शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने दी सभी देशवासियों को दीपावली पर्व की शुभकामनाएं
श्री रामवाणीसेवितायै नमः

वेदों में अंधकार में व्याप्त प्रकाशमय अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने के कार्य हेतु शाश्वत प्रार्थना है। मनुष्य ही नहीं, पशु-पक्षी भी अज्ञान से भयभीत रहते हैं, इसलिए सृष्टि का परम उद्देश्य अज्ञान के अंधकार से ज्ञान का प्रकाश प्राप्त करना है। कार्तिक अमावस्या को मनाया जाने वाला दीपोत्सव अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाने का पर्व है। यह अज्ञान और दरिद्रता का नाश करके ज्ञान लक्ष्मी की आराधना का महापर्व है। वेदों ने लक्ष्मी के स्वरूप का वर्णन इस प्रकार किया है-हे प्रभु, समस्त शुभों के धाम, समस्त अशुभों के धाम, हृदय के मन, समस्त अशुभों के कारण। वेदों ने लक्ष्मी के स्वरूप का वर्णन इस प्रकार किया है-हे प्रभु, समस्त शुभों के धाम, समस्त अशुभों के धाम, हृदय के मन, समस्त अशुभों के कारण। वेदों में लक्ष्मी के स्वरूप का वर्णन इस प्रकार किया गया है-हे प्रभु, समस्त
शुभों के धाम, समस्त अशुभों के धाम, हृदय के मन, समस्त अशुभों के कारण। श्रद्धा, समस्त पीढ़ियों की उत्पत्ति, समस्त सृष्टि की देवी है, और समस्त सृष्टि की देवी समस्त सृष्टि की देवी है। अर्थात् पुण्यात्माएँ वहाँ अछूत भगवान लक्ष्मी के रूप में निवास करती हैं।
पश्चिम श्री द्वारका शारदापीठ देवभूमि द्वारका 361335 (गुजरात) भारत पश्चिम श्री द्वारका शारदापीठ जगदुरु शंकराचार्य विजयतेरम







