकी जिम्मेदारी थी तो फिर उनसे भी सवाल होना चाहिए।

जब नहीं है स्टॉक तो किस बात की हो रही जांच

जिन समितियां में हजारों क्विंटल धान का स्टॉक गायब है वहां पर अधिकारी कागज खागलने ने में लगे हुए हैं। जबकि उपार्जन की जिम्मेदारी को लेकर पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता है तो फिर जिम्मेदारों पर कार्यवाही क्यों नहीं की जाती। पहले तो उन लोगों पर कार्रवाई होना चाहिए जिन पर उपार्जन की जिम्मेदारी थी और फिर उसके बाद उन लोगों की तलाश होना चाहिए जिन्होंने इस पूरे गोलमाल में फायदा उठाया है, लेकिन सबसे पहले तो जिम्मेदार अधिकारियों पर ही कार्यवाही होनी चाहिए जिसको लेकर प्रशासन खामोश बैठा है।

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