बांग्लादेश में बढ़ता कट्टरपंथ भारत के लिए नई सुरक्षा चुनौती, ‘चिकन नेक’ से पूर्वोत्तर तक खतरे की आशंका
पूर्व विदेश मंत्री ने जताई चिंता

बांग्लादेश में बढ़ता कट्टरपंथ भारत के लिए नई सुरक्षा चुनौती, ‘चिकन नेक’ से पूर्वोत्तर तक खतरे की आशंका
नई दिल्ली। शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता के साथ कट्टरपंथी गतिविधियों को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों के आरोप, भारत विरोधी बयानबाजी, जिहादी नेटवर्क और हथियारों की तस्करी से जुड़े दावों ने दोनों देशों के संबंधों को भी प्रभावित किया है। बदलते हालात का असर भारत की सुरक्षा, खासकर पूर्वोत्तर और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
पूर्व विदेश मंत्री ने जताई चिंता
बांग्लादेश के पूर्व विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को पत्र भेजकर देश की बिगड़ती राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने बांग्लादेश में बढ़ते कथित जिहादी उग्रवाद, कट्टरता और हथियारों के प्रसार की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा की मांग की है। मोमेन ने जेलों की स्थिति, कथित मानवाधिकार उल्लंघन, हिरासत में मौतों और जेलों में भीड़भाड़ जैसे मुद्दे भी उठाए हैं। उन्होंने बड़ी संख्या में लोगों को बिना जमानत या औपचारिक आरोपों के हिरासत में रखे जाने का दावा किया है। हालांकि, इन आंकड़ों और आरोपों का स्वतंत्र सत्यापन जरूरी है।
‘चिकन नेक’ पर बढ़ी निगरानी
बांग्लादेश में लंबे समय तक अस्थिरता रहने की स्थिति में भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिलीगुड़ी कॉरिडोर प्रमुख चिंता का क्षेत्र हो सकता है। पश्चिम बंगाल का यह संकरा भू-भाग भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। बांग्लादेश से इसकी निकटता के कारण वहां पैदा होने वाली किसी भी गंभीर सुरक्षा चुनौती का असर सीमावर्ती क्षेत्रों पर पड़ सकता है।







